Haryana: भंडारण निगम के दो प्रबंधकों की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट की रोक, संजीव वर्मा और अशोक खेमका से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी पर रोक लगाते हुए कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा भंडारण निगम के एमडी संजीव वर्मा, व पूर्व एमडी आईएएस अशोक खेमका को 27 अक्तूबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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हरियाणा भंडारण निगम के दो प्रबंधकों संदीप कुमार शर्मा और जगदीश चंद की बर्खास्तगी के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। इन दोनों प्रबंधकों को निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) संजीव कुमार ने योग्यता मानक पूरे न करने का आरोप लगाते हुए बर्खास्त कर दिया था। फैसले को दोनों अफसरों ने चुनौती दी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि उन्हें तय नियमों के खिलाफ जाकर बर्खास्त किया गया है।
उनकी नियुक्ति के दौरान तय प्रक्रिया का पालन किया गया। तीन आईएएस अधिकारियों की कमेटी ने उनका इंटरव्यू लिया था। ऐसे में नियुक्ति अवैध नहीं हो सकती। यहां तक की कारण बताओ नोटिस के जवाब में उन्होंने अपना पक्ष रखा था। यह भी बताया था कि दो अन्य अधिकारियों को बर्खास्त करने पर हाईकोर्ट रोक लगा चुका है।
इस जवाब के बाद भी सुनवाई नहीं हुई और उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। याची पक्ष की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी पर रोक लगाते हुए कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा भंडारण निगम के एमडी संजीव वर्मा, व पूर्व एमडी आईएएस अशोक खेमका को 27 अक्तूबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
दो आईएएस की लड़ाई में अफसर निशाने पर
भंडारण निगम के मौजूदा एमडी संजीव वर्मा ने अशोक खेमका के कार्याकाल में हुई नियुक्तियों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दर्जनों अधिकारियों की नियुक्ति रद्द की हैं। खेमका के खिलाफ वर्मा पंचकूला के सेक्टर-5 थाने में मुकदमा दर्ज करवा चुके हैं। खेमका ने भी आर्काइव डिपार्टमेंट में वाहन के दुरुपयोग के मामले में संजीव वर्मा और रवींद्र के खिलाफ केस दर्ज करवाया है। दोनों मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन है। भंडारण निगम के प्रबंधक पद से बर्खास्त किए प्रदीप कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में बताया कि वर्तमान व पूर्व एमडी के बीच चल रही लड़ाई के चलते उनको निशाना बनाया गया और नौकरी से हटा दिया गया।
एजेंसियों से जांच की मांग पर हाईकोर्ट कर चुका इन्कार
हरियाणा के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका और संजीव वर्मा की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के मामले में दखल से हाईकोर्ट इन्कार कर चुका है। जनहित याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट जगमोहन भट्टी ने हाईकोर्ट को बताया था कि दोनों आईएएस अधिकारियों ने एक-दूसरे के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कराया है। जिस प्रकार से दो आईएएस अधिकारी आपस में भिड़ रहे हैं उससे लोगों में सरकार के प्रति विश्वास कम हो रहा है। याची ने इस मामले में जांच एजेंसियों को जांच करने का निर्देश जारी करने की अपील की गई थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इन्कार करते हुए जनहित याचिका को खारिज कर दिया था।