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Highcourt: हरियाणा में 57 फीसदी आरक्षण को चुनौती, जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
Fri, 17 May 2024 08:37 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 17 May 2024 08:37 AM IST
सार
यूथ फॉर इक्वेलिटी ने एडवोकेट अशोक शर्मा नाभेवाला और गौरी शर्मा के माध्यम से बताया कि आरक्षण को लेकर अभी तक सुप्रीम कोर्ट की कई पीठ और संवैधानिक पीठ तय कर चुकी हैं कि आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक होने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका दाखिल करते हुए संस्था यूथ फॉर इक्वेलिटी ने एडवोकेट अशोक शर्मा नाभेवाला और गौरी शर्मा के माध्यम से बताया कि आरक्षण को लेकर अभी तक सुप्रीम कोर्ट की कई पीठ और संवैधानिक पीठ तय कर चुकी हैं कि आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की खंडपीठ ने इस विषय को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किया था। इन सबके बावजूद हरियाणा सरकार पिछड़ा वर्ग (सेवा में व शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम 2016 लेकर आई थी। याची ने बताया कि इस अधिनियम के आने के बाद प्रदेश में कुल आरक्षण 57 प्रतिशत हो गया है जो निर्धारित से 7 प्रतिशत अधिक है।
प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग को 20 प्रतिशत, बीसी ए को 16, बी को 11 और सी को 10 प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है। ऐसे में अभी प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में प्रवेश व ग्रुप सी व डी की नौकरियों में 57 प्रतिशत पद आरक्षित हैं। याची ने कहा कि इस प्रकार यदि आरक्षण को तय सीमा से अधिक बढ़ने दिया गया तो यह विकट स्थिति पैदा कर देगा। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में अब हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए संस्था यूथ फॉर इक्वेलिटी ने एडवोकेट अशोक शर्मा नाभेवाला और गौरी शर्मा के माध्यम से बताया कि आरक्षण को लेकर अभी तक सुप्रीम कोर्ट की कई पीठ और संवैधानिक पीठ तय कर चुकी हैं कि आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की खंडपीठ ने इस विषय को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किया था। इन सबके बावजूद हरियाणा सरकार पिछड़ा वर्ग (सेवा में व शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम 2016 लेकर आई थी। याची ने बताया कि इस अधिनियम के आने के बाद प्रदेश में कुल आरक्षण 57 प्रतिशत हो गया है जो निर्धारित से 7 प्रतिशत अधिक है।
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प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग को 20 प्रतिशत, बीसी ए को 16, बी को 11 और सी को 10 प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है। ऐसे में अभी प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में प्रवेश व ग्रुप सी व डी की नौकरियों में 57 प्रतिशत पद आरक्षित हैं। याची ने कहा कि इस प्रकार यदि आरक्षण को तय सीमा से अधिक बढ़ने दिया गया तो यह विकट स्थिति पैदा कर देगा। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में अब हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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