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संज्ञेय अपराध की सूचना पर पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य : हाईकोर्ट

Thu, 29 Oct 2020 04:43 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 29 Oct 2020 04:43 PM IST
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High court said, Compulsory filing of FIR for police on cognizable offense
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस द्वारा केवल प्राथमिक जांच करने को गलत करार देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस के लिए अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही शिकायत के आधार पर महिला की हत्या के मामले में उसके बेटे, बहू, बहू के मायके वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं।

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दिल्ली निवासी हितेश भारद्वाज ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया उसके सगे भाई पर पिता के कत्ल का इल्जाम था, जिसके चलते उसने दिल्ली में सात साल ट्रायल झेला। इसके बाद वह बरी हो गया और याची की मां पर दबाव बनाकर वसीयत करवाई और पूरी प्रॉपर्टी अपने नाम लिखवा ली। हितेश ने याचिका में बताया कि उसकी मां ने मृत्यु से कुछ दिन पहले बताया था कि उसने अपनी वसीयत बदल दी है और उसे और उसके चचेरे भाई को बराबर का हिस्सेदार बनाया है। मां के इस फैसले से उसका भाई गुस्से में था।

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उसने बताया कि 7 मार्च 2020 को चचेरा भाई और उसके सास- ससुर दिल्ली से उसकी मां को अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर दिखाने के बहाने दिल्ली से निकले। हितेश ने बताया कि वसीयत की बात सामने आने के बाद अचानक बने इस कार्यक्रम से मां को शक हुआ तो उन्होंने अपने भतीजे संदीप और एक अन्य युवक को साथ लिया। याची के भाई ने जमीन दिखाने की बात कहकर एक दिन अपनी ससुराल बटाला रुकने का निर्णय लिया और रात 1 बजे वहां पहुंचे।

सुबह संदीप और बलबीर ने जब याची की मां को नहीं पाया तो वे हैरान हुए। इतने में ही याची का भाई आया और बताया कि रात को मां को दिल का दौरा पड़ा और उनका इलाज चल रहा है। इसके बाद जब दोनों अस्पताल पहुंचे तो मां को मृत पाया। 

मां की मौत संदेह पैदा करने वाली
याचिकाकर्ता का कहना है कि कुछ ही दिन पहले याची की मां ने वसीयत की थी और उनको कोई बीमारी नहीं थी। इसके चलते मां की मौत होना संदेह पैदा करने वाला है। याची ने 20 मार्च को आपराधिक शिकायत भी दी लेकिन पुलिस ने बिना एफआईआर दर्ज किए प्राथमिक जांच की रिपोर्ट तैयार कर मान लिया कि मां की हत्या नहीं हुई। हाईकोर्ट ने अब यह स्पष्ट किया है कि संज्ञेय अपराध की स्थिति में पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करें या न करें यह विकल्प मौजूद नहीं है। 

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