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Chandigarh News: सिविल मामले में एफआईआर पर हरियाणा पुलिस को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
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गुरुग्राम में कार की खरीद के पैसे से जुड़ा था मामला, सिविल सूट था लंबित
पुलिस आयुक्त को जांच कर रिपोर्ट सौंपने का हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश
चंडीगढ़।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक सिविल मामले में एफआईआर दर्ज करने पर गुरुग्राम पुलिस को फटकार लगाते हुए पुलिस आयुक्त को मामले में जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई पर जांच अधिकारी को भी मौजूद रहने का निर्देश दिया है। राज ऋषि पांडे ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि मई 2022 में उसने 22.50 लाख रुपये में एक कार खरीदी थी और 12 लाख रुपये का भुगतान किया। समझौते के अनुसार बाकी की राशि 2023 में दिवाली तक चुकानी थी। याची ने बताया कि पैसे का इंतजाम न होने पर उसने कार वापस कर दी और अभी वह शिकायतकर्ता के पास ही मौजूद है। कार वापस मिलने पर भी शिकायतकर्ता ने बाकी के पैसे की वसूली के लिए दीवानी मुकदमा दाखिल कर दिया। याची पक्ष के वकील ने कहा कि पुलिस अधिकारी उन मामलों में एफआईआर कैसे दर्ज कर रहे हैं जो पूरी तरह से सिविल हैं। याची ने कहा कि यह एफआईआर केवल इसलिए दर्ज की गई है ताकि याची पर शिकायतकर्ता के सामने झुकने का दबाव बनाया जा सके। वर्तमान एफआईआर कानून का दुरुपयोग है और ऐसे में इसे खारिज किया जाना चाहिए। कोर्ट ने याची पक्ष को सुनने के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को मामले की जांच कर कोर्ट में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
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पुलिस आयुक्त को जांच कर रिपोर्ट सौंपने का हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश
चंडीगढ़।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक सिविल मामले में एफआईआर दर्ज करने पर गुरुग्राम पुलिस को फटकार लगाते हुए पुलिस आयुक्त को मामले में जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई पर जांच अधिकारी को भी मौजूद रहने का निर्देश दिया है। राज ऋषि पांडे ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि मई 2022 में उसने 22.50 लाख रुपये में एक कार खरीदी थी और 12 लाख रुपये का भुगतान किया। समझौते के अनुसार बाकी की राशि 2023 में दिवाली तक चुकानी थी। याची ने बताया कि पैसे का इंतजाम न होने पर उसने कार वापस कर दी और अभी वह शिकायतकर्ता के पास ही मौजूद है। कार वापस मिलने पर भी शिकायतकर्ता ने बाकी के पैसे की वसूली के लिए दीवानी मुकदमा दाखिल कर दिया। याची पक्ष के वकील ने कहा कि पुलिस अधिकारी उन मामलों में एफआईआर कैसे दर्ज कर रहे हैं जो पूरी तरह से सिविल हैं। याची ने कहा कि यह एफआईआर केवल इसलिए दर्ज की गई है ताकि याची पर शिकायतकर्ता के सामने झुकने का दबाव बनाया जा सके। वर्तमान एफआईआर कानून का दुरुपयोग है और ऐसे में इसे खारिज किया जाना चाहिए। कोर्ट ने याची पक्ष को सुनने के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त को मामले की जांच कर कोर्ट में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।