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Chandigarh News: रिटायरमेंट लाभ में देरी पर सरकार को हाईकोर्ट की फटकार
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श्रेणी तीन और चार के कर्मचारियों को महीनों इंतजार कराने पर जताई चिंता, 5 नवंबर तक मांगा जवाब
लंबित मामलों, देरी के कारण और बकाया पीएफ-सीपीएफ राशि का भी मांगा ब्योरा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नगर निकायों के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ देने में हो रही देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने खास तौर पर श्रेणी तीन और चार के कर्मचारियों को महीनों इंतजार कराने पर चिंता जताते हुए स्थानीय निकाय विभाग के सचिव को 5 नवंबर तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस नामित कुमार की पीठ ने कहा कि सेवानिवृत्ति लाभ किसी कर्मचारी पर किया गया एहसान नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा से अर्जित उसका वैध अधिकार है। इसके बावजूद कई कर्मचारियों को अपने हक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। अदालत ने यह भी नोट किया कि कई मामलों में याचिका दायर होने के बाद ही संबंधित निकाय भुगतान का आश्वासन देते हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि वित्तीय कठिनाई या प्रशासनिक सुस्ती लाभ रोकने का आधार नहीं हो सकती। अदालत ने सरकार से लंबित मामलों की संख्या, देरी की अवधि, कारण और कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) व अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) की बकाया राशि का विवरण भी मांगा है। साथ ही सेवानिवृत्ति से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए संस्थागत व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
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लंबित मामलों, देरी के कारण और बकाया पीएफ-सीपीएफ राशि का भी मांगा ब्योरा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नगर निकायों के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ देने में हो रही देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने खास तौर पर श्रेणी तीन और चार के कर्मचारियों को महीनों इंतजार कराने पर चिंता जताते हुए स्थानीय निकाय विभाग के सचिव को 5 नवंबर तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस नामित कुमार की पीठ ने कहा कि सेवानिवृत्ति लाभ किसी कर्मचारी पर किया गया एहसान नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा से अर्जित उसका वैध अधिकार है। इसके बावजूद कई कर्मचारियों को अपने हक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। अदालत ने यह भी नोट किया कि कई मामलों में याचिका दायर होने के बाद ही संबंधित निकाय भुगतान का आश्वासन देते हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि वित्तीय कठिनाई या प्रशासनिक सुस्ती लाभ रोकने का आधार नहीं हो सकती। अदालत ने सरकार से लंबित मामलों की संख्या, देरी की अवधि, कारण और कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) व अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) की बकाया राशि का विवरण भी मांगा है। साथ ही सेवानिवृत्ति से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए संस्थागत व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
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