फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court rejected petition demanding benefit of seniority pharmacists recruited in Haryana

Highcourt: अस्थायी कर्मचारी नियमित होने के बाद पूर्व की सेवा के वरिष्ठता लाभ के पात्र नहीं, याचिका खारिज

Tue, 09 Jan 2024 09:48 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 09 Jan 2024 09:48 AM IST
सार

याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तदार्थ नियुक्ति यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं की गई है तो ऐसी सेवा को कर्मचारी की वरिष्ठता के निर्धारण के लिए नहीं गिना जा सकता।

विज्ञापन
High Court rejected petition demanding benefit of seniority pharmacists recruited in Haryana
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा में तय प्रक्रिया का पालन किए बगैर भर्ती हुए फार्मासिस्टों को नियमित होने के बाद नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता का लाभ देने की मांग वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। 

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि तय प्रक्रिया के बिना अनुबंध पर भर्ती हुए लोग नियमित होने की तिथि से ही वरिष्ठता के पात्र हैं। हाईकोर्ट के जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी ने प्रदीप कुमार गुप्ता और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर फैसला करते हुए ये आदेश पारित किए हैं।
विज्ञापन


याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया था कि वे अक्तूबर 1986 में फार्मासिस्ट के तौर पर नियुक्त हुए थे और अगस्त 1989 को उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं थीं। उनकी नियुक्ति अस्थायी तौर पर स्टॉप गैप व्यवस्था के रूप में की गई थी। याचिकाकर्ता इस आधार पर अपनी नियुक्ति के बाद चयनित सभी लोगों पर वरिष्ठता की मांग कर रहे थे कि उनकी सेवाओं को भी राज्य सरकार द्वारा नियमित किया गया था, इस प्रकार वे अनुबंध आधार पर प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता के हकदार हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिकाकर्ताओं के बाद राज्य की भर्ती एजेंसियों द्वारा 227 फार्मासिस्टों का चयन किया गया था और याचिकाकर्ता उनकी नियुक्ति से पहले सेवा में वरिष्ठता की मांग कर रहे थे। याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तदार्थ नियुक्ति यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं की गई है तो ऐसी सेवा को कर्मचारी की वरिष्ठता के निर्धारण के लिए नहीं गिना जा सकता। लोक सेवा आयोग या अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड सहित राज्य की भर्ती एजेंसियों द्वारा चयनित कर्मचारी वरिष्ठता के उद्देश्य से तदर्थ कर्मचारियों की तुलना में प्राथमिकता पर होगा। 

याचिकाकर्ता तदर्थ सेवाओं को जोड़कर वरिष्ठता के लाभ का दावा कर रहे हैं, जो उन्होंने सेवाओं को नियमित करने से पहले प्रदान की थी। हाईकोर्ट ने पाया कि फार्मासिस्ट का पद अधीनस्थ कर्मचारी चयन बोर्ड के माध्यम से भरा जाना था, जैसा कि नियमित चयन करते समय किया गया था। जबकि याचिकाकर्ताओं की प्रारंभिक नियुक्ति कानून के अनुसार नहीं थी, तो उनके द्वारा प्रदान की गई तदर्थ सेवा को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठता का लाभ देने का याचिकाकर्ताओं का दावा मंजूर नहीं किया जा सकता। 


याचिकाकर्ताओं की सेवा को 28 फरवरी, 1991 के निर्देशों के तहत नियमित किया गया था, जिसमें तदर्थ कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए कुछ नियम और शर्तें रखी गईं थीं। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने वरिष्ठता के निर्धारण करने में अस्थायी सेवा जोड़ने की मांग को खारिज कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed