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पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्ठल को रेंट रिफंड करने पर पंजाब सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 01 Aug 2018 09:43 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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पंजाब की पूर्व सीएम राजिंदर कौर भट्ठल से अवधि समाप्त होने के बाद भी सरकारी आवास खाली न करने लगभग साढ़े 84 लाख की वसूली राशि वापिस करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसे लेकर दाखिल जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने पंजाब सरकार सहित राजिंदर कौर भट्ठल को 6 दिसंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
पटियाला के याचिकाकर्ता एडवोकेट परमजीत सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि भट्ठल को वर्ष 1992 में बतौर राज्य मंत्री सेक्टर-2 में 46 नंबर सरकारी आवास अलॉट किया गया था। 1996 में जब वह सीएम बनी तो उन्होंने यही मकान अपने पास रखा। वर्ष 1998 से 2002 तक जब वह मुख्यमंत्री नहीं रही, तब उन्हें यही सरकारी आवास बतौर पूर्व मुख्यमंत्री के नाते अलॉट कर दिया गया। वर्ष 2002 में सरकार नए नियम बना पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई सुविधाएं वापिस ले ली थी।
मार्च 2002 में वह कैबिनेट मंत्री रही और फिर जुलाई 2004 में उन्हें उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। फरवरी 2007 तक वह बतौर उप मुख्य मंत्री के इस आवास पर रहती रही। वर्ष 2007 में उनका विपक्ष के नेता के तौर पर चयन किया गया। वर्ष 2012 में जब उनकी जगह सुनील जाखड़ विपक्ष के नेता बने तब भी उन्होंने यह आवास खाली नहीं किया। सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया जिस पर मुख्यमंत्री ने गौर करते हुए उन्हें सेक्टर-2 में ही एक अन्य सरकारी आवास नंबर-8 अलॉट कर दिया।
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बावजूद इसके भट्ठल ने मकान नंबर-46 खाली नहीं किया इस पर भट्ठल पर प्रतिमाह 8 लाख 52 हजार का जुर्माना लगा दिया गया। इस लिहाज से उन पर 15 महीनों का कुल 84 लाख 57 हजार 735 रुपये जुर्माना लगा। वर्ष 2017 में जब राज्य विधानसभा के चुनाव होने थे तो अपना नामांकन भरने के लिए उन्हें सभी बकाया राशि जमा करवाने पर मजबूर होना पड़ा। जैसे ही इन चुनावों में कांग्रेस विजयी रही तो उन्होंने उनके द्वारा जमा करवाए गए रेंट को माफ किए जाने की सरकार से मांग की और सरकार ने इसे माफ भी कर दिया।
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पटियाला के याचिकाकर्ता एडवोकेट परमजीत सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि भट्ठल को वर्ष 1992 में बतौर राज्य मंत्री सेक्टर-2 में 46 नंबर सरकारी आवास अलॉट किया गया था। 1996 में जब वह सीएम बनी तो उन्होंने यही मकान अपने पास रखा। वर्ष 1998 से 2002 तक जब वह मुख्यमंत्री नहीं रही, तब उन्हें यही सरकारी आवास बतौर पूर्व मुख्यमंत्री के नाते अलॉट कर दिया गया। वर्ष 2002 में सरकार नए नियम बना पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई सुविधाएं वापिस ले ली थी।
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मार्च 2002 में वह कैबिनेट मंत्री रही और फिर जुलाई 2004 में उन्हें उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। फरवरी 2007 तक वह बतौर उप मुख्य मंत्री के इस आवास पर रहती रही। वर्ष 2007 में उनका विपक्ष के नेता के तौर पर चयन किया गया। वर्ष 2012 में जब उनकी जगह सुनील जाखड़ विपक्ष के नेता बने तब भी उन्होंने यह आवास खाली नहीं किया। सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया जिस पर मुख्यमंत्री ने गौर करते हुए उन्हें सेक्टर-2 में ही एक अन्य सरकारी आवास नंबर-8 अलॉट कर दिया।
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बावजूद इसके भट्ठल ने मकान नंबर-46 खाली नहीं किया इस पर भट्ठल पर प्रतिमाह 8 लाख 52 हजार का जुर्माना लगा दिया गया। इस लिहाज से उन पर 15 महीनों का कुल 84 लाख 57 हजार 735 रुपये जुर्माना लगा। वर्ष 2017 में जब राज्य विधानसभा के चुनाव होने थे तो अपना नामांकन भरने के लिए उन्हें सभी बकाया राशि जमा करवाने पर मजबूर होना पड़ा। जैसे ही इन चुनावों में कांग्रेस विजयी रही तो उन्होंने उनके द्वारा जमा करवाए गए रेंट को माफ किए जाने की सरकार से मांग की और सरकार ने इसे माफ भी कर दिया।