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आईएएस अशोक खेमका के पुत्र की याचिका पर केंद्र सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, जानिए मामला
Tue, 27 Aug 2019 02:04 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 27 Aug 2019 02:04 PM IST
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आईएएस अशोक खेमका के पुत्र गणेश खेमका की याचिका पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर सजा की अवधि के अनुसार कैसे तय किया जा सकता है कि कोई व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है या नहीं। हाईकोर्ट ने यह नोटिस गणेश खेमका की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है।
याचिका दाखिल करते हुए गणेश खेमका ने कहा था कि किसी भी अपराध के दोषी और सजा पाने वाले सभी लोगों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। याची ने कहा कि फिलहाल यह प्रावधान है कि जिस व्यक्ति को 2 साल से कम की सजा होती है, वह चुनाव लड़ सकता है और जिसको इससे अधिक की होती है वह चुनाव नहीं लड़ सकता।
याची ने कहा कि अपराधी तो अपराधी होता है चाहे उसने छोटा गुनाह किया हो या बड़ा। ऐसे में दोनो ही गुनहगार हुए तो उनमें भेदभाव कैसे किया जा सकता है। दोषी करार दिए गए और सजा पाने वाले किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ऐसा न करना संविधान में निहित समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी पर आधारित खंडपीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि अपराधियों में कैसे भेदभाव किया जा सकता है और सजा की अवधि के अनुसार कैसे तय किया जा सकता है कि किसी को चुनाव लड़ने के लिए योग्य घोषित करना है या नहीं। अगली सुनवाई पर इस बारे में केंद्र सरकार को उनका पक्ष रखना होगा।
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याचिका दाखिल करते हुए गणेश खेमका ने कहा था कि किसी भी अपराध के दोषी और सजा पाने वाले सभी लोगों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया जाना चाहिए। याची ने कहा कि फिलहाल यह प्रावधान है कि जिस व्यक्ति को 2 साल से कम की सजा होती है, वह चुनाव लड़ सकता है और जिसको इससे अधिक की होती है वह चुनाव नहीं लड़ सकता।
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याची ने कहा कि अपराधी तो अपराधी होता है चाहे उसने छोटा गुनाह किया हो या बड़ा। ऐसे में दोनो ही गुनहगार हुए तो उनमें भेदभाव कैसे किया जा सकता है। दोषी करार दिए गए और सजा पाने वाले किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ऐसा न करना संविधान में निहित समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी पर आधारित खंडपीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि अपराधियों में कैसे भेदभाव किया जा सकता है और सजा की अवधि के अनुसार कैसे तय किया जा सकता है कि किसी को चुनाव लड़ने के लिए योग्य घोषित करना है या नहीं। अगली सुनवाई पर इस बारे में केंद्र सरकार को उनका पक्ष रखना होगा।