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Highcourt: पति को जलाने के आरोप में घिरी पत्नी के भरण-पोषण पर रोक, HC ने कहा-ये अपराध को बढ़ावा देने जैसा
Fri, 24 Apr 2026 11:58 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 24 Apr 2026 11:58 AM IST
सार
13-14 मई 2020 की रात पत्नी ने सोते समय उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। इस हमले में वह 45 प्रतिशत तक झुलस गया और चार महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को जलाकर मारने के प्रयास के आरोपों का सामना कर रही महिला को दिए गए भरण-पोषण के आदेश पर रोक लगा दी है।
लुधियाना की फैमिली कोर्ट ने 25 अगस्त 2025 को महिला के पक्ष में 5 हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था जिसे पति ने चुनौती दी थी। जस्टिस कीर्ति सिंह ने आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए पति की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर नोटिस जारी किया है।
पति की ओर से एडवोकेट लवनीत ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि 13-14 मई 2020 की रात पत्नी ने सोते समय उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। इस हमले में वह 45 प्रतिशत तक झुलस गया और चार महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा। अब तक उसकी आठ सर्जरी हो चुकी हैं जबकि नौवीं सर्जरी की सलाह दी गई है। उसे लगातार विशेष कपड़े और इलाज की जरूरत है।
याचिका में कहा गया कि घटना से पहले पति परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था लेकिन अब वह शारीरिक और आर्थिक रूप से अक्षम हो गया है।
मामले में 15 मई 2020 को एफआईआर दर्ज हुई थी। पत्नी एक साल से अधिक समय तक फरार रही और उसकी अग्रिम जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हुईं। 21 अक्टूबर 2021 को हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। पति ने दलील दी कि ऐसे गंभीर आरोपों के बीच भरण-पोषण देना अपराध को बढ़ावा देने जैसा है।
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लुधियाना की फैमिली कोर्ट ने 25 अगस्त 2025 को महिला के पक्ष में 5 हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था जिसे पति ने चुनौती दी थी। जस्टिस कीर्ति सिंह ने आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए पति की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर नोटिस जारी किया है।
पति की ओर से एडवोकेट लवनीत ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि 13-14 मई 2020 की रात पत्नी ने सोते समय उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। इस हमले में वह 45 प्रतिशत तक झुलस गया और चार महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहा। अब तक उसकी आठ सर्जरी हो चुकी हैं जबकि नौवीं सर्जरी की सलाह दी गई है। उसे लगातार विशेष कपड़े और इलाज की जरूरत है।
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याचिका में कहा गया कि घटना से पहले पति परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था लेकिन अब वह शारीरिक और आर्थिक रूप से अक्षम हो गया है।
मामले में 15 मई 2020 को एफआईआर दर्ज हुई थी। पत्नी एक साल से अधिक समय तक फरार रही और उसकी अग्रिम जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हुईं। 21 अक्टूबर 2021 को हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। पति ने दलील दी कि ऐसे गंभीर आरोपों के बीच भरण-पोषण देना अपराध को बढ़ावा देने जैसा है।
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