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Highcourt: नाबालिग से दुष्कर्म में पीड़िता की सहमति का कानूनन महत्व नहीं, आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
Wed, 21 Jan 2026 03:44 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 21 Jan 2026 03:44 PM IST
सार
संगरूर निवासी आरोपी ने दलील दी थी कि पीड़िता की उम्र 15 वर्ष थी, लेकिन वह परिपक्व थी और अपने कार्यों के परिणामों को समझती थी। उन्होंने दावा किया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से थे।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि नाबालिग की सहमति के दावों के आधार पर अपराध की गंभीरता को कम नहीं आंका जा सकता। हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन शोषण के मामले में 19 वर्षीय आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
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कोर्ट ने कहा कि नाबालिग की सहमति का कानूनन कोई महत्व नहीं है। संगरूर निवासी आरोपी ने दलील दी थी कि पीड़िता की उम्र 15 वर्ष थी, लेकिन वह परिपक्व थी और अपने कार्यों के परिणामों को समझती थी। उन्होंने दावा किया कि दोनों के बीच संबंध सहमति से थे और एफआईआर ही त्रुटिपूर्ण है क्योंकि कथित घटना के समय आरोपी स्कूल में मौजूद था। इस तर्क के समर्थन में आरोपी का स्कूल उपस्थिति प्रमाण-पत्र भी अदालत के समक्ष रखा गया।
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इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया कि बाद में शिकायतकर्ता ने एक हलफनामा दायर कर यह कहा कि एफआईआर गलतफहमी में दर्ज कराई गई थी और आरोपी निर्दोष है। सरकार की ओर से याचिका का कड़ा विरोध किया और कहा कि मामले की प्रकृति और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।
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हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष दर्ज अपने बयान में आरोपों को कायम रखा है और बाद में आरोपों से मुकर गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कोई भी व्यक्ति कानून के साथ लुका-छिपी नहीं खेल सकता। पहले गंभीर आरोप लगाना और फिर अपनी सुविधा के अनुसार उससे मुकर जाना स्वीकार्य नहीं है। एफआईआर के बाद किसी नागरिक को आरोपी को निर्दोष करार देने का अधिकार नहीं है, आरोपों की सच्चाई का निर्धारण केवल कोर्ट ही करेगा। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि एफआईआर झूठी पाई जाती है तो शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सहमति के प्रश्न पर कोर्ट ने दो टूक कहा कि नाबालिग की सहमति का कानून में कोई महत्व नहीं है। पीड़िता की उम्र मात्र 15 वर्ष होने के कारण, कथित सहमति, चैट या फोटो जैसे तर्क कानूनी स्थिति को नहीं बदल सकते।