फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court give permission to abort pregnancy of more than 12 weeks in case of misdeed

Chandigarh: दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई थी युवती, हाईकोर्ट ने दी 12 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति

Wed, 31 Jan 2024 11:56 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 31 Jan 2024 11:56 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि अवांछित गर्भधारण के लिए मजबूर होने पर एक युवती को शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बच्चे के जन्म के बाद भी ऐसी गर्भावस्था के परिणामों से निपटने से याचिकाकर्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ता रहेगा, जिससे उसकी क्षमता प्रभावित होगी।

विज्ञापन
High Court give permission to abort pregnancy of more than 12 weeks in case of misdeed
Court Order

विस्तार

शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने युवती को 12 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने की अनुमति दे दी है। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अवांछित गर्भ युवती के जीवन में रोजगार के अवसर समाप्त कर देगा और उसकी क्षमता को प्रभावित कर कर सकता है।

पटियाला निवासी 30 साल की युवती ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 12 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की थी। याची ने दलील दी कि आरोपी ने शादी के बहाने उसके साथ संबंध स्थापित करने के लिए सहमति ली और गर्भवती होने के बाद याची से दूरी बना ली। इसके बाद याची की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया।

याची ने कहा कि वह इस गर्भ को जारी नहीं रखना चाहती और ऐसे में उसे इसे गिराने की अनुमति दी जाए। दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एक युवती का प्रजनन विकल्प का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अविभाज्य हिस्सा है और यह शारीरिक अखंडता का पवित्र अधिकार है। वर्तमान गर्भावस्था को जारी रखना याचिकाकर्ता को उस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति की लगातार याद दिलाती रहेगी जिसे उसने झेला है।
विज्ञापन


सभी तथ्यों का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माता कौशल्या सरकारी अस्पताल, पटियाला के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के प्रमुख को मेडिकल बोर्ड गठन कर याचिकाकर्ता की गर्भावस्था का चिकित्सीय समापन करने के लिए सभी आवश्यक उचित कदम उठाने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि अवांछित गर्भधारण के लिए मजबूर होने पर एक युवती को शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बच्चे के जन्म के बाद भी ऐसी गर्भावस्था के परिणामों से निपटने से याचिकाकर्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ता रहेगा, जिससे उसकी क्षमता प्रभावित होगी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की अविवाहित स्थिति को देखते हुए, गर्भावस्था जारी रखने से याचिकाकर्ता और संभावित बच्चे दोनों को मनोवैज्ञानिक नुकसान हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed