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हरियाणाः 25 हजार अस्थायी कर्मियों को हाईकोर्ट से झटका, रेगुलराइजेशन के आदेश खारिज

Sat, 30 Mar 2019 06:09 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 30 Mar 2019 06:09 PM IST
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High court dismissed to Order of Regularization
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

हरियाणा के विभिन्न बोर्ड, कारपोरेशन और विश्वविद्यालयों में काम कर रहे लगभग 25 हजार अस्थायी कर्मियों को झटका देते हुए उन्हें रेगुलर करने के सिंगल बेंच के आदेश को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है। साथ ही इन सभी मामलों पर सिंगल बेंच को दोबारा सुनवाई करने के आदेश दिए हैं।

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चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने सरकार की अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सिंगल बेंच ने अलग-अलग याचिकाएं जिसमें याचिकाकर्ताओं ने रेगुलर होने की मांग की थी एक साथ ही निपटारा कर दिया। जबकि ये सभी मामले एक दूसरे से अलग थे।
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चाहे प्रत्येक याचिकाकर्ता रेगुलर होने की मांग कर रहा था लेकिन सभी में तथ्य अलग थे। किसी मामले में याचिकाकर्ताओं ने बैक डेट से रेगुलर होने की मांग की थी तो किसी में आउट सोर्स कर्मी शामिल थे। सिंगल बेंच ने पॉलिसी के प्रावधानों के तहत याचिकाकर्ताओं की योग्यता और अन्य शैक्षणिक योग्यता पर गौर किए बिना ही सभी मामलों में एक ही आदेश जारी कर दिया। 

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High court dismissed to Order of Regularization
Punjab And Haryana Highcourt - फोटो : File Photo

ऐसे में सिंगल बेंच का यह फैसला सही नहीं है। अब चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने ये सभी केस वापस सिंगल बेंच के समक्ष भेजते हुए निर्देश दिए हैं कि वे इन सभी 54 याचिकाओं पर दोबारा सुनवाई करें और अलग-अलग तथ्यों के आधार पर उन पर सुनवाई करे। एक जैसे मामलों को वह चाहे तो एक साथ सुनवाई कर सकते हैं और नए सिरे से इन सभी याचिकाओं पर सरकार से जवाब मांगा जाए। साथ ही खंडपीठ ने सिंगल बेंच को इन सभी मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने के भी आदेश दे दिए हैं। 

हरियाणा के बोर्ड, कारपोरेशन, यूनिवर्सिटी के कई कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कई कर्मचारी 20 से 30 साल से अस्थायी तौर पर कार्यरत हैं। इसके बावजूद उन्हें रेगुलर नहीं किया गया है। सरकार ने इन कर्मियों को यह कहते हुए रेगुलर करने से इनकार कर दिया था कि यह कर्मी जिस पद पर रेगुलर होने की मांग कर रहे हैं, उस पद की शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते हैं। 

सिंगल बेंच ने सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि जो कर्मचारी इतने लंबे समय तक काम कर रहे हैं, उनके अनुभव को ही उनकी योग्यता माना जा सकता है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के इस विषय के कई फैसलों का हवाला देते हुए सिंगल बेंच ने सभी अस्थायी कर्मियों को 1 फरवरी तक रेगुलर किए जाने के हरियाणा सरकार को आदेश दे दिए थे। सिंगल बेंच के इसी फैसले को हरियाणा सरकार ने डबल बेंच में अपील दायर कर चुनौती दी थी। 

हरियाणा के एडवोकेट जनरल बीआर महाजन ने कहा कि सिंगल बेंच के फैसले के चलते 25 हजार से अधिक कर्मियों को बैक डेट से रेगुलर करना पड़ेगा, जो कि बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा कि सिंगल बेंच अगर सिर्फ याचिका कर्ताओं के मामले में फैसला देता तो भी ठीक था, लेकिन सिंगल बेंच का फैसला सभी पर लागू हो जाता। ऐसे में सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। खंडपीठ ने जनवरी में सिंगल बेंच के इस फैसले पर रोक लगा दी थी। अब इन सभी 54 याचिकाओं को वापस सिंगल बेंच के समक्ष सुनाई के लिए भेज दिया है। 

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