फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court decision in pension benefit case of JE of DHEDCL

मरने के बाद न्याय: पेंशन लाभ के लिए 21 साल लड़ा जेई... चार साल पहले मौत भी आई, अब हाईकोर्ट ने दिया इंसाफ

Wed, 15 May 2024 09:38 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 15 May 2024 09:38 AM IST
सार

पीड़ित चंद्र प्रकाश दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में जूनियर इंजीनियर थे। 1999 में वे सेवानिवृत्त हो गए थे। कुछ आरोपों के कारण उनके पेंशन लाभ में कटौती की गई थी। इसी के खिलाफ वे हाईकोर्ट पहुंचे थे। 

विज्ञापन
High Court decision in pension benefit case of JE of DHEDCL
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1999 में रिटायर किया गया कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति का लाभ लेने के लिए 21 साल तक कानून की लड़ाई लड़ता रहा और इंसाफ के इंतजार में दम भी तोड़ गया। अब उसकी मौत के चार साल बाद उन्हें इंसाफ मिला है। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने उनका पेंशन लाभ जारी करने का आदेश देते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड पर 8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस जुर्माने में चार लाख उनके आश्रितों को और बाकी हाईकोर्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी में जमा करवाने होंगे।
विज्ञापन


याचिका दाखिल करते हुए चंद्र प्रकाश ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में जूनियर इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे और उनको 1999 में सेवानिवृत्त कर दिया गया था। इस दौरान उन पर कुछ वित्तीय आरोप लगाते हुए सेवानिवृत्ति लाभों में से 2,13,611 रुपये की कटौती कर ली गई। साथ ही उनके दो इंक्रीमेंट भी रोके गए थे। इसकी शिकायत देने पर भी कोई लाभ नहीं हुआ। हाईकोर्ट में शरण लेने पर 2008 में कोर्ट ने निगम के दोनों आदेश रद्द कर दिए और निगम को छूट दी थी कि कानून के अनुसार याची से नुकसान की वसूली की जा सकती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने निगम को याची की पेंशन से काटी गई राशि वापस करने का भी आदेश दिया था। इसके बाद निगम ने याची को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। निगम इसके बाद बार-बार मामले को लटकाता रहा। इस पर याची को बार-बार हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। 2020 में याची ने छठी याचिका दाखिल की थी और इसके कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई थी। अब उनके कानूनी वारिस लड़ रहे थे। हाईकोर्ट ने अब याची की पेंशन से की गई कटौती की राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ तीन माह में उनके वारिसों को सौंपने का आदेश दिया है।

अधिकारियों के रवैया कानून के खिलाफ 
हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पेंशन व्यक्ति के संपत्ति के अधिकार के अधीन आता है। तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना इससे किसी को वंचित नहीं किया जा सकता। याची से हुए नुकसान की वसूली के लिए उसकी पेंशन से कटौती की गई थी, जो वैध नहीं था। 


हाईकोर्ट का 2008 में दिया गया फैसला भी निगम ने अपने हिसाब से ढाल लिया और रिकवरी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। बिना किसी जांच, विभागीय कार्रवाई या तय प्रक्रिया के पेंशन रोकी ही नहीं जा सकती थी। निगम के रवैए के कारण रिटायर कर्मी को अपने हक के लिए जीवन की अंतिम सांस तक इंतजार करना पड़ा, हम इसके प्रति असंवेदनशील नहीं हो सकते।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed