'आशुतोष महाराज की मौत प्राकृतिक'
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज की समाधि मामले में पंजाब सरकार ने रिपोर्ट पेश कर दी है। इसमें कहा गया है कि आशुतोष महाराज की मौत प्राकृतिक है। रिपोर्ट में ज्यादातर डेरा अनुयायियों के बयान ही दर्ज किए गए हैं। संस्थान की जायदाद किसी के नाम नहीं होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेकर मामले की सुनवाई की स्थगित कर दी है।
पूर्ण सिंह की दलीलों में सच्चाई नहीं
पंजाब सरकार के वकील ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता पूर्ण सिंह की दलीलों में सच्चाई नहीं है। उसने महज पब्लिसिटी के लिए यह अपील दाखिल की है। सरकार ने इस मामले में एसएसपी स्तर की जांच करवाई है, जिसमें पाया गया है कि आशुतोष महाराज के नाम पर कोई भी संपत्ति नहीं है, लिहाजा यह मामला संपत्ति हड़पने का नहीं बनता। पंजाब सरकार के वकील ने सरकार की जांच रिपोर्ट पर याचिका को रद्द करने का आग्रह भी कोर्ट से किया।
खुद को आशुतोष महाराज का पूर्व चालक बताने वाले पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया है। याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि आशुतोष महाराज की देह के पोस्टमार्टम के निर्देश जारी किए जाएं। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई का सुझाव दिया था।
आशुतोष महाराज को बंधक बनाने का आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब व हरियाणा की सिंगल बेंच ने पंजाब सरकार और अन्य चार प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इस मामले में महाराज के कथित चालक पूर्ण सिंह ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर आरोप लगाया था कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद सरकार ने अभी तक पोस्टमार्टम की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। इसके बाद कोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया था।
28 जनवरी से आशुतोष महाराज समाधि में
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज 28 जनवरी 2014 से नूर महल स्थित डेरे में समाधि में हैं। मंगलवार 28 जनवरी 2014 की रात करीब साढ़े बारह बजे वे समाधिलीन हो गए थे। डेरे की तरफ से स्वामी विशालानंद व स्वामी विश्वानंद ने आशुतोष महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर को एक अफवाह बताया था।
इस मामले में खुद को महाराज का ड्राइवर बताने वाले पूरण सिंह और उनके बेटे दिलीप कुमार झा ने विभिन्न मुद्दों पर कई बार हाईकोर्ट की शरण ली है।