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Highcourt: अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट की रोक पर हाईकोर्ट के जज बोले-हम सर्वोच्च न्यायालय के अधीन नहीं
Wed, 07 Aug 2024 08:07 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 07 Aug 2024 08:07 AM IST
सार
जस्टिस राजबीर सहरावत ने कहा कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के अधीन नहीं है। यह मामला हाईकोर्ट और सिविल जज जूनियर डिवीजन जैसा नहीं है। अवमानना की कार्रवाई के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में नहीं बनती है बल्कि हाईकोर्ट की खंडपीठ में बनती है।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अवमानना के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाने के आदेश पर हाईकोर्ट ने कहा है कि हम सर्वोच्च न्यायालय के आधीन नहीं हैं। जस्टिस राजबीर सहरावत ने कहा कि अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल की गुंजाइश नहीं है।
हाईकोर्ट में भूमि अधिग्रहण से जुड़ा मामला पहुंचा था जिसमें देरी के लिए ब्याज को लेकर विवाद था। इस मामले में एकल पीठ और खंडपीठ से फैसला होने के बाद अवमानना याचिकाएं सुनने वाली बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच को बताया गया कि अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगा दी है।
इस जानकारी पर जस्टिस राजबीर सहरावत ने कहा कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के अधीन नहीं है। यह मामला हाईकोर्ट और सिविल जज जूनियर डिवीजन जैसा नहीं है। अवमानना की कार्रवाई के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में नहीं बनती है बल्कि हाईकोर्ट की खंडपीठ में बनती है। जस्टिस सेहरावत ने इस मामले में जारी आदेश से हताशा व्यक्त करते हुए कहा कि आदेश है तो पालन जरूरी है। ऐसे में इस मामले की सुनवाई उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से याचिका का फैसला आने तक अनिश्चित काल के लिए टाल दी है।
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हाईकोर्ट में भूमि अधिग्रहण से जुड़ा मामला पहुंचा था जिसमें देरी के लिए ब्याज को लेकर विवाद था। इस मामले में एकल पीठ और खंडपीठ से फैसला होने के बाद अवमानना याचिकाएं सुनने वाली बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच को बताया गया कि अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगा दी है।
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इस जानकारी पर जस्टिस राजबीर सहरावत ने कहा कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के अधीन नहीं है। यह मामला हाईकोर्ट और सिविल जज जूनियर डिवीजन जैसा नहीं है। अवमानना की कार्रवाई के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में नहीं बनती है बल्कि हाईकोर्ट की खंडपीठ में बनती है। जस्टिस सेहरावत ने इस मामले में जारी आदेश से हताशा व्यक्त करते हुए कहा कि आदेश है तो पालन जरूरी है। ऐसे में इस मामले की सुनवाई उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से याचिका का फैसला आने तक अनिश्चित काल के लिए टाल दी है।
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