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यूटी टेनेंसी एक्ट का विरोध: चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन को हाईकोर्ट बार का समर्थन, आज नहीं होगा काम
Fri, 26 Jul 2024 07:03 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 26 Jul 2024 07:03 AM IST
सार
चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट, 2019 के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए प्रशासन ने संसद सत्र में भेजने का निर्णय लिया था। जिला बार एसोसिएशन चंडीगढ़ ने इसके विरोध में जिला अदालत में कामकाज ठप रखा है।
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हड़ताल पर वकील।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन के समर्थन में शुक्रवार को नो वर्क डे रखने का निर्णय लिया है। ऐसे में शुक्रवार को वकील हाईकोर्ट की किसी भी अदालत में पैरवी के लिए उपस्थित नहीं होंगे।
वीरवार को चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारी हाईकोर्ट पहुंचे थे और उन्होंने चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट, 2019 के प्रस्तावित मसौदे के विरोध में समर्थन देने का हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से आग्रह किया। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जिला बार के आग्रह को स्वीकार करते हुए शुक्रवार को हाईकोर्ट में काम न करने का निर्णय लिया।
चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट, 2019 के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए प्रशासन ने संसद सत्र में भेजने का निर्णय लिया था। इसकी निंदा करते हुए जिला बार एसोसिएशन चंडीगढ़ ने जिला अदालत में कामकाज ठप रखा हुआ है। वकीलों की दलील है कि अदालतों में रेंट से जुड़े मामले 2 से 3 साल में निपट जाते हैं, लेकिन यदि किसी प्रशासनिक अधिकारी को यह काम दिया गया तो दशकों तक लोगों को इंसाफ का इंतजार करना होगा।
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वीरवार को चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारी हाईकोर्ट पहुंचे थे और उन्होंने चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट, 2019 के प्रस्तावित मसौदे के विरोध में समर्थन देने का हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से आग्रह किया। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जिला बार के आग्रह को स्वीकार करते हुए शुक्रवार को हाईकोर्ट में काम न करने का निर्णय लिया।
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चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी टेनेंसी एक्ट, 2019 के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए प्रशासन ने संसद सत्र में भेजने का निर्णय लिया था। इसकी निंदा करते हुए जिला बार एसोसिएशन चंडीगढ़ ने जिला अदालत में कामकाज ठप रखा हुआ है। वकीलों की दलील है कि अदालतों में रेंट से जुड़े मामले 2 से 3 साल में निपट जाते हैं, लेकिन यदि किसी प्रशासनिक अधिकारी को यह काम दिया गया तो दशकों तक लोगों को इंसाफ का इंतजार करना होगा।
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