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ड्रग्स केस में हाईकोर्ट ने सुनाई खरी-खरी: पंजाब सरकार को लगाई फटकार, कहा- मामले में क्यों नहीं हुई कार्रवाई

Mon, 06 Dec 2021 10:18 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 06 Dec 2021 10:18 PM IST
सार

सुनवाई के बाद एडवोकेट नवकिरण सिंह ने कहा, पिछले साल इस केस की सुनवाई नहीं हुई थी। सरकार को लगा कि केस हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए वह कुछ नहीं कर सकते। आज यह साफ हो गया कि सरकार अपनी रिपोर्ट पर तो कार्रवाई कर सकती है। 

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High court asked the Punjab government why action was not taken in drug case
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के हजारों करोड़ रुपये के ड्रग कारोबार मामले में सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को खरी-खरी सुनवाई। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार के पास ड्रग्स कारोबार से संबंधित रिपोर्ट मौजूद है, इस पर हाईकोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई थी, इसके बावजूद अब तक सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की।  

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सोमवार को पंजाब सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दावे और पंजाब के एडवोकेट जनरल डीएस पटवालिया पेश हुए। उन्होंने बताया कि सरकार को स्पष्ट कर दिया गया है कि रिपोर्ट पर कार्रवाई करने पर रोक नहीं है। अब सरकार जल्द कार्रवाई कर सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि हमें हैरानी है कि जब कार्रवाई पर कोई रोक नहीं है तो सरकार क्यों देरी कर रही है।
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इसी बीच अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को पक्ष बनने की अर्जी सुनवाई के लिए पहुंची। पंजाब सरकार ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इस समय मजीठिया को पक्ष बनाना सही नहीं है। मजीठिया के वकील की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूछा कि आपको ऐसा क्यों लगता है कि इसमें आपके खिलाफ कुछ मौजूद है। पंजाब सरकार ने अब इस मामले की पैरवी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दावे को नियुक्त किया है।

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भारत सरकार ने तस्करों की दी कनाडा सरकार को जानकारी  

केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि कनाडा से रंजीत सिंह औजला, गुरसेवक सिंह ढिल्लों, निरंकार सिंह ढिल्लों, सरबजीत सिंह सेंदर, लैहंबर सिंह दलेह, अमरजीत सिंह कुनर, प्रदीप सिंह धालीवाल, अमरिंदर सिंह छिना, परमिंदर सिंह देओ और रंजीत कौर काहलों के प्रत्यर्पण की मांग की गई है। कनाडा सरकार ने भारत सरकार के इस आग्रह पर कुछ आपत्तियां जताई थीं। इन सभी को दूर कर दोबारा भारत सरकार ने कनाडा सरकार को अपनी मांग भेज दी है। भारत सरकार की मांग पर कनाडा सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इस जानकारी को हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में ले लिया है।

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