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पीजीआई चंडीगढ़ में पहली बार बिना चीरफाड़ के हुआ ऑपरेशन, दिल के दो मरीजों को लगाया वॉल्व
Wed, 07 Aug 2019 01:31 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 07 Aug 2019 01:31 PM IST
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पीजीआई चंडीगढ़ ने मेडिकल साइंस के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल करते हुए बिना किसी चीरफाड़ के दिल के मरीजों का वॉल्व बदलने का सफल ऑपरेशन किया है। अब तक विदेशों और देश के कुछ चुनिंदा निजी अस्पतालों में प्रचलित कैथेटर तकनीक का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
जानकारी के मुताबिक, पीजीआई में हृदय रोग विभाग के हेड प्रोफेसर यशपाल शर्मा के नेतृत्व में डॉ. पराग बरवाड़, डॉ. जीडी पुरी और डॉ. श्याम ने यहां गत दिनों 72 वर्षीय और 75 वर्षीय बुजुर्गों की ट्रांस कैथेटर तकनीक से सर्जरी की। इस सर्जरी को अंजाम देने वाले डॉ. पराग बरवाड़ ने बताया कि सर्जरी को हाई और इंटरमीडिएट रिस्क वाले बुजुर्ग मरीजों पर किया जाता है, जो छाती में होने वाली चीरफाड़ से गुरेज करते हैं।
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जानकारी के मुताबिक, पीजीआई में हृदय रोग विभाग के हेड प्रोफेसर यशपाल शर्मा के नेतृत्व में डॉ. पराग बरवाड़, डॉ. जीडी पुरी और डॉ. श्याम ने यहां गत दिनों 72 वर्षीय और 75 वर्षीय बुजुर्गों की ट्रांस कैथेटर तकनीक से सर्जरी की। इस सर्जरी को अंजाम देने वाले डॉ. पराग बरवाड़ ने बताया कि सर्जरी को हाई और इंटरमीडिएट रिस्क वाले बुजुर्ग मरीजों पर किया जाता है, जो छाती में होने वाली चीरफाड़ से गुरेज करते हैं।
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मेड इन इंडिया के तहत निर्मित हैं वॉल्व
पहले जब किसी मरीज का वॉल्व बदला जाता था तो छाती में कट लगाकर नया वॉल्व फिट करना पड़ता था। इस तकनीक के माध्यम से रोगी की जांघ में फिमोरल अपरोच से कैथेटर डालकर उसके दिल में नया माइवल नामक वॉल्व फिट किया जाता था। मेक इन इंडिया के तहत देश में ही मैरिल लाइफसाइंस द्वारा निर्मित अपने तरह के इस इनोवेटिव वॉल्व से मरीज को किसी प्रकार के जोखिम का सामना नहीं करना पड़ता और ऑपरेशन के बाद महज दो दिनों में ही मरीज चलने-फिरने लगता है।
मरीजों के लिए किफायती साबित हो रही देशी तकनीक
देश में ही बने वॉल्व मरीजों के लिए कारगर और किफायती साबित हो रहे हैं। यह तकनीक विदेशों में या फिर भारत में निजी क्षेत्र के कुछ प्रमुख अस्पतालों में ही अपनाई जाती थीं, लेकिन अब पीजीआई चंडीगढ़ में इसे सफलतापूर्वक लागू किया है। इस सर्जरी को अंजाम देने के लिये गठित टीम में कार्डियोलोजिस्ट, कार्डियक सर्जन, रेडियोलोजिस्ट, ऐनिसथिसियोलोजिस्ट आदि विशेषज्ञों को होना आवश्यक होता है।
मरीजों के लिए किफायती साबित हो रही देशी तकनीक
देश में ही बने वॉल्व मरीजों के लिए कारगर और किफायती साबित हो रहे हैं। यह तकनीक विदेशों में या फिर भारत में निजी क्षेत्र के कुछ प्रमुख अस्पतालों में ही अपनाई जाती थीं, लेकिन अब पीजीआई चंडीगढ़ में इसे सफलतापूर्वक लागू किया है। इस सर्जरी को अंजाम देने के लिये गठित टीम में कार्डियोलोजिस्ट, कार्डियक सर्जन, रेडियोलोजिस्ट, ऐनिसथिसियोलोजिस्ट आदि विशेषज्ञों को होना आवश्यक होता है।