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Chandigarh News: मौसम और प्रदूषण के आंकड़ों से तय होगी स्वास्थ्य की रणनीति
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ ऑडिटोरियम में चल रही एफिकॉन -2026 के दूसरे दिन शनिवार को मौसम, वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर डेटा के आधार पर रणनीति बनाने पर चर्चा हुई। डेटा टू डिसीजन फॉर रिस्पॉन्सिव एंड रेजिलिएंट हेल्थ सिस्टम्स थीम पर आयोजित तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देशभर से 700 से अधिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता, चिकित्सक, नीति निर्माता और विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि मौसम और जलवायु में बदलाव के साथ बीमारियों का खतरा और स्वरूप भी बदल सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जुटाए गए सही और समय पर उपलब्ध आंकड़े बीमारी के संभावित खतरे की पहचान करने और बचाव की रणनीति तैयार करने में मददगार हो सकते हैं। दूसरे दिन वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के साथ संक्रामक रोगों की निगरानी, पोषण, गैर-संचारी रोग और स्वास्थ्य में समानता जैसे विषयों पर भी सत्र हुए।
आयोजन अध्यक्ष और पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग के प्रमुख डॉ. अरुण के. अग्रवाल ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने में शोध और आंकड़ों के इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया। कॉन्फ्रेंस में डेटा की गुणवत्ता, स्थानीय आंकड़ों के इस्तेमाल और शोध से नीति तक की दूरी कम करने पर भी चर्चा हुई।
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विशेषज्ञों ने कहा कि मौसम और जलवायु में बदलाव के साथ बीमारियों का खतरा और स्वरूप भी बदल सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जुटाए गए सही और समय पर उपलब्ध आंकड़े बीमारी के संभावित खतरे की पहचान करने और बचाव की रणनीति तैयार करने में मददगार हो सकते हैं। दूसरे दिन वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के साथ संक्रामक रोगों की निगरानी, पोषण, गैर-संचारी रोग और स्वास्थ्य में समानता जैसे विषयों पर भी सत्र हुए।
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आयोजन अध्यक्ष और पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग के प्रमुख डॉ. अरुण के. अग्रवाल ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने में शोध और आंकड़ों के इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया। कॉन्फ्रेंस में डेटा की गुणवत्ता, स्थानीय आंकड़ों के इस्तेमाल और शोध से नीति तक की दूरी कम करने पर भी चर्चा हुई।
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