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Chandigarh News: मरीज बनकर अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य सचिव डॉक्टर ने लिखी ब्रांडेड दवा, जांच के आदेश

Mon, 17 Apr 2023 01:48 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Apr 2023 01:48 AM IST
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Health Secretary reached the hospital posing as a patient, doctor wrote branded medicine, ordered for investigation
चंडीगढ़। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने शनिवार देर रात भेष बदलकर जीएमएसएच-16 का औचक निरीक्षण किया। जांच में पाया कि इमरजेंसी के डॉक्टर दवा का सॉल्ट लिखने के बजाय मरीजों को ब्रांडेड दवाइयां लिख रहे हैं। वहीं, अस्पताल परिसर में मौजूद दवा की तीनों दुकानों पर बिना मांगे मरीजों को दवा का बिल उपलब्ध नहीं दिया जा रहा था। साथ ही कैंटीन में साफ-सफाई की कमी पाई। स्वास्थ्य सचिव ने ड्रग इंस्पेक्टर समेत अस्पताल प्रशासन ने अलग-अलग कमियों पर जांच कर रिपोर्ट तलब की है। यशपाल गर्ग रात दस बजे अस्पताल पहुंचे और लगभग एक घंटे तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सबसे पहले इमरजेंसी में गए, जहां पर मरीजों को मानक के अनुरूप देखा जा रहा था। डॉक्टर के पूछे जाने पर उन्होंने अपना नाम राजपाल बताया और पेट दर्द की शिकायत की। डॉक्टर ने उन्हें एक इंजेक्शन और एक सिरप MCAIN लिख दिया और बताया कि इंजेक्शन पास के कमरे में लगाया जाएगा जबकि सिरप दवा की दुकान से लेनी होगी। जब वह अस्पताल परिसर में मौजूद दवा की दुकान (नंबर 6) पर पहुंचे तो वहां से उन्हें डॉक्टर द्वारा लिखी गई सिरप 225 रुपये में मिली। दुकानदार ने मांगने के बाद उन्हें बिल दिया।
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बिल न देने के कारणों की होगी जांच
उसके बाद वह दवा की दूसरी दुकान (नंबर 9) पर पहुंचे। डॉक्टर की पर्ची दिखाने पर दुकानदार ने कहा कि सिरप के सॉल्ट का नाम नहीं लिखा गया है। यह विशेष ब्रांड का सिरप है जो हर जगह नहीं मिलता। इसके बाद दुकानदार ने दूसरा सिरप MERKCID SYP देते हुए कहा कि इसे डॉक्टर को दिखा लीजिए। अगर काम चल जाए तो उपयोग कर लिजिएगा वर्ना वापस कर दीजिएगा। डॉक्टर को दिखाने पर उन्होंने उसके उपयोग से साफ मना कर दिया और पर्ची पर दवा का सॉल्ट लिख दिया। उसके बाद वह तीसरी दुकान (नंबर 7) पर पहुंचे, जहां उन्हें वह दवा 135 रुपये में मिली लेकिन यहां पर भी बिल नहीं दिया गया। बाद में मांगने पर दुकानदार ने उन्हें बिल दिया। स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि शॉप नंबर 9 पर दवा वापस करने पर दुकानदार ने पहले वाले सीरियल नंबर पर ही नया 135 रुपये का बिल बना दिया जो मानक के अनुसार गलत है। इस संबंध में उन्होंने चारों बिल के प्रतिरूप ड्रग इंस्पेक्टर को देकर मामले की पड़ताल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि दुकानदार मरीजों को बिना मांगे बिल उपलब्ध नहीं करा रहे। इसकी भी पड़ताल की जानी चाहिए। साथ ही कहा है कि इमरजेंसी में दवा के साल्ट के बजाय विशेष ब्रांड की दवा लिखे जाने का कारण भी पता लगाना जरूरी है। शॉप नंबर 6 से दवा निर्माता कंपनी के साथ किस कीमत पर दवा की खरीद की गई थी, यह भी पता लगाने को कहा है।
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ब्रांडेड दवा लिखने वालों पर होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य सचिव ने दो जनवरी 2023 को जारी किए गए जेनेरिक मेडिसिन एंड प्रिस्क्रिप्शन गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि डॉक्टरों को ब्रांड के बजाय दवाओं के सॉल्ट लिखने का निर्देश दिया गया है लेकिन उसका पालन नहीं किया जा रहा है। विभाग ऐसे डॉक्टरों को चिन्हित कर रहा है जल्द ही उन पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उधर, निरीक्षण के दौरान दवा की दुकान नंबर छह के अतिक्रमण को हटाकर खाली कराए गए रास्ते पर फिर से अतिक्रमण मिला। रास्ते में दवा के कार्टन और कुर्सियां रखी गईं थीं, जिससे आने-जाने का रास्ता ब्लॉक था। स्वास्थ्य सचिव ने इसका भी संज्ञान लिया और रास्ता खुलवाने के निर्देश दिए हैं।
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