फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Health department of Chandigarh not giving correct figures of corona investigation even after passing two years of epidemic

चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग का हाल: पहली और दूसरी लहर में कश्मीर से बेल्लारी तक की जांच को अपना बताया, संक्रमण की हकीकत को भी छुपाया

Mon, 21 Mar 2022 02:19 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 21 Mar 2022 02:19 PM IST
सार

स्वास्थ्य विभाग जिन जांचों का खुद दावा कर रहा है, उनमें कश्मीर से लेकर कर्नाटक के बेल्लारी शहर तक हुई चंडीगढ़ियों की कोरोना जांच शामिल है। जानकारों का कहना है कि अगर जांच के सही आंकड़े सामने नहीं आए हैं तो निश्चित तौर पर संक्रमण दर भी प्रभावित हुई है। 

विज्ञापन
Health department of Chandigarh not giving correct figures of corona investigation even after passing two years of epidemic
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

कोरोना महामारी के बीच दो साल गुजराने के बाद भी चंडीगढ़ का स्वास्थ्य विभाग कोरोना जांच के सही आंकड़े नहीं बता रहा है। विभाग पहली और दूसरी लहर में 10 लाख से ज्यादा चंडीगढ़ियों की कोरोना जांच का दावा कर रहा है, लेकिन आरटीआई के तहत दिए जवाब में शहर में कुल 574853 लोगों की जांच की पुष्टि की गई है। गौर करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग जिन जांचों का खुद दावा कर रहा है, उनमें कश्मीर से लेकर कर्नाटक के बेल्लारी शहर तक हुई चंडीगढ़ियों की कोरोना जांच शामिल है। जानकारों का कहना है कि अगर जांच के सही आंकड़े सामने नहीं आए हैं तो निश्चित तौर पर संक्रमण दर भी प्रभावित हुई है। 

विज्ञापन


कोरोना जांच को लेकर एक आरटीआई के जवाब में विभाग ने देश भर के निजी और सरकारी लैबों में कोरोना के नमूनों की जांच डिटेल दी है। दावा किया जा रहा है कि उन नमूनों को चंडीगढ़ से वहां नहीं भेजा गया बल्कि चंडीगढ़ के लोग उस दौरान वहां मौजूद थे और वहीं पर उन्होंने कोरोना की जांच करवाई। खास बात यह है कि इस जवाब के तहत दी गई लिस्ट में चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में हुई जांच की संख्या महज 263511 है जबकि पीजीआई में जांच का कुल आंकड़ा 311342 है। अगर इन दोनों आंकड़ों को जोड़ भी लिया जाए तो कुल संख्या 574853 ही होती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अपने ही आंकड़ों में उलझा हुआ नजर आ रहा है।
विज्ञापन


आरटीआई कार्यकर्ता आरके गर्ग का कहना है कि कोरोना के दो साल बाद भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में भ्रम की स्थिति है। आखिर स्वास्थ्य विभाग कोरोना के सही आंकड़ों को क्यों छिपा रहा है। जांच की रिपोर्ट से ही इस बात की पुष्टि हो रही है कि कुछ न कुछ घालमेल है। स्वास्थ्य निदेशक के जवाब के अनुसार, दूसरी लहर के दौरान चरम की स्थिति में जितने लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, वे तो उस दौरान शहर में थे ही नहीं। फिर विभाग जिन 10 लाख नमूनों की जांच के आधार पर चंडीगढ़ की संक्रमण दर निकाली गई, वह भी गलत है। संक्रमण दर तो उस समय यहां हुए जांच और संक्रमित मिले मरीजों के आधार पर निकाली जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। संक्रमण दर देशभर में मिले चंडीगढ़ के संक्रमित मरीजों के आधार पर निकाली गई, जो सरासर गलत है। विभाग के जवाब ने कोरोना में सरकारी तंत्र की पोल खोल कर रख दी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

जांच के नाम पर निजी लैबों को दिए 1.98 करोड़ 

आरटीआई में निजी लैबों में जांच के लिए भेजे गए नमूनों की संख्या ओर उस पर आए खर्च की जानकारी भी मांगी गई थी। इसके जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि पहली और दूसरी लहर के दौरान निजी लैबों को कुल 1.98 करोड़ रुपये खर्च का भुगतान किया गया। आरके गर्ग का कहना है कि जितना पैसा निजी लैबों को नमूनों की जांच के लिए दिया गया है, उतने में तो अलग से जांच की व्यवस्था की जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वहीं पहली और दूसरी लहर के बाद तत्काल व्यवस्था करने के बजाय तीसरी लहर गुजरने के बाद जीएमएसएच-16 में जांच की सुविधा शुरू की गई।

स्वास्थ्य विभाग मौत के भी गलत आंकड़े कर चुका है पेश 

गौरतलब है कि कोरोना से चंडीगढ़ के लोगों की हुई मौत की संख्या को लेकर प्रशासन पहले ही गलत आंकड़े पेश कर चुका है। इस पर गलती स्वीकार करते हुए प्रशासन ने दिसंबर 2021 में मृतकों की सूची 247 और मृतकों को शामिल किया था। इसके अलावा एक अन्य आरटीआई की रिपोर्ट में जीएमसीएच-32 में जनवरी 2020 से मई 2021 के बीच हुई 1175 मौतों का ब्योरा भी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। 

स्वास्थ्य विभाग की कोरोना जांच में शामिल हैं ये शहर

स्वास्थ्य विभाग की कोरोना जांच की लिस्ट में दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु के साथ ही काकिनाडा (एमपी), मणिपुर, सोलापुर व अकलूज, (महाराष्ट्र), काशीपुर (उत्तराखंड), किलियांवाली (पंजाब), बीरभूम (पश्चिम बंगाल), प्रयागराज (उत्तर प्रदेश),  गुलबर्ग व तिरुचिलापल्ली (तमिलनाडु), जमशेदपुर (झारखंड), सासाराम (बिहार), जम्मू-कश्मीर, भरूच (गुजरात), बेल्लारी (कर्नाटक) जैसे शहरों के नाम शामिल हैं। 

आईडीएसपी स्वास्थ्य विभाग का हिस्सा नहीं

ये डिटेल आईसीएमआर के पोर्टल से ली गई है। दी गई सूचना में देश के अलग-अलग शहरों का नाम इसलिए आ रहा है क्योंकि चंडीगढ़ के मरीज उस दौरान देश के इन शहरों में मौजूद थे। वैसे भी यह जवाब इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) ने दिया है और आईडीएसपी स्वास्थ्य विभाग का हिस्सा नहीं है।  - डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक  

पहली और दूसरी लहर के दौरान पीजीआई ने एक-एक दिन में दो से ढाई हजार नमूनों की जांच की है। यह कहना कि पीजीआई के आंकड़े आईसीएमआर के पोर्टल पर नहीं आते, पूरी तरह गलत है। चंडीगढ़ के लाखों लोगों की जांच पीजीआई में हुई है और अभी भी प्रतिदिन हो रही है। - प्रो. मिनी पी सिंह, नोडल अधिकारी कोरोना जांच वॉयरोलॉजी विभाग पीजीआई

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed