Haryana: दहेज उत्पीड़न में अनावश्यक गिरफ्तारी हुई तो नपेंगे पुलिस अधिकारी, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का सख्त आदेश
हाईकोर्ट ने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया कि यह निर्देश केवल सीआरपीसी के सेक्शन 498-ए के मामले तक सीमित नहीं रहेंगे। ऐसे सभी अपराध जिनमें अधिकतम सजा सात साल या इससे कम है उन सभी में यह निर्देश लागू होंगे।
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दहेज उत्पीड़न के मामले में अब बिना कारण दर्ज किए आरोपियों की गिरफ्तारी हुई तो पुलिस अधिकारियों पर विभागीय और न्यायालय की अवमानना के तहत गाज गिरेगी। साथ ही बिना कारण दर्ज किए हिरासत की अवधि बढ़ाने वाले मजिस्ट्रेट पर भी हाईकोर्ट विभागीय कार्रवाई करेगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के लिए अहम आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि दहेज उत्पीड़न के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले जांच अधिकारी को इसके लिए कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। अगर गिरफ्तारी जरूरी है तो एक चेकलिस्ट में इसके कारण दर्ज कर इसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना होगा।
मजिस्ट्रेट को हिरासत की अवधि को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त कारणों पर खुद को संतुष्ट करना होगा और लिखित में इसे दर्ज करना होगा। ऐसा करने में विफल रहने पर पुलिस अधिकारी व मजिस्ट्रेट दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। एफआईआर में गिरफ्तारी न करने का कारण दो सप्ताह के भीतर जांच अधिकारी मजिस्ट्रेट को भेजना होगा। यह अवधि लिखित कारण के साथ एसपी ही बढ़ा सकेंगे।
हाईकोर्ट ने अशफाक आलम बनाम झारखंड सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाते हुए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में तीनों राज्यों को अर्नेश कुमार बनाम बिहार सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने तीनों को आदेश दिया है कि सभी पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश जारी करें कि दहेज उत्पीड़न के मामलों में ऑटोमेटिक गिरफ्तारी न हो, यदि गिरफ्तारी अनिवार्य हो तो इसके लिए आवश्यक कारण को दर्ज किया जाए।
हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि इन निर्देशों का पालन न करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उनके खिलाफ न्यायालय के आदेश की अवमानना के तहत कार्रवाई हो सकती है। जो मजिस्ट्रेट आदेश का पालन करने में विफल रहेंगे उनके खिलाफ हाईकोर्ट विभागीय कार्रवाई होगी।
सात साल से कम की सजा के प्रावधान वाले अन्य मामलों पर भी लागू
हाईकोर्ट ने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया कि यह निर्देश केवल सीआरपीसी के सेक्शन 498-ए के मामले तक सीमित नहीं रहेंगे। ऐसे सभी अपराध जिनमें अधिकतम सजा सात साल या इससे कम है उन सभी में यह निर्देश लागू होंगे। ऐसे में राज्य इन निर्देशों के बारे में सभी पुलिस अधिकारियों को जानकारी उपलब्ध करवा दे।