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Haryana Weather: सूखे निकले सितंबर के पहले सात दिन, बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
Fri, 08 Sep 2023 03:03 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 08 Sep 2023 03:03 PM IST
सार
अल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है। तापमान बढ़ने से समुद्र में चल रही हवाओं के रास्ते और गति में परिवर्तन आता। इस परिवर्तन के कारण मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है।
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हरियाणा मौसम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा में सितंबर में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। बारिश नहीं होने से मौसम शुष्क बना हुआ है। इससे तापमान नीचे आ रहा है। पिछले एक सप्ताह से हिसार में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है, जो सामान्य से चार डिग्री ज्यादा है। राज्य के सभी जिलों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री से ज्यादा बना है।
राज्य के औसत अधिकतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई। गुरुवार को औसत तापमान सामान्य से तीन डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया है। वहीं, मानसून की बारिश जुलाई के महीने में सामान्य से 50 फीसदी ज्यादा थी, जो अब सामान्य से एक डिग्री नीचे आ गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि अभी अधिकतम तापमान से ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं है। 15 सितंबर के बाद बारिश की संभावना बन रही है। इस बीच एक दो जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार बने हुए हैं। उधर, बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। गुरुवार को सीजन की सबसे अधिक 12753 मेगावाट की मांग दर्ज की गई।
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यह भी पढ़ें: हरियाणा का राजनैतिक इतिहास: गंभीर आरोप लगने भर से चली जाती थी कुर्सी, फिर अपवाद क्यों बन रहे संदीप सिंह
सितंबर के सात दिनों में सिर्फ 0.8 फीसदी बारिश
पूरे एक हफ्ता लगभग सूखा बीत गया है। इन सात दिनों में हरियाणा के सिर्फ चार जिलों में नाममात्र बारिश हुई है। बाकी जिलों में बारिश की एक भी बूंद नहीं पड़ी है। एक हफ्ते में हरियाणा में लगभग 28.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए। लेकिन सात सितंबर तक सिर्फ 0.8 एमएम बारिश हुई है।
वहीं, इस सीजन में मानसूनी बारिश भी माइनस में आ गई है। जुलाई तक हरियाणा की बारिश सामान्य से 50 फीसदी से ज्यादा दर्ज की गई थी। मानसून के ब्रेक होने से सात सितंबर को मानसूनी बारिश सामान्य से एक फीसदी नीचे आ गई है। अभी तक हरियाणा में 378.8 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है।
अलनीनो के असर से मानसून ब्रेक
मानसून की बारिश में एक महीने से ज्यादा समय से ब्रेक बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह अलनीनो है। अलनीनो मानसून में बाधा बनता है। जब समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव आते हैं उस समुद्री घटना को अल नीनो कहते हैं।
अल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है। तापमान बढ़ने से समुद्र में चल रही हवाओं के रास्ते और गति में परिवर्तन आता। इस परिवर्तन के कारण मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिस साल अल नीनो ज्यादा सक्रिय होता है उस दक्षिण-पश्चिम मानसून पर इसका असर पड़ता है। इससे कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होती है तो कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति आती है। वहीं, दूसरी बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र के नहीं बनने से भी बारिश प्रभावित हुई है। पिछले 15 दिन से इसमें कोई हलचल नहीं दिखाा है।
सितंबर में रोजाना बढ़ी 250 मेगावाट बिजली की खपत
हरियाणा में बढ़ी उमस और गर्मी के चलते बिजली की खपत भी रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई है। इस सीजन की सबसे अधिक 12753 मेगावाट की मांग चल रही है। पिछले एक सप्ताह में ही 250 मेगावाट रोजाना की खपत बढ़ गई है। 1 सितंबर को प्रदेश में 12498 मेगावाट की मांग थी, जबकि इसके मुकाबले 11789 मेगावाट आपूर्ति की गई।
इसके बाद 2 सिंतबर को 12439, 3 को 12262, 4 सितंबर को 12702, 5 को 12747 मेगावाट और 6 सितंबर को 12753 मेगावाट की मांग रही। साथ ही बिजली निगमों की ओर से कोई कट नहीं लगाया गया और मांग के अनुरूप आपूर्ति की गई। इस बार हरियाणा की कुल बिजली क्षमता 13500 मेगावाट है। पिछले दो साल से जुलाई और अगस्त माह में लगातार बिजली की मांग बढ़ रही है और कुल क्षमता के पास मांग पहुंच रही है। बिजली निगमों के चेयरमैन पीके दास का कहना है कि प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है। मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति की जा रही है।
सामान्य से बढ़ता गया अधिकतम तापमान
एक सितंबर 2.6
पांच सितंबर 2.3
छह सितंबर 2.9
सात सितंबर 3.2
सितंबर में तापमान बढ़ा हैं। 15 सितंबर के बाद तापमान नीचे आएंगे और बारिश की भी उम्मीद बन रही है। - मनमोहन सिंह, निदेशक चंडीगढ़
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राज्य के औसत अधिकतम तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई। गुरुवार को औसत तापमान सामान्य से तीन डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया है। वहीं, मानसून की बारिश जुलाई के महीने में सामान्य से 50 फीसदी ज्यादा थी, जो अब सामान्य से एक डिग्री नीचे आ गई है।
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मौसम विभाग का कहना है कि अभी अधिकतम तापमान से ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं है। 15 सितंबर के बाद बारिश की संभावना बन रही है। इस बीच एक दो जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार बने हुए हैं। उधर, बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। गुरुवार को सीजन की सबसे अधिक 12753 मेगावाट की मांग दर्ज की गई।
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यह भी पढ़ें: हरियाणा का राजनैतिक इतिहास: गंभीर आरोप लगने भर से चली जाती थी कुर्सी, फिर अपवाद क्यों बन रहे संदीप सिंह
सितंबर के सात दिनों में सिर्फ 0.8 फीसदी बारिश
पूरे एक हफ्ता लगभग सूखा बीत गया है। इन सात दिनों में हरियाणा के सिर्फ चार जिलों में नाममात्र बारिश हुई है। बाकी जिलों में बारिश की एक भी बूंद नहीं पड़ी है। एक हफ्ते में हरियाणा में लगभग 28.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए। लेकिन सात सितंबर तक सिर्फ 0.8 एमएम बारिश हुई है।
वहीं, इस सीजन में मानसूनी बारिश भी माइनस में आ गई है। जुलाई तक हरियाणा की बारिश सामान्य से 50 फीसदी से ज्यादा दर्ज की गई थी। मानसून के ब्रेक होने से सात सितंबर को मानसूनी बारिश सामान्य से एक फीसदी नीचे आ गई है। अभी तक हरियाणा में 378.8 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है।
अलनीनो के असर से मानसून ब्रेक
मानसून की बारिश में एक महीने से ज्यादा समय से ब्रेक बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह अलनीनो है। अलनीनो मानसून में बाधा बनता है। जब समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव आते हैं उस समुद्री घटना को अल नीनो कहते हैं।
अल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है। तापमान बढ़ने से समुद्र में चल रही हवाओं के रास्ते और गति में परिवर्तन आता। इस परिवर्तन के कारण मौसम चक्र बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिस साल अल नीनो ज्यादा सक्रिय होता है उस दक्षिण-पश्चिम मानसून पर इसका असर पड़ता है। इससे कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होती है तो कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति आती है। वहीं, दूसरी बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र के नहीं बनने से भी बारिश प्रभावित हुई है। पिछले 15 दिन से इसमें कोई हलचल नहीं दिखाा है।
सितंबर में रोजाना बढ़ी 250 मेगावाट बिजली की खपत
हरियाणा में बढ़ी उमस और गर्मी के चलते बिजली की खपत भी रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई है। इस सीजन की सबसे अधिक 12753 मेगावाट की मांग चल रही है। पिछले एक सप्ताह में ही 250 मेगावाट रोजाना की खपत बढ़ गई है। 1 सितंबर को प्रदेश में 12498 मेगावाट की मांग थी, जबकि इसके मुकाबले 11789 मेगावाट आपूर्ति की गई।
इसके बाद 2 सिंतबर को 12439, 3 को 12262, 4 सितंबर को 12702, 5 को 12747 मेगावाट और 6 सितंबर को 12753 मेगावाट की मांग रही। साथ ही बिजली निगमों की ओर से कोई कट नहीं लगाया गया और मांग के अनुरूप आपूर्ति की गई। इस बार हरियाणा की कुल बिजली क्षमता 13500 मेगावाट है। पिछले दो साल से जुलाई और अगस्त माह में लगातार बिजली की मांग बढ़ रही है और कुल क्षमता के पास मांग पहुंच रही है। बिजली निगमों के चेयरमैन पीके दास का कहना है कि प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है। मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति की जा रही है।
सामान्य से बढ़ता गया अधिकतम तापमान
एक सितंबर 2.6
पांच सितंबर 2.3
छह सितंबर 2.9
सात सितंबर 3.2
सितंबर में तापमान बढ़ा हैं। 15 सितंबर के बाद तापमान नीचे आएंगे और बारिश की भी उम्मीद बन रही है। - मनमोहन सिंह, निदेशक चंडीगढ़