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एक बार फिर एक्शन में खेमका, स्पीकर से मांगी कार्यवाही की नकल
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 29 Oct 2017 09:04 AM IST
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आईएएस अशोक खेमका
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हरियाणा भंडारण निगम के गेलवेल्युम शीट मामले के विधानसभा में उठने पर आईएएस अशोक खेमका एक्शन में आ गए हैं। पूरे मामले में खुद को बेवजह घसीटे जाने से खेमका आहत हैं और उन्होंने हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधानसभा कार्यवाही की लिखित प्रतिलिपि मांगी है।
खेमका ने शुक्रवार को स्पीकर को पत्र लिखा है। प्रतिलिपि मिलने पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रधान सचिव खेमका पूरा सच स्पीकर के सामने लाएंगे। खेमका ने पत्र में लिखा है कि नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला व विधायक रघुबीर सिंह कादियान ने 24 व 25 अक्तूबर को सदन में हरियाणा भंडारण निगम से जुड़े कैग की ऑडिट पैरा का मामला विधानसभा में उठाया था। यह पैरा कमेटी ऑफ पब्लिक अंडरटेकिंग के समक्ष लंबित है। यहां तक आरोप लगाया कि एक आईएएस अधिकारी कमेटी के समक्ष पेश नहीं हो रहे। यह पूरी तरह तथ्यों से विपरीत है।
प्रथम दृष्टया विधानसभा सदस्यों के सदन में उठाए सवाल गलत प्रतीत होते हैं। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया है कि विधानसभा कार्यवाही की लिखित प्रतिलिपि उन्हें मुहैया कराई जाए ताकि उनके जरिए वह सच्चाई बता सकें। इस मामले में एक निजी व्यक्ति को प्रयोग कर पहले भी शिकायत कराई गई थी। इसमें कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए गलत उद्देश्य से तथ्यों को परोस रहे हैं। दुर्भाग्य से इसमें कृषि विभाग के एक उच्च अधिकारी ने कैग पैरा से संबंधित कमेटी ऑफ पब्लिक अंडरटेकिंग की मीटिंग में बिना हिस्सा लिए ही गलत तथ्य प्रस्तुत कर दिए। यह आईपीसी की धारा 193 केतहत अपराध है।
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खेमका ने शुक्रवार को स्पीकर को पत्र लिखा है। प्रतिलिपि मिलने पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रधान सचिव खेमका पूरा सच स्पीकर के सामने लाएंगे। खेमका ने पत्र में लिखा है कि नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला व विधायक रघुबीर सिंह कादियान ने 24 व 25 अक्तूबर को सदन में हरियाणा भंडारण निगम से जुड़े कैग की ऑडिट पैरा का मामला विधानसभा में उठाया था। यह पैरा कमेटी ऑफ पब्लिक अंडरटेकिंग के समक्ष लंबित है। यहां तक आरोप लगाया कि एक आईएएस अधिकारी कमेटी के समक्ष पेश नहीं हो रहे। यह पूरी तरह तथ्यों से विपरीत है।
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प्रथम दृष्टया विधानसभा सदस्यों के सदन में उठाए सवाल गलत प्रतीत होते हैं। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया है कि विधानसभा कार्यवाही की लिखित प्रतिलिपि उन्हें मुहैया कराई जाए ताकि उनके जरिए वह सच्चाई बता सकें। इस मामले में एक निजी व्यक्ति को प्रयोग कर पहले भी शिकायत कराई गई थी। इसमें कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए गलत उद्देश्य से तथ्यों को परोस रहे हैं। दुर्भाग्य से इसमें कृषि विभाग के एक उच्च अधिकारी ने कैग पैरा से संबंधित कमेटी ऑफ पब्लिक अंडरटेकिंग की मीटिंग में बिना हिस्सा लिए ही गलत तथ्य प्रस्तुत कर दिए। यह आईपीसी की धारा 193 केतहत अपराध है।
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मैं न दोषी, न मेरा कोई पक्ष, बताऊंगा सच : खेमका
आईएएस अशोक खेमका
- फोटो : file photo
झूठी शिकायत पहले ही रद्द कर चुके लोकायुक्त
हरियाणा भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक पद पर अशोक खेमका के सेवारत रहते गेलवेल्युम शीट की खरीद हुई। इसमें खरीद की प्रक्रिया को भले ही तीन से चार बार बदला गया, लेकिन वित्तीय हानि कोई नहीं हुई।
शीट भी सबसे कम राशि 11 सौ रुपये में खरीदी गई, जबकि अन्य राज्यों में यही शीट 12 सौ से 26 सौ रुपये में खरीद चुके थे। खेमका को इस मामले में निशाना बनाते हुए पंचकूला के सेक्टर-25 निवासी रविंद्र कुमार ने लोकायुक्त के पास भी शिकायत की थी। जिसे लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने दस जुलाई 2017 को निरस्त करते हुए रविंद्र की कड़ी आलोचना की थी।
मैं न दोषी, न मेरा कोई पक्ष, बताऊंगा सच : खेमका
आईएएस अशोक खेमका का कहना है कि पूरे मामले में न तो वह दोषी हैं, न इसमें उनका कोई पक्ष है, वह इस स्पीकर के जरिए कैग के ऑडिट पैरा का सच बताना चाहते हैं। 20 अगस्त 2015 को भी उन्होंने कमेटी ऑफ पब्लिक अंडरटेकिंग के चेयरमैन को पत्र लिखकर पेश होने का आग्रह किया था, लेकिन आज तक उन्हें एक बार भी नहीं बुलाया गया।
हरियाणा भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक पद पर अशोक खेमका के सेवारत रहते गेलवेल्युम शीट की खरीद हुई। इसमें खरीद की प्रक्रिया को भले ही तीन से चार बार बदला गया, लेकिन वित्तीय हानि कोई नहीं हुई।
शीट भी सबसे कम राशि 11 सौ रुपये में खरीदी गई, जबकि अन्य राज्यों में यही शीट 12 सौ से 26 सौ रुपये में खरीद चुके थे। खेमका को इस मामले में निशाना बनाते हुए पंचकूला के सेक्टर-25 निवासी रविंद्र कुमार ने लोकायुक्त के पास भी शिकायत की थी। जिसे लोकायुक्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने दस जुलाई 2017 को निरस्त करते हुए रविंद्र की कड़ी आलोचना की थी।
मैं न दोषी, न मेरा कोई पक्ष, बताऊंगा सच : खेमका
आईएएस अशोक खेमका का कहना है कि पूरे मामले में न तो वह दोषी हैं, न इसमें उनका कोई पक्ष है, वह इस स्पीकर के जरिए कैग के ऑडिट पैरा का सच बताना चाहते हैं। 20 अगस्त 2015 को भी उन्होंने कमेटी ऑफ पब्लिक अंडरटेकिंग के चेयरमैन को पत्र लिखकर पेश होने का आग्रह किया था, लेकिन आज तक उन्हें एक बार भी नहीं बुलाया गया।