बाप-बेटी की बगावत भी नहीं आई काम, अभेद रहा अनिल विज और असीम गोयल का किला
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विधानसभा चुनाव में एक रोमांचक मुकाबला अंबाला जिले में भी देखने को मिला। जिले की दो अंबाला कैंट और अंबाला सिटी विधानसभा सीटों पर बागी बाप-बेटी मैदान में थे। दोनों ने टिकट न मिलने से नाराज होकर कांग्रेस से बगावत करते हुए आजाद ही परचा भरा था। दोनों ने अपने प्रतिद्वंदियों को जबरदस्त टक्कर भी दी। मगर वे कैंट और सिटी में भाजपा का गढ़ नहीं भेद नहीं पाए।
दरअसल, हुड्डा के बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री निर्मल सिंह अपनी बेटी पूर्व पार्षद चित्रा सरवारा के लिए अंबाला कैंट से टिकट मांग रहे थे। निर्मल सिंह खुद इस लोकसभा चुनाव में कुरुक्षेत्र सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी थे। लेकिन यहां से हारने के बाद वे अब विधानसभा लड़ने के इच्छुक नहीं थे।
दरअसल, इस चुनाव में निर्मल अपनी बेटी चित्रा सरवारा को लांच करना चाहते थे और इसी के लिए कांग्रेस हाईकमान के समक्ष टिकट के लिए अड़े भी हुए थे। पूर्व सीएम हुड्डा भी निर्मल को पूरा समर्थन देते हुए बेटी चित्रा की टिकट के लिए पैरवी कर रहे थे।
लेकिन अंबाला की पूर्व सांसद एवं राज्यसभा सदस्य कुमारी सैलजा निर्मल सिंह की धुरविरोधी होने की वजह से इन सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारने की जिद पर अड़ी थी। सोनिया गांधी की नजदीकियों का फायदा सैलजा को मिला और सैलजा ने अंबाला कैंट सीट से टिकट की प्रबल दावेदार मानी जा रही चित्रा सरवारा का नाम कटवाकर टिकट अपनी खास वेणु सिंगला अग्रवाल को दिलवा दी।
बस, इसी बात से नाराज पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने खुली बगावत का एलान करते हुए बेटी को भी चुनाव लड़वाने और खुद एक बार फिर रण में उतरने का एलान कर दिया। बेटी चित्रा को अंबाला कैंट सीट से और खुद अंबाला सिटी हलके से पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने बतौर आजाद प्रत्याशी परचा भर दिया। मगर ये दोनों ही सीटें भाजपा का गढ़ मानी जाती थी।
बावजूद इसके चित्रा ने अंबाला में मंत्री अनिल विज को और पिता निर्मल सिंह ने सिटी में विधायक असीम गोयल को टक्कर दी। बाप-बेटी इस सीट पर जीत तो नहीं पाए, मगर यहां खड़े कांग्रेस प्रत्याशी वेणु सिंगला अग्रवाल और पूर्व विधायक जसबीर मलौर का गेम जरूर बिगाड़ गए। फिलहाल दोनों को कांग्रेस ने पार्टी को निष्कासित कर दिया है।