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हरियाणा के 50 साल, शिशु से स्वर्णिम काल, कुछ ऐसा रहा सफरनामा

Fri, 04 Nov 2016 04:37 PM IST
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 04 Nov 2016 04:37 PM IST
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haryana state golden jubli celebration, amazing story of state progress report
हरियाणा की स्थापना के 50 साल, सेलिब्रेशन प्रोग्राम
हरियाणा 50 साल का हो चुका है। जब प्रदेश के वयोवृद्ध पूर्व विधायकों ने इसके शिशु से लेकर स्वर्णिम काल का सफरनामा सुनाया तो सब भावुक हो गए। हरि की धरती हरियाणा को पंजाब के साथ भी देखा और बाद में भी। अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आने से पहले की दशा भी देखी और बाद की दिशा में भागीदार भी बने।
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नीतियां बनाने में अहम योगदान के साथ सुझाव भी खुलकर दिए। बात हो रही है प्रदेश के वयोवृद्ध पूर्व विधायकों की। हरियाणा विधानसभा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लेने पहुंचे पूर्व विधायकों ने प्रदेश के भूतकाल, वर्तमान और भविष्य को लेकर बेबाकी से अपनी राय रखी और अहम पलों को साझा किया।
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रणधीर सिंह, 1967 में बने समालखा के पहले विधायक
जब हरियाणा बना तो कुछ नहीं था। उसके बाद विकास की गाथा लिखी। हरियाणा को अलग प्रदेश बनाने के पक्षधर बहुत कम थे। चौधरी देवीलाल ने ही एसवाईएल को पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल से बात कर बंद कराया।
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अब इसमें सीएम मनोहर लाल खट्टर क्या करें। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। बीते दस साल में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासन में प्रदेश का विकास नहीं हुआ। वर्तमान सरकार ने जाटों को दूर कर दिया है, चाहे वह राजनीति में हो या देहात में।

भविष्य की चुनौतियों व वर्तमान हालात पर रखी बेबाक राय

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
हरि सिंह नलवा तीन बार विधायक, एक बार सांसद
हरियाणा ने अस्तित्व में आने के बाद से ही जबरदस्त विकास किया है, चाहे सरकार किसी की भी रही हो। गठन के समय बिजली, पानी, सड़कों का बुरा हाल था। अब सब चकाचक है। पूर्व सीएम बंसीलाल ने हरियाणा के लिए बहुत कुछ किया। अगर उन्हें मेकर कहा जाए तो गलत नहीं होगा। 1966 में न घर पक्के थे न शिक्षा का कोई नाम था। प्रदेश से पांच अभिशाप भ्रष्टाचार, महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और बेइंसाफी को दूर करने की जरूरत है। इन्हें खत्म करने का एक ही तरीका है शिक्षा।

साहब सिंह सैणी, कुरुक्षेत्र के थानेसर से पूर्व विधायक
पंजाब का हिस्सा होने पर हरियाणा की कोई पहचान नहीं थी। कोई विकास नहीं था, इसलिए गठन जरूरी था। विकास और पहचान अलग राज्य बनने के बाद ही मिली। सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में जाट आंदोलन के चलते खत्म हुए भाईचारे को फिर से बनाना है। कन्या भ्रूण हत्या में गिरावट आई है पर इसे पूरी तरह से मिटाना होगा। अब लोगों के चरित्र में गिरावट आ गई है।
 
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