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वर्दी तो खाकी लेकिन पुलिस जैसा रैंक और सुविधाएं नहीं, वेतन भी दिहाड़ीदार जैसा

Wed, 24 May 2017 09:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 24 May 2017 09:24 AM IST
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Haryana's 14,000 home guards waiting for 'uniform rank'
हाेमगार्ड - फोटो : File Photo
बदन पर खाकी वर्दी, कार्यप्रणाली भी हार्ड, कंधों पर सितारे भी एक जैसे। लेकिन सुविधाएं और वेतन दिहाड़ीदार की माफिक। यही हालत है प्रदेश भर के करीब 14 हजार होमगार्ड जवानों व वॉलंटियर्स की। ये लोग आज भी पुलिस के समान सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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कंधों पर सिर्फ सितारे, सुविधाएं नहीं
प्रदेश में करीब चौदह हजार होमगार्ड के जवान पुलिस, थर्मल, बिजली, एफसीआई, रेलवे, माइनिंग, कांफेड इत्यादि विभागों में अस्थायी सेवाएं दे रहे हैं। विभिन्न राज्यों में चुनाव के दौरान इन्हें दूसरे प्रांतों में भी भेजा जाता है। सूबे के हर जिले में होमगार्ड्स की औसतन पांच कंपनियां तैनात हैं। इनमें होमगार्ड का जिला कमांडेंट पुलिस के डीएसपी रैंक, कंपनी कमांडर पुलिस के इंस्पेक्टर रैंक, प्लाटून कमांडर पुलिस के सब इंस्पेक्टर रैंक, हवलदार इंस्ट्रेक्टर पुलिस के हेड कांस्टेबल और हवलदार क्लर्क पुलिस के हवलदार रैंक के बराबर होते हैं। लेकिन विडंबना यह कि होमगार्ड के तमाम रैंक सिर्फ ऑनरेरी हैं।
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प्रदेश में ‘समान रैंक’ को तरस रहे हरियाणा के 14 हजार होमगार्ड

Haryana's 14,000 home guards waiting for 'uniform rank'
होमगार्ड। - फोटो : File Photo
इनका वेतन पुलिस की अपेक्षा बहुत ही कम है, जबकि ड्यूटी पुलिस कर्मियों के बराबर है। दूसरा, होमगार्ड्स को किसी तरह का रिस्क अलाउंस और अन्य सुविधाएं भी नहीं मिलती। जबकि साल भर में इनकी ड्यूटी भी चार से छह माह ही रहती है। हर जिले में रोस्टर के तहत ड्यूटियों में तब्दीली होती रहती है। होमगार्ड्स की मांग है कि उन्हें भी पुलिस के समान रैंक दिया जाए और पक्का किया जाए।

वेलफेयर को लेकर गंभीर है सरकार: एडीजीपी
एडीजीपी संजीव कुमार जैन का कहना है कि सरकार होमगार्ड्स के वेलफेयर को लेकर गंभीर है। इस कड़ी में इनकी एनरोलमेंट पॉलिसी बनाने पर भी विचार चल रहा है। जबकि बीते माह उनका ड्यूटी अलाउंस भी 300 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 572 किया गया है। जबकि डेथ केस में एक्ग्रेशिया पेमेंट भी एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख की गई और इंजरी केस में 15000 से बढ़ाकर एक लाख किया गया है।
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