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Chandigarh News: लाखा ग्रेनाइट और वियतनाम के प्रीमियम मार्बल से संवर रहा गोगामाड़ी श्री हनुमान मंदिर
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चंडीगढ़। सेक्टर-20 स्थित गोगामाड़ी श्री हनुमान मंदिर को भव्य रूप देने के लिए करीब दो करोड़ रुपये की लागत से रेनोवेशन का काम चल रहा है। मंदिर में वियतनाम से मंगाया गया सफेद प्रीमियम मार्बल और राजस्थान का लाखा ग्रेनाइट लगाया जा रहा है। राजस्थान और बिहार के कारीगर मंदिर को नया स्वरूप देने में जुटे हैं। मंदिर का काम 14 दिसंबर 2024 से शुरू हुआ था और इसी वर्ष कार्तिक में होने वाली हनुमान जयंती से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य है।
मंदिर प्रांगण को ढंकने के लिए मजबूत स्लाइडिंग ग्लास लगाया गया है। बारिश के दौरान इसे बंद किया जा सकेगा। मंदिर के प्रमुख पंडित किशोरी लाल ने बताया कि रेनोवेशन पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
चंडीगढ़ बसने से पहले का है मंदिर
पंडित किशोरी लाल के अनुसार गोगामाड़ी श्री हनुमान मंदिर चंडीगढ़ बसने से पहले का है। पहले यह माड़ी के नाम से प्रसिद्ध था। मंदिर के स्थान पर कभी खैड़ी नाम का गांव बसा था। चंडीगढ़ बसने के बाद गांव की जमीन का अधिग्रहण कर सेक्टर-20 बसाया गया। वह वर्ष 1979 से मंदिर से जुड़े हैं। वर्ष 1995 में मंदिर निर्माण शुरू हुआ और वर्ष 2000 में यहां हनुमान जी की करीब 32 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई।
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परिसर में वैष्णो माता, राधा-कृष्ण, गोगाजी, बाबा बालक नाथ, काली माता, शिवालय, बगलामुखी माता, लक्ष्मी नारायण, नवग्रह, शनिदेव और गणेश जी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
संस्कृत महाविद्यालय भी संचालित
मंदिर की ओर से जिंद बाबा संस्कृत महाविद्यालय का संचालन वर्ष 2004 से किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा के साथ रहने और भोजन की सुविधा भी दी जाती है। सावन में मंदिर में रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पंडित किशोरी लाल के अनुसार प्रतिदिन शिवलिंग पर 5100 बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं और पूजा में करीब चार घंटे लगते हैं।
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मंदिर प्रांगण को ढंकने के लिए मजबूत स्लाइडिंग ग्लास लगाया गया है। बारिश के दौरान इसे बंद किया जा सकेगा। मंदिर के प्रमुख पंडित किशोरी लाल ने बताया कि रेनोवेशन पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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चंडीगढ़ बसने से पहले का है मंदिर
पंडित किशोरी लाल के अनुसार गोगामाड़ी श्री हनुमान मंदिर चंडीगढ़ बसने से पहले का है। पहले यह माड़ी के नाम से प्रसिद्ध था। मंदिर के स्थान पर कभी खैड़ी नाम का गांव बसा था। चंडीगढ़ बसने के बाद गांव की जमीन का अधिग्रहण कर सेक्टर-20 बसाया गया। वह वर्ष 1979 से मंदिर से जुड़े हैं। वर्ष 1995 में मंदिर निर्माण शुरू हुआ और वर्ष 2000 में यहां हनुमान जी की करीब 32 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई।
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परिसर में वैष्णो माता, राधा-कृष्ण, गोगाजी, बाबा बालक नाथ, काली माता, शिवालय, बगलामुखी माता, लक्ष्मी नारायण, नवग्रह, शनिदेव और गणेश जी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
संस्कृत महाविद्यालय भी संचालित
मंदिर की ओर से जिंद बाबा संस्कृत महाविद्यालय का संचालन वर्ष 2004 से किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा के साथ रहने और भोजन की सुविधा भी दी जाती है। सावन में मंदिर में रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पंडित किशोरी लाल के अनुसार प्रतिदिन शिवलिंग पर 5100 बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं और पूजा में करीब चार घंटे लगते हैं।