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फरमानः आदेश का पालन नहीं किया, अटैच कर दो रोडवेज की बसें
ब्यूरो,अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Wed, 25 May 2016 01:59 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo photo
हरियाणा रोडवेज के एक सामान्य श्रेणी के कर्मचारी को आरक्षित वर्ग में पदोन्नत होने के बाद उसके जूनियर के बराबर सैलरी बेनिफिट्स देने के जिला अदालत ने एक साल पहले आदेश जारी किए थे। एक साल से इन आदेशों की पूरी तरह से पालना न करने पर मंगलवार को जिला अदालत ने हरियाणा रोडवेज की दो बसों को अटैच करने के आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से दायर एग्जीक्यूशन एप्लीकेशन पर सुनवाई करते हुए सिविल जज ने यह आदेश दिए हैं। जिन बसों को अटैच करने के आदेश दिए हैं, उनमें एचआर-68ए 8144 और एचआर-68ए 8141 शामिल हैं। एडवोकेट डीआर कैंथ और विशाल गुप्ता ने बताया कि हरियाणा रोडवेज से रिटायर्ड राजेंद्र सिंह की याचिका पर सिविल जज ने 11 फरवरी, 2015 को हरियाणा रोडवेज को आदेश दिए थे कि दो माह में याचिकाकर्ता का क्लेम केस तय करें। साथ ही उन्हें जयपाल सिंह के बराबर राजेंद्र सिंह को बेनिफिट्स नौ प्रतिशत ब्याज सहित चुकाए जाएं।
अंबाला निवासी राजेंद्र सिंह ने मार्च 2014 में यह केस दायर किया था। इसमें उन्होंने हरियाणा स्टेट ट्रांसपोर्ट के डायरेक्टर जनरल व हरियाणा रोडवेज कुरुक्षेत्र के जनरल मैनेजर को पार्टी बनाया था। याचिकाकर्ता की मांग थी कि वर्ष 1995 में इंस्पेक्टर और 3 सितंबर, 2004 को हुई चीफ इंस्पेक्टर की प्रमोशन के आधार पर उनकी सैलरी उनके जूनियर जयपाल और अन्य के बराबर हों। उन्होंने सैलरी स्केल बदलने के बाद मिलने वाले पेंशन लाभ 12 प्रतिशत ब्याज दर सहित मांगे थे।
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वह 31 मई 2005 को रिटायर हुए थे। वह जनरल कैटेगरी से थे। राजेंद्र के अनुसार उनके बाद भर्ती हुए आरक्षित श्रेणी से उनके जूनियर जयपाल की सैलरी उनसे अधिक थी। इसको लेकर उन्होंने संबंधित केस दायर किया था। वहीं अपने जवाब में प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि याचिकाकर्ता को उनके सभी रिटायरमेंट बेनिफिट्स मिले थे।
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याचिकाकर्ता की ओर से दायर एग्जीक्यूशन एप्लीकेशन पर सुनवाई करते हुए सिविल जज ने यह आदेश दिए हैं। जिन बसों को अटैच करने के आदेश दिए हैं, उनमें एचआर-68ए 8144 और एचआर-68ए 8141 शामिल हैं। एडवोकेट डीआर कैंथ और विशाल गुप्ता ने बताया कि हरियाणा रोडवेज से रिटायर्ड राजेंद्र सिंह की याचिका पर सिविल जज ने 11 फरवरी, 2015 को हरियाणा रोडवेज को आदेश दिए थे कि दो माह में याचिकाकर्ता का क्लेम केस तय करें। साथ ही उन्हें जयपाल सिंह के बराबर राजेंद्र सिंह को बेनिफिट्स नौ प्रतिशत ब्याज सहित चुकाए जाएं।
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अंबाला निवासी राजेंद्र सिंह ने मार्च 2014 में यह केस दायर किया था। इसमें उन्होंने हरियाणा स्टेट ट्रांसपोर्ट के डायरेक्टर जनरल व हरियाणा रोडवेज कुरुक्षेत्र के जनरल मैनेजर को पार्टी बनाया था। याचिकाकर्ता की मांग थी कि वर्ष 1995 में इंस्पेक्टर और 3 सितंबर, 2004 को हुई चीफ इंस्पेक्टर की प्रमोशन के आधार पर उनकी सैलरी उनके जूनियर जयपाल और अन्य के बराबर हों। उन्होंने सैलरी स्केल बदलने के बाद मिलने वाले पेंशन लाभ 12 प्रतिशत ब्याज दर सहित मांगे थे।
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वह 31 मई 2005 को रिटायर हुए थे। वह जनरल कैटेगरी से थे। राजेंद्र के अनुसार उनके बाद भर्ती हुए आरक्षित श्रेणी से उनके जूनियर जयपाल की सैलरी उनसे अधिक थी। इसको लेकर उन्होंने संबंधित केस दायर किया था। वहीं अपने जवाब में प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि याचिकाकर्ता को उनके सभी रिटायरमेंट बेनिफिट्स मिले थे।