गजबः 2007 में हो गई थी युवक की मौत, 2015 में बिजली चोरी करते पकड़ा, हाईकोर्ट भी हैरान
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हरियाणा बिजली वितरण निगम की सतर्कता तारीफ के मानकों से भी ऊपर हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मरे हुए व्यक्ति को बिजली चोरी करते पकड़ा और बाकायदा एफआईआर भी दर्ज करवाई। इतना ही नहीं यह भी उस नियम के तहत जिसके तहत बिजली चोरी की एफआईआर ही दर्ज नहीं करवाई जा सकती।
यह बात मृतक की पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताई है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस एफआईआर पर आगे किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए बिजली विभाग के अधिकारियों से पूछा है कि जो व्यक्ति 2007 में मर चुका है वह 2015 में बिजली चोरी कैसे कर सकता है। उतरी हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के खिलाफ मृतक की पत्नी मनीषा शर्मा ने एडवोकेट प्रवीन रोहित के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसके पति की 2007 में मृत्यु हो गई थी।
उसका बिजली का मीटर खराब था जिसके बारे में उसने एसडीओ समालखा को पत्र लिखकर सूचित किया था। कुछ दिन बाद बिजली कर्मचारी उसके घर आए और 7 हजार रुपये रिश्वत मांगी।
मनीषा ने कहा कि उसका मीटर जला हुआ है इसलिए वह रिश्वत नहीं देगी और कर्मियों के खिलाफ सीएम विंडो में शिकायत की गई। शिकायत के बाद बिजली कर्मचारी उसके घर आए और मीटर लगा कर चले गए। कुछ दिनों बाद उसको बिजली निगम का नोटिस मिला जिसमे उस पर बिजली चोरी का आरोप लगाया गया। इसके साथ ही नब्बे हजार रुपये जुर्माना भरने को कहा गया।
नोटिस में कहा गया कि उसके घर 26 जून 2015 को चेकिंग के दौरान उसे बिजली चोरी करते हुए पकड़ा गया जबकि याची ने बताया कि सच्चाई यह है कि 26 जून 2015 को बिजली विभाग के कर्मचारियों ने उसके घर का मीटर बदला था। इसके बाद बिजली का बिल आता रहा और वह बिल का भुगतान भी कर रही थी।
याचिकाकर्ता के वकील प्रवीण रोहिला ने हाईकोर्ट को बताया कि बिजली निगम के नियम के तहत अगर उपभोक्ता का मीटर जलता है ओर वह लगातार बिल पेमेंट करता है तो उसे किसी तरह की कोई पेनाल्टी नहीं लगाई जा सकती।
मनीषा ने एसडीओ राकेश दहिया से मिलकर अपनी शिकायत रखी तभी सुनील अरोड़ा ने एसडीओ को बताया कि यह नोटिस एक्सईएन ने तैयार करवाया था। निगम के खिलाफ सीएम विंडो में शिकायत देने के कारण यह कार्रवाई की गई थी। तभी एसडीओ ने उसके साथ बदतमीजी की और कहा कि वह जुर्माने की राशि तुरंत भर दे वरना अंजाम बुरा होगा।
हाईकोर्ट ने इस पर निगम के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि यह क्या हो रहा है। क्या सरकार की आंखें बिल्कुल बंद है। इस पर सरकार ने कहा कि पुलिस एफआईआर की जांच कर रही है। कोर्ट ने निगम के अधिकारियों से पूछा कि कैसे मृतक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब मृतक का नाम बिजली विभाग के रिकॉर्ड में ही स्वर्गीय के नाम से अंकित है तो फिर कैसे उसके नाम एफआईआर हुई। क्या निगम के अधिकारी मानसिक रूप से ठीक नहीं है या उन्हें दूसरों को परेशान करना अच्छा लगता है। हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के एमडी, एक्सईएन, एसडीओ से जवाब तलब कर लिया है साथ ही एफआईआर पर कार्रवाई पर रोक लगा दी है।