फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Ponds Review of Ancient Time

गंदगी भरे इस तालाब में कभी तैराक करते थे अभ्यास

Mon, 11 Aug 2014 06:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 11 Aug 2014 06:10 PM IST
विज्ञापन
Haryana Ponds Review of Ancient Time

तालाब, सर, सरोवर, जोहड़, ताल, तलैया समाज को जोड़ते हैं। जब ये टूटते हैं तो समाज टूटता है। जब ये सूखते हैं तो समाज सूखता है। तालाबों के प्रति बेरी के लोगों की क्रूरता से भी यही लगता है कि अब बेरी का समाज भी टूट रहा है, सूख रहा है। आपसी विवाद बढ़े हैं, रिश्तों और सामाजिक भाईचारे में शुष्कता आई है।

विज्ञापन


चुल्याण पाना के ऐतिहासिक रामाणी सरोवर की हालत देखने से इसका अहसास हुआ। चुल्याण पाना (मोहल्ला) के एक व्यक्ति ने हमें तालाब के बारे में बताने के लिए केवल इसलिए मना कर दिया कि हमने उसी मोहल्ले के दूसरे व्यक्ति से पूछ लिया।
विज्ञापन


रामाणी सरोवर का वास्तुशिल्प मर्यादा पुरुषोत्तम के राम के धनुष की तरह है। कहते हैं कि इसके इस तरह से निर्माण के बाद ही इसका नाम रामाणी पड़ा। हरियाणा के तालाबों पर गंभीर अध्ययन करने वाले रणबीर सिंह ने लिखा है, संयोग से यह सरोवर धनुष के आकार का है और सरोवर का निर्माण दुजाना गांव की ओर हुआ है इसलिए बुजुर्गों ने इसका नाम रामाणी रख दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


पूर्व से शुरू होकर दक्षिणावर्त होती हुई इसकी पाल पश्चिम की ओर घूम गई। गांवों की ओर का तट प्रत्यंचा जैसा लगता है। रामाणी की रमणीकता गांव की लड़कियों को कितना प्रभावित करती थी, इसकी एक झलक इस गीत में मिलती है, ओ बाब्बू कौतै ब्याह दे, पाऊंगी रामाणी की पाल पै। यानी हे पिता मेरी शादी कहीं भी कर देना, लेकिन मैं लौटकर रामाणी की पाल पर आ जाऊंगी।
यही अब रामाणी चारों ओर से घेराबंदी का शिकार हो चुका है। यहां तक कि जिस पुलिया के रास्ते रामाणी में पानी आता था, उसे ब्लाक कर उसके ऊपर प्लॉट काट दिया गया है। इस रास्ते और आसपास के जंगल के रास्ते से आने वाले पानी से तालाब हमेशा लबालब रहता था। सरोवर का पानी अत्यंत गुणकारी था। वैद्य तालाब के चारों ओर के कुओं के पानी का इस्तेमाल अलग-अलग दवाएं बनाने के लिए करते थे। रामाणी कभी सूखा भी नहीं।

चुल्याण पाना के साक्षात ग्राम देवता रामाणी में अब मोहल्ले की गंदगी, गंदा पानी और मल आता है। रामाणी की जगह अब लोगों के दिलों में कहीं नहीं हैं। लोग रामाणी पर बात नहीं करना चाहते। मनोविज्ञान के शिक्षक सुधीर कादयान कहते हैं, जमाने के साथ सब बदल गया।

एक जमाना था जब इसी रामाणी से बड़े-बड़े तैराक तैयार होते थे और बेरी में गोल्ड मेडल आते थे, लेकिन अब किसी को इसकी चिंता नहीं है। यह सरोवर सारे समाज का था, पूरे समाज की भावना इससे जुड़ी थी। इसके चारों ओर नौ पक्के घाट थे।

तालाब के चारों ओर हैं बारह कुएं

सवा आठ एकड़ के तालाब क्षेत्र में चार एकड़ के इस तालाब के चारों ओर देवी-देवताओं के मंदिर तो थे ही साथ ही 12 कुएं भी। हर कुएं का अपना अलग वास्तुशिल्प और घेरा है। हर चबूतरा 20-25 फुट का है। मनोहर सेठ आला, गुफावाला कुआं, धौला कुआं, टोडर आला, खूबीराम आला कुआं।

हर कुएं का अलग आकार और खूबी। पनघट की रौनक खूब लगती थी। महादेव मंदिर के साथ बंजारे का कुआं है। इस कुएं की खुदाई और निर्माण राजस्थान से आए बंजारों ने की। लखौरी ईंटों और चूने से बनी इसकी नाल आज भी अच्छी हालत में है। हाथी आला कुआं को यहां के लोग गुलशन आले का कुआं भी कहते हैं।

यहां के बुजुर्ग गजनूप सिंह बताते हैं कि गुलशन आले कुएं से दुजाना के नवाब के हाथी का बहुत लगाव था। वह इस कुएं के पास से ही निकलकर सरोवर में मस्ती करता था। कुएं के रास्ते हाथी के तालाब तक जाने के लिए विशेष व्यवस्था की थी। यहां गुफा के रास्ते से पानी आता था।


उधर, भिखारी क्यां का कुएं पर आठ भौंण लगी थीं। यह अब अपना स्वरूप खो रहा है। हरियाणवी समाज में जाति की जड़ें पहले से ही बहुत गहरी हैं। लोग पानी के मामले में भी भेदभाव करते थे। ग्रामीण बताते हैं कि इस कुएं के एक पाड़छे का जाटों और दूसरे का दलितों को उपयोग करने का अधिकार था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed