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मोदी, शाह को चुनौती देने की तैयारी में बिश्नोई

Sat, 30 Aug 2014 10:19 AM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 30 Aug 2014 10:19 AM IST
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Kuldeep Bishnoi trying to Challenge PM Narendra Modi, Amit Shah

भाजपा से अलग होने के बाद कुलदीप बिश्नोई और अन्य पार्टियां एक होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की तैयारी में हैं। वहीं, कुछ पार्टियों की नजर इन दोनों दलों के वोट बैंक पर है। भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद कुलदीप बिश्नोई की हजकां और विनोद शर्मा की हरियाणा जनचेतना पार्टी एक साथ आ चुकी हैं।

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अब इनकी कोशिश है कि बसपा के साथ महागठबंधन हो जाए। हालांकि बसपा अरविंद शर्मा को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और महागठबंधन की राह में यही एक बात बाधा है। ये तीनों ही दल प्रदेश चुनाव में गैर जाट समुदायों खासतौर पर ब्राह्मण, वैश्य, दलित, पंजाबी, सिख आदि को गोलबंद करने में जुटे हैं।
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भाजपा भी लोकसभा चुनाव तक शहरी क्षेत्रों में उच्च वर्ग की पार्टी मानी जाती रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर कांड के बाद जाट समुदाय का झुकाव भाजपा की ओर हुआ है। हजकां के अलग होने के पहले से ही भाजपा अपने पुराने जनाधार को बचाए रखने की कोशिश में जुट गई थी।
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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में प्रदेश से राव इंद्रजीत सिंह व कृष्णपाल गुर्जर को शामिल करके भाजपा गैर जाट समुदायों को पहले ही संदेश दे चुकी है। हालांकि कांग्रेस के दिग्गज चौधरी बीरेद्र सिंह को अपने पाले में लाकर भाजपा जाट समुदाय को भी अपने साथ बनाए रखने में जुटी है।

36 बिरादरियों को लुभाने में जुट गए है नेता

Kuldeep Bishnoi trying to Challenge PM Narendra Modi, Amit Shah

चुनावी महासमर करीब आते ही राजनीतिक दल अब जातीय समुदायों पर डोरे डालने लगे हैं। खास बात यह है कि सभी दल दावा कर रहे हैं कि प्रदेश की सभी 36 बिरादरियों का समर्थन उन्हें ही मिल रहा है।

भाजपा-हजकां के अलग-अलग राह पकड़ लेने के बाद अब हरियाणा की चुनावी जंग में जातीय स्तर पर ध्रुवीकरण तेज होने की आशंका है। क्योंकि हजकां ने गैर जाट समुदायों को अपने पक्ष में करने की मुहिम तेज कर दी है, जबकि लोकसभा चुनाव से पहले तक भाजपा का भी मुख्य जनाधार यही समुदाय रहे हैं।

इनेलो पहले से ही जाट समुदाय को गोलबंद करने में जुटी है। इसीलिए इस चुनावी जंग में जाट और गैर जाट समुदायों के ध्रुवीकरण तेज होने के पूरे आसार बनते जा रहे हैं।

जाटों और गैर-जाटों मे उलझा हुआ है वोट बैंक

Kuldeep Bishnoi trying to Challenge PM Narendra Modi, Amit Shah

दूसरी तरफ इनेलो के लिए कहा जाता है कि वह जाट समुदाय की ही राजनीति करती है।  इनेलो और कांग्रेस का नेतृत्व जाट नेताओं के पास है, जबकि नेतृत्व के सवाल पर भाजपा अब भी जाट व गैर जाट समुदायों के बीच उलझी है। चौधरी देवीलाल और भजनलाल के समय से ही प्रदेश की राजनीति में यह विभाजन देखा जाता रहा है।

कांग्रेस में रहते हुए भी भजनलाल गैर जाट जातियों के करीब माने जाते थे। अब बिश्नोई उनकी इसी सियासी फसल को काटने की कोशिश में हैं। प्रदेश में जाट समुदाय लगभग 27 फीसदी ही है। जबकि 73 फीसदी गैर जाट समुदाय है, इनमें 19.50 फीसदी दलित हैं। ब्राह्मण व पंजाबी समुदाय सात-सात फीसदी व चार फीसदी सिख हैं।

इन समुदायों की पीड़ा यह है कि इतनी आबादी के बावजूद प्रदेश की कमान ज्यादातर समय जाट समुदाय के पास रही है। पिछले 18 साल से प्रदेश की कमान लगातार जाट समुदाय के पास ही है। प्रदेश के अब तक के नौ मुख्यमंत्रियों  में से पांच जाट और चार गैर जाट सुमदायों से हुए हैं। इसलिए उन्हें बिश्नोई की राजनीति रास आती है।

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