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Loksabha Election: हरियाणा में लोस चुनाव के साथ बिछ रही विस चुनाव की बिसात, टिकट की आस में हो रहा दल-बदल

Wed, 22 May 2024 05:27 PM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा/सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 22 May 2024 05:27 PM IST
सार

भाजपा और कांग्रेस पहले से अपने विधायकों, पूर्व विधायकों और टिकट के दावेदारों को आगाह कर चुकी हैं कि विधानसभा चुनाव में टिकट लोकसभा चुनाव के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही मिलेगा। कहीं टिकट कट न जाए, इसलिए कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने अपने-अपने हलकों में पूरी ताकत के साथ प्रचार शुरू कर दिया है।

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हरियाणा में दल बदल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में लोकसभा चुनाव में ही अक्तूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ गई है। अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए जहां राजनीतिक दल शह और मात देने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं तमाम दलों के नेता विधानसभा चुनाव को देखते हुए अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। 

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मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक और टिकटों को दावेदारों ने अपने-अपने हलकों में पूरी ताकत झोंक दी है। लोकसभा चुनाव में की गई मेहनत विधानसभा चुनाव में काम आएगी। टिकट चाहने वाले प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रहे और हाईकमान के सामने ताकत दिखा शक्ति प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
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लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा, कांग्रेस, जजपा, इनेलो और आप में नई नियुक्तियां और पार्टी छोड़ने के फैसले लिए जा रहे हैं। पृथला से निर्दलीय विधायक नयनपाल रावत और बादशाहपुर से विधायक राकेश दौलताबाद को भाजपा से टिकट की आस है, इसलिए वह अभी सरकार के साथ समर्थन में हैं। जबकि तीन निर्दलीय विधायक रणधीर गोलन, धर्मपाल गोंदर और सोमवीर सांगवान ने टिकट नहीं मिलने की आशंका के चलते सरकार से समर्थन वापस ले लिया और अब उनको कांग्रेस से टिकट की आस जगी है। 
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अब तक कांग्रेस 40 से अधिक पूर्व सांसद, पूर्व विधायक व अन्य बड़े नेताओं को पार्टी ज्वाइन करा चुकी है। इसी प्रकार पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान ने भी जजपा को अलविदा कह मनोहर लाल के नेतृत्व में कमल का फूल थामा है। रणजीत चौटाला ने भाजपा ज्वाइन करके रानियां से अपने बेटे के लिए टिकट लेने का रास्ता साफ कर दिया है।

करनाल में कई नेताओं को आस
करनाल विधानसभा उपचुनाव में सीएम नायब सिंह सैनी उम्मीदवार हैं, लेकिन स्थानीय नेताओं को आश्वस्त किया गया है कि तीन महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में स्थानीय नेताओं को ही मौका दिया जाएगा। यहां टिकट के दावेदारों में मेयर रेणु बाला गुप्ता, संजय बठला, कृष्ण गर्ग और जगमोहन आनंद समेत अन्य दावेदार हैं। कांग्रेस की बात करें तो त्रिलोचन सिंह, पूर्व विधायक सुमिता सिंह को भी टिकट की आस है। इसी प्रकार, इंद्री में पूर्व मंत्री भीमसेन मेहता और पूर्व विधायक राकेश कंबोज दावेदार हैं। असंध से कांग्रेस को छोड़कर पूर्व विधायक जिलेराम शर्मा ने भाजपा में कई दावेदारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। यहां पूर्व सीपीएस बक्शीश सिंह और जिलाध्यक्ष योगेंद्र राणा टिकट के दावेदार हैं। वहीं, मनोहर लाल के खास रहे पूर्व डिप्टी मेयर मनोज वधवा ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थामा है।

पानीपत में संजय भाटिया शहरी सीट से कर रहे तैयारी
करनाल से सांसद रहे संजय भाटिया का इस बार लोकसभा का टिकट काटा गया है। वह पानीपत शहरी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। भाजपा में दोबारा टिकट नहीं मिलने की संभावना के चलते ही पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी ने भाजपा को अलविदा कह कांग्रेस का दामन थामा है। दोनों ही नेताओं को अपनी-अपनी पार्टी से टिकट की आस है।

विधानसभा में तय होगा इन नेताओं का भविष्य
लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से कई नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर संकट आ गया है। हालांकि, हाईकमान ने सभी नेताओं को विधानसभा चुनावों में समायोजन का आश्वासन दिया है। कांग्रेस की बात करें तो किरण चौधरी की बेटी श्रुति चौधरी, चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह, करण दलाल, पूर्व स्पीकर के बेटे चाणक्य शर्मा, वीरेंद्र राठौर, कैप्टन अजय यादव के नाम शामिल हैं। इसी प्रकार, भाजपा मेें सिरसा से टिकट कटने के बाद से पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल खाली हो गई हैं।

तीन निर्दलीय विधायक ले चुके सरकार से समर्थन वापस
विधानसभा चुनावों को देखते हुए तीन निर्दलीय पुंडरी से रणधीर गोलन, नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर व चरखीदादरी से सोमवीर सांगवान भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस ले चुके हैं और कांग्रेस को समर्थन दे चुके हैं। तीनों ही विधायकों भाजपा में आगामी विधानसभा में टिकट तय नहीं लग रही थी, इसलिए तीनों ने एक साथ कांग्रेस के साथ जाने का फैसला लिया। गोलन के सामने भाजपा में दिनेश कौशिक एंट्री कर चुके हैं, जबकि सोमवीर सांगवान के सामने पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान भाजपा का दामन थाम चुके हैं। इसी प्रकार, धर्मपाल गोंदर के सामने पहले से ही भाजपा के पूर्व विधायक व पूर्व जिलाध्यक्ष भगवानदास कबीरपंथी टिकट के दावेदार हैं।

जजपा के 6 विधायक भी टिकट के लिए तलाश रहे नई जगह
जजपा के दो विधायक बरवाला से जोगीराम सिहाग और नरवाना से रामनिवास सुरजाखेड़ा खुलकर भाजपा के साथ आ चुके हैं। दोनों ही विधायकों के खिलाफ जजपा स्पीकर को शिकायत भी दे चुकी है और दल बदलू कानून के तहत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी प्रकार, शाहाबाद से विधायक रामकरण काला के दोनों बेटे कांग्रेस में जा चुके हैं, जबकि गुहला चीका से विधायक ईशवर सिंह भी कुमारी सैलजा के माध्यम से कांग्रेस में जाने की तैयारी में है। टोहाना से जजपा विधायक ने रविवार को कांग्रेस में जाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने खुलकर कुमारी सैलजा का समर्थन किया है। इनके अलावा नारनौंद से रामकुमार गौतम पहले से ही जजपा से नाराज हैं, लेकिन उनको भाजपा और कांग्रेस दोनों से ही टिकट का मजबूत आश्वासन नहीं मिल रहा है।

कांग्रेस का कुनबा बढ़ा, विधानसभा में टिकट को लेकर घमासान तय
दलों के हिसाब से देखे तो सबसे ज्यादा लोग कांग्रेस में शामिल हुए हैं। इनमें 20 पूर्व विधायक, चार पूर्व मंत्री, एक पूर्व केंद्रीय मंत्री, 4 पूर्व सांसद और चार सीपीएस शामिल हैं। इसके अलावा तीन निर्दलीय विधायक कांग्रेस में फिलहाल शामिल तो नहीं हुए हैं, मगर वह बाहर से समर्थन दे रहे हैं। कांग्रेस में एंट्री पाने वाले नेताओं में अधिकतर लोग इनेलो, आप, जजपा और भाजपा के पृष्ठभूमि के लोग हैं। वहीं, भाजपा में तीन पूर्व मंत्री, पांच पूर्व विधायक, दो पूर्व सांसद और एक मौजूदा विधायक समेत कई अन्य शामिल हैं। इनमें अधिकतर लोगों की पृष्ठ भूमि कांग्रेस की रही है। हालांकि, हुड्डा विरोधी गुट कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी इस दल-बदल पर सवाल उठा चुके हैं। इन नेताओं का तर्क है कि एक-एक हलके में कई कई टिकट के दावेदार पैदा करने से पार्टी को ही नुकसान होता है? आखिरकार टिकट एक ही नेता को मिलना है, शेष दावेदार कांग्रेस के खिलाफ काम करते हैं। बावजूद इसके हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस में लगातार नेताओं के शामिल होना बदस्तूर जारी है। 

निशान सिंह ने जजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा है। पूर्व सीएम हुड्डा के नेतृत्व में उनको टोहाना से टिकट की आस है। पूर्व पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली ने भी टोहाना से टिकट की उम्मीद में सिरसा लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया है। इसके अलावा पूर्व कृषि मंत्री परमवीर सिंह, रणदीप सुरजेवाला के खासमखास बलजिंदर ठरवी आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट के प्रमुख दावेदार हैं। वहीं, हरपाल सिंह बुडानिया, बलदेव सिंह दंदीवाल और हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर गिल भी खुद को टिकट का दावेदार बताते हैं। इसी प्रकार रोहिता रेवड़ी भी टिकट की आस में आई हैं, लेकिन पानीपत सिटी से कांग्रेस में पहले ही बलबीर पाल शाह परिवार मजबूत दावेदार है। कैलाशो सैनी लाडवा से दावा ठोक रही हैं, उनके सामने भी पहले कई दावेदार हैं। इनसे पहले पूर्व मंत्री रहे और थानेसर के पूर्व विधायक अशोक अरोड़ा, सोनीपत में पूर्व विधायक पदम सिंह दहिया और पूर्व सीपीएस शारदा राठौर औ्र पूर्व विधायक डा. वीरेंद्र पाल कांग्रेस में आ चुके हैं।

कांग्रेस में शामिल हुए ये दिग्गज
कांग्रेस में हाल-फिलहाल शामिल होने वाले में सबसे बड़े दिग्गज नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह, उनके बेटे व पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह, पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना, पूर्व सांसद कैलाशो रानी, पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह कादियान, पूर्व विधायक पदम सिंह दहिया, पूर्व विधायक मूला राम, पूर्व सीपीएस शारदा राठौर, पूर्व विधायक राकेश कांबोज, पूर्व सीपीएस राम निवास, पूर्व सीपीएस अनिता यादव, पूर्व विधायक रमेश गुप्ता, पूर्व मंत्री जगदीश यादव, पूर्व मंत्री निर्मल सिंह, पूर्व विधायक व जजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष निशान सिंह, पूर्व मंत्री सुभाष चौधरी, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह गुज्जर समेत कई अन्य नेता शामिल हैं। वहीं, अन्य नेताओं में आप की पूर्व नेता चित्रा सरवारा, जजपा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव ठाकुर राजा राम सिंह, आप के वाइस प्रेसिडेंट संदीप गोयल, पूर्व आईएएस विनय सिंह यादव व बजीर सिंह गोयत शामिल हैं।


भाजपा में शामिल हुए ये दिग्गज
भाजपा में शामिल होने वाले तीन नेताओं को पार्टी ने उम्मीदवार भी बनाया है। इनमें पूर्व सांसद अशोक तंवर व नवीन जिंदल, कैबिनेट मंत्री रणजीत चौटाला शामिल हैं। वहीं, अन्य दिग्गज नेताओं में पूर्व मंत्री कृष्ण मूर्ति हुड्डा, पूर्व डिप्टी स्पीकर आजाद मोहम्मद, पूर्व विधायक बंता राम वाल्मीकी, पूर्व विधायक दिनेश कौशिक, पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल, पूर्व विधायक व पूर्व सीपीएस जिले राम शर्मा व पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान में शामिल हैं। इसके अलावा अन्य नेताओं में मीनू बेनीवाल, कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान दीपक हुड्डा, कबड्डी खिलाड़ी स्वीटी बूरा, देवेंद्र चावला व अन्य नेता शामिल हैं।



 

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