Haryana Lok Sabha Election: सत्ता के सेमीफाइनल में उलझे समीकरण, कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी
दसों लोकसभा सीट पर आज वोट डाले जाएंगे। कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। पिछली बार सभी दस सीटों पर परचम लहराने के बाद भाजपा के सामने अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराना चुनौती रहेगा। कांग्रेस में भी इस बार ज्यादा जोश दिखाई दे रहा है।
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वहीं, गुरुग्राम, करनाल, कुरुक्षेत्र, हिसार, अंबाला और भिवानी-महेंद्रगढ़ पर भाजपा मोदी फैक्टर, क्षेत्रीय समीकरण और मजबूत उम्मीदवार का तर्क देकर खुद को भाजपा बेहतर स्थिति में मान रही है। इनेलो व जजपा दोनों वोट कटवा की स्थिति में हैं। सिरसा, कुरुक्षेत्र, हिसार, भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट पर इन उम्मीदवारों को जितने ज्यादा वोट मिलेंगे, उतने ही दूसरी पार्टियों के वोट कटेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान सत्ता विरोधी लहर, किसान आंदोलन और मोदी के नाम का असर देखने को मिला है।
चुनाव में राज्य के सीएम नायब सिंह सैनी, पूर्व सीएम मनोहर लाल, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व कुमारी सैलजा के साथ चौटाला परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। इन चुनावों का असर चार महीने के बाद राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। इस लिहाज से सभी राजनीतिक दलों के लिए यह एक तरह से सेमीफाइनल मैच है।
करनाल : सत्ता विरोधी लहर के आगे जीत का मार्जिन बढ़ाना चुनौती
करनाल लोकसभा सीट पर भाजपा ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल करने वाले संजय भाटिया का टिकट काटकर पूर्व सीएम मनोहर लाल को मैदान में उतारा है। पंजाबी बाहुल्य सीट पर कांग्रेस ने पंजाबी बिरादरी के दिव्यांशु बुद्धिराजा को उम्मीदवार बनाकर मनोहर लाल को कड़ी चुनौती देने की कोशिश की है। पिछली बार भाजपा ने यह सीट छह लाख वोटों से जीती थी। जीत का बड़ा मार्जिन और गैर जाट वोटों की वजह से भाजपा फिलहाल अपना पलड़ा भारी मानकर चल रही है। हालांकि मनोहर लाल के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी है। यह चुनाव मनोहर लाल के साढ़े नौ साल के शासन की परीक्षा भी है। वहीं, बुद्धिराजा को इस सीट से कांग्रेस के कुछ नेताओं का खुलकर समर्थन नहीं मिल सका। इससे बुद्धिराजा की राह इतनी आसान नहीं है।
रोहतक : भाजपा व हुड्डा का इम्तिहान
सबसे हॉट सीट रोहतक में भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद डाॅ. अरविंद शर्मा पर भरोसा कर उन्हें दोबारा मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने 2019 में अरविंद शर्मा से करीब सात हजार वोटों से हारने वाले राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा पर फिर दांव लगाया है। यह मुकाबला भले ही दो उम्मीदवारों के बीच हो, मगर असल मुकाबला भाजपा और हुड्डा परिवार के बीच है। रोहतक लोकसभा सीट में पड़ने वाले कोसली विधानसभा क्षेत्र से मिली बढ़त की वजह से पिछले चुनाव में भाजपा ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली थी। मगर इस बार कांग्रेस ने कोसली हलके को जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। दीपेंद्र हुड्डा लगातार कोसली के युवाओं से मिलते रहे हैं। वहीं, भाजपा ने भी पूरे लोकसभा क्षेत्र के प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए यह चुनाव साख का सवाल बन गया है। भाजपा को पता है कि यह सीट उसके हाथ से फिसली तो चंद महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष हावी हो जाएगा, इसलिए यह सीट भाजपा के लिए आन-बान और शान बन गई है।
सोनीपत : कांग्रेस के जाल में फंसी दिखी भाजपा
लोकसभा चुनाव के इतिहास में सोनीपत अब तक के सबसे कड़े के मुकाबले से गुजर रहा है। भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर को देखते हुए दो बार के सांसद रमेश कौशिक का टिकट काटकर राई के विधायक मोहन लाल बड़ौली का मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने जाटलैंड सीट पर अपनी परंपरा को पीछे छोड़ते हुए गैर जाट सतपाल ब्रह्मचारी को मैदान में उतारकर भाजपा को फंसा दिया है। दोनों ही ब्राह्मण उम्मीदवार हैं। बड़ौली सोनीपत से हैं तो ब्रह्मचारी जींद से। पिछली बार जींद से ही भाजपा को करीब एक लाख वोटों की लीड मिली थी, मगर इस बार जींद से ही ब्रह्मचारी के होने से भाजपा की समीकरण बिगड़ गए हैं। यह पहली बार है जब किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी ने जींद को प्रतिनिधित्व दिया है। वहीं बड़ौली के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर भी है। भाजपा को मोदी के साथ गैर जाट वोटों का सहारा है तो कांग्रेस की रणनीति जाट वोटों के साथ किसानों की नाराजगी को वोट में बदलने के भरोसे पर टिकी है। बड़ौली के लिए मोदी तो ब्रह्मचारी के लिए राहुल गांधी रैली कर चुके हैं।
सिरसा : कांग्रेस के भंवर में तंवर
सिरसा में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने सिरसा में पहली बार कमल खिलाने वाली सांसद सुनीता दुग्गल का टिकट काटकर कई पार्टियां बदलने वाले अशोक तंवर को मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने सिरसा से दो बार सांसद रह चुकी व पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा पर भरोसा जताया है। पंजाब से सटी सीट होने और किसान आंदोलन की वजह से कांग्रेस को किसानों का समर्थन मिल रहा है। यह सीट चौटाला का गढ़ है। इससे इनेलो उम्मीदवार संदीप लोट की भी स्थिति मजबूत है जो कांग्रेस की परेशानी भी बढ़ा रहे हैं। प्रचार के आखिरी दिनों तक तंवर समीकरणों के भंवर में फंसे रहे। भाजपा ने आखिरी दिन तक पूरी ताकत झोंकी। तंवर भी सैलजा के बराबर खड़े हो गए हैं। कुमारी सैलजा के समर्थन में प्रियंका गांधी ने रोड शो कर माहौल बनाने की पूरी कोशिश की है।
अंबाला : अबकी बार राह आसान नहीं
पिछले दो बार से जीत हासिल कर रही भाजपा के लिए इस बार अंबाला की राह आसान नहीं है। भाजपा हैट्रिक लगाने के लिए अपने स्व. सांसद रतनलाल कटारिया की पत्नी बंतो कटारिया पर भरोसा जताकर सहानुभूति की लहर के सहारे चुनाव जीतने की कोशिश में है। वहीं, कांग्रेस ने मुलाना विधायक वरुण चौधरी को चुनावी समर में उतारा है। किसान आंदोलन की छाप होने से मुकाबला रोचक हो गया है। गृह क्षेत्र होने की वजह से सीएम नायब सिंह सैनी समेत सरकार के कई मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इनमें कृषि मंत्री कंवरपाल गुर्जर, परिवहन मंत्री असीम गोयल, विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता व पूर्व गृह मंत्री अनिल विज शामिल हैं। वहीं, वरुण की साफ व नरम छवि की वजह से लोग उनके साथ खड़े हो रहे हैं। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके लिए खूब पसीना बहा रहे हैं।
कुरुक्षेत्र : इंडी-इनेलो लड़ाई में, भाजपा को वोट बंटवारे से आस
कुरुक्षेत्र के चुनावी महाभारत में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है। भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व सांसद नवीन जिंदल पर भरोसा जताया है। पूरे हरियाणा में सिर्फ एक सीट पर इंडिया गठबंधन की ओर से आप उम्मीदवार सुशील गुप्ता मैदान में हैं। इनेलो के अभय चौटाला ने खूब पसीना बहाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। किसान आंदोलन की वजह से मिल रहे समर्थन से विपक्ष उत्साहित है, लेकिन यही बात उसके लिए चिंता भी सता रही है। विपक्ष को लगता है कि किसानों व सत्ता विरोधी रोष का वोट गुप्ता व चौटाला के बीच विभाजित हो सकता है। वोट विभाजन की वजह से ही भाजपा खुद को सेफ मानकर चल रही है। उधर, धर्मनगरी में पिछले दिनों हुए लगातार धार्मिक कार्यक्रमों की वजह से शहर में राष्ट्रवाद का एक माहौल बनाने की कोशिश की गई है।
हिसार : जिस तरफ गैर जाट वोट गया, जीत उसी की
हिसार के सियासी समर में इस बार चौटाला परिवार के तीन सदस्य मैदान में हैं। भाजपा ने हाल में पार्टी में शामिल निर्दलीय विधायक व चौधरी देवीलाल के बेटे और राज्य के ऊर्जा मंत्री रणजीत चौटाला को मैदान में उतारा है। वहीं, इनेलो से देवीलाल के पौत्र रवि चौटाला की पत्नी सुनैना चौटाला और जजपा से देवीलाल के पौत्र अजय चौटाला की पत्नी नैना चौटाला चुनावी अखाड़े में हैं। एक ही परिवार के तीन सदस्यों के मैदान में आने से मुकाबला रोचक हो गया है। वहीं, कांग्रेस ने पुराने नेता जयप्रकाश को उतारकर मुकाबले को कड़ा बना दिया है। भाजपा ने अपने साथ बिश्नोई व जिंदल परिवार को जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। कैप्टन अभिमन्यु भी अपने वोट बैंक के साथ जुड़े हुए हैं। दिलचस्प है कि चारों ही जाट बिरादरी से हैं। हिसार में करीब 18 लाख वोटों में से करीब साढ़े छह लाख जाट वोट हैं। जाट वोट विभाजित होने की स्थिति में गैर जाट वोट जिस तरफ गया, जीत उसकी तय है। वहीं, जेपी के समर्थन में न तो चौधरी बीरेंद्र सिंह खुलकर सामने आए और न ही एसआरके गुट का कोई सदस्य प्रचार के लिए नहीं आया।
फरीदाबाद : एकतरफा लड़ाई आखिर में उलझ गई
फरीदाबाद से लगातार दो बार रिकॉर्ड मतों से जीतने वाले कृष्णपाल गुर्जर पर भाजपा ने तीसरी बार भरोसा जताया है। कांग्रेस ने उनकी बिरादरी के गुर्जर नेता महेंद्र प्रताप को चुनाव में खड़ा कर मुकाबले को रोचक बना दिया है। करीब एक महीने पहले तक भाजपा के लिए एकतरफ माना जा रहा चुनाव आखिरी वक्त पर उलझ गया है। कृष्णपाल के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर काफी है। इस रोष के साथ कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। यहां सबसे ज्यादा वोट जाट बिरादरी के करीब 4.20 लाख मतदाता हैं। वहीं, गुर्जर 3.50 लाख और अनुसूचित जाति के 3.65 लाख। मुस्लिम वोटों की संख्या भी करीब सवा दो लाख है। यदि कांग्रेस को एकमुश्त जाट व मुस्लिम वोट मिले तो कृष्णपाल के लिए मुश्किल हो सकती है। हालांकि जाट वोट में सेंध लगाने के लिए वे रालोद के जयंत चौधरी को लेकर आए थे।
गुरुग्राम : राव की छठी जीत रोकने की कोशिश
गुरुग्राम लोकसभा सीट से भाजपा ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत पर एक बार फिर दांव खेला है। वह पांच बार जीतकर संसद भवन पहुंचे हैं, मगर कांग्रेस ने इस बार ऐसी फील्डिंग सजाई है कि इंद्रजीत के लिए जीत का सिक्सर मारना इतना आसान नहीं है। कांग्रेस ने फिल्म अभिनेता राज बब्बर को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। राव अपने और मोदी सरकार के कामों को आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं। राव के समर्थन में मोदी चार महीने में तीन बार रैली कर चुके हैं। वहीं, जातीय समीकरण की वजह से राज बब्बर मुकाबले में आ गए हैं। पंजाबी होने के साथ उन्हें एकमुश्त मुस्लिम वोटों के मिलने की आस है। इस सीट पर मेवाती मुस्लिम 18 से 19 फीसदी है, मगर राज बब्बर के सामने मुश्किल यह है कि उन्हें भितरघात के साथ बाहरी उम्मीदवार का तमगा का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा उन्हें बाहरी उम्मीदवार के तौर पर प्रचारित करती रही है। वहीं, इस सीट से कांग्रेस के कैप्टन अजय यादव भी टिकट मांग रहे थे। राज बब्बर को टिकट मिलने के बाद कुछ दिन तो उन्होंने नाराजगी दिखाई बाद में वे प्रचार में उतर गए।
भिवानी में भाजपा को मोदी से और कांग्रेस को जाट वोटों से आस
भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा का चुनाव भी दिलचस्प हो गया है। भाजपा की ओर से लगातार दो बार से चुने जा रहे सांसद धर्मबीर मैदान में हैं तो कांग्रेस ने चौधरी बंसीलाल के परिवार को किनारे कर महेंद्रगढ़ के विधायक राव दान सिंह को उतारकर कड़ी चुनौती देने की कोशिश की। धर्मबीर के खिलाफ लोगों में गुस्सा है, मगर इलाके के मतदाता एक बार मोदी को और उत्सव देना चाहते हैं। वहीं, चौधरी बंसीलाल की वंशज श्रुति चौधरी की जगह राव दान सिंह को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस पर भितरघात का खतरा मंडरा रहा है। किरण चौधरी ने एक भी बार उनके पक्ष में चुनाव प्रचार नहीं किया है, बल्कि गुटबाजी का मुद्दा मीडिया में उठाकर राव दान सिंह के खिलाफ मुश्किलें और खड़ी कर दी हैं। ऊपर से पीएम ने अपनी रैली में बंसीलाल का जिक्र कर उनके समर्थकों को भाजपा की ओर रिझाने का प्रयास किया है। जजपा उम्मीदवार राव बहादुर सिंह भी राव दान सिंह के खिलाफ परेशानी खड़ी कर रहे हैं। अहीर बेल्ट पर उनका भी प्रभाव अच्छा है। हालांकि इसके बावजूद दान सिंह को उनकी मिलनसार छवि की वजह से अच्छा समर्थन मिल रहा है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी होने की वजह से उन्हें जाटों की ओर से समर्थन मिलने की आस है। मोदी फैक्टर, क्षेत्र में हुए विकास कार्य और जातीय समीकरणों के वजह से धर्मबीर खुद को दौड़ में आगे मान रहे हैं।