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हरियाणा पुरातत्व विभाग के स्टोर में धूल फांक रहीं ऐतिहासिक धरोहरें
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 03 Apr 2016 11:47 AM IST
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हरियाणा आईएएस अफसर अशोक खेमका
- फोटो : अमर उजाला
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महाभारत और हड़प्पा काल से मुगलकाल तक का इतिहास संजोए हरियाणा प्रदेश में ऐतिहासिक धरोहर पुरातत्व विभाग के स्टोर में धूल फांक रही हैं। इनके संरक्षण का जिम्मा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का है, लेकिन विभाग के कामकाज और हालात पर नजर डाली जाए तो साफ हो जाता है कि खुद विभाग को संरक्षण की सख्त जरूरत है। हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग बीते दस साल के दौरान अपना स्थायी कार्यालय और पुरावस्तुओं की संभाल के लिए संग्रहालय का निर्माण भी नहीं कर पाया है।
दी काम्पट्रोलर एंड आडिट जनरल आफ इंडिया (कैग) ने भी वर्ष 2014-15 की रिपोर्ट में विभाग के कामकाज पर उंगली उठाई है। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में रखी गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरातत्व विभाग भूमि और धन की उपलब्धता के बावजूद अपने लिए न तो भवन का निर्माण कर सका और न ही पुरावस्तुओं के संरक्षण के लिए कोई संग्रहालय बना सका। विभाग के पास उपलब्ध करीब 620 पत्थर की मूर्तियां, 17778 सोने-चांदी व तांबे से प्राचीन सिक्के, 571 सोने-चांदी के गहने व मूल्यवान पत्थरों के अलावा अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं संग्रहालय के अभाव में स्टोर में धूल फांक रही हैं।
खास बात यह भी है कि नियमानुसार प्रति वर्ष धरोहरों के भंडार का भौतिक सत्यापन भी नहीं किया जा रहा, जिससे यह पता चल सके कि कितनी वस्तुएं सुरक्षित हैं, कितनी टूटी व खराब हुई हैं। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विभाग ने अगस्त, 1996 में हुडा से सेक्टर-5 पंचकूला में संग्रहालय बनाने के लिए दो एकड़ का प्लॉट 24.23 लाख रुपये में खरीदा। तब सरकार ने राज्य पर्यटन निगम को संग्रहालय बनाने का जिम्मा सौंपते हुए 92.40 लाख रुपये की राशि भी उपलब्ध करा दी, लेकिन निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ। अप्रैल, 2003 में संग्रहालय के स्थान को लेकर सरकार ने पुनर्विचार किया और इसे पंचकूला की बजाय कुरुक्षेत्र में बनाने का निर्णय लिया।
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दिसंबर, 2007 में मुख्य सचिव हरियाणा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में संग्रहालय का स्थान फिर से बदलकर पंचकूला रखने का निर्णय लिया गया। इसके बाद नक्शा बनाने के लिए टेंडर निकाले गए, नक्शा भी बना लेकिन दिसंबर 2015 तक संग्रहालय का काम शुरू नहीं हो सका। जनवरी, 2015 में पुरातत्व विभाग ने संग्रहालय के लिए पर्यटन विभाग के पास रखे 92.40 लाख रुपये वापस ले लिए, लेकिन दस साल तक रखी गई राशि के लिए विभाग को अब तक ब्याज की राशि जोकि 85.65 लाख रुपये बनती है, नहीं मिली है। इस संबंध में विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग का कुल सालाना बजट डेढ़ करोड़ का है। अब यदि संग्रहालय बनाया जाता है तो इसकी लागत डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
संग्रहालय के लिए पहले बने नक्शे में विभाग का दफ्तर और संग्रहालय एक ही इमारत में दिखाए गए थे। हम चाहते हैं कि दो एकड़ भूमि पर केवल संग्रहालय ही बने ताकि पुरावस्तुओं के संरक्षण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो। संग्रहालय का नया नक्शा तैयार कराने के लिए नए नक्शानवीस का नाम सरकार को सुझाया गया है। इस संबंध में फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई है। सरकार की अनुमति मिलते ही आगे कार्रवाई शुरू की जाएगी।
-अशोक खेमका, प्रधान सचिव, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, हरियाणा
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दी काम्पट्रोलर एंड आडिट जनरल आफ इंडिया (कैग) ने भी वर्ष 2014-15 की रिपोर्ट में विभाग के कामकाज पर उंगली उठाई है। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में रखी गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरातत्व विभाग भूमि और धन की उपलब्धता के बावजूद अपने लिए न तो भवन का निर्माण कर सका और न ही पुरावस्तुओं के संरक्षण के लिए कोई संग्रहालय बना सका। विभाग के पास उपलब्ध करीब 620 पत्थर की मूर्तियां, 17778 सोने-चांदी व तांबे से प्राचीन सिक्के, 571 सोने-चांदी के गहने व मूल्यवान पत्थरों के अलावा अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं संग्रहालय के अभाव में स्टोर में धूल फांक रही हैं।
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खास बात यह भी है कि नियमानुसार प्रति वर्ष धरोहरों के भंडार का भौतिक सत्यापन भी नहीं किया जा रहा, जिससे यह पता चल सके कि कितनी वस्तुएं सुरक्षित हैं, कितनी टूटी व खराब हुई हैं। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विभाग ने अगस्त, 1996 में हुडा से सेक्टर-5 पंचकूला में संग्रहालय बनाने के लिए दो एकड़ का प्लॉट 24.23 लाख रुपये में खरीदा। तब सरकार ने राज्य पर्यटन निगम को संग्रहालय बनाने का जिम्मा सौंपते हुए 92.40 लाख रुपये की राशि भी उपलब्ध करा दी, लेकिन निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ। अप्रैल, 2003 में संग्रहालय के स्थान को लेकर सरकार ने पुनर्विचार किया और इसे पंचकूला की बजाय कुरुक्षेत्र में बनाने का निर्णय लिया।
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दिसंबर, 2007 में मुख्य सचिव हरियाणा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में संग्रहालय का स्थान फिर से बदलकर पंचकूला रखने का निर्णय लिया गया। इसके बाद नक्शा बनाने के लिए टेंडर निकाले गए, नक्शा भी बना लेकिन दिसंबर 2015 तक संग्रहालय का काम शुरू नहीं हो सका। जनवरी, 2015 में पुरातत्व विभाग ने संग्रहालय के लिए पर्यटन विभाग के पास रखे 92.40 लाख रुपये वापस ले लिए, लेकिन दस साल तक रखी गई राशि के लिए विभाग को अब तक ब्याज की राशि जोकि 85.65 लाख रुपये बनती है, नहीं मिली है। इस संबंध में विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग का कुल सालाना बजट डेढ़ करोड़ का है। अब यदि संग्रहालय बनाया जाता है तो इसकी लागत डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
संग्रहालय के लिए पहले बने नक्शे में विभाग का दफ्तर और संग्रहालय एक ही इमारत में दिखाए गए थे। हम चाहते हैं कि दो एकड़ भूमि पर केवल संग्रहालय ही बने ताकि पुरावस्तुओं के संरक्षण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो। संग्रहालय का नया नक्शा तैयार कराने के लिए नए नक्शानवीस का नाम सरकार को सुझाया गया है। इस संबंध में फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई है। सरकार की अनुमति मिलते ही आगे कार्रवाई शुरू की जाएगी।
-अशोक खेमका, प्रधान सचिव, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, हरियाणा