सर्वोच्च बलिदान को नमन: हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने श्री गुरु तेग बहादुर को बताया मानवता का सच्चा रक्षक
श्री गुरु तेग बहादुर के 400 वें प्रकाश पर्व को मनाते हुए हमें उनके महान आदर्शों के प्रति समर्पित करने की जरूरत है, जो हमें धार्मिक स्वतंत्रता और मानव कल्याण के महत्व के बारे में सिखाते हैं। उन्होंने हमें निडर होकर स्वतंत्र जीवन जीने की शिक्षा दी।
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सिखों के नौंवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व पर हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि एक महान योद्धा, आध्यात्मिक व्यक्तित्व और मातृभूमि के प्रेमी नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर के सर्वोच्च बलिदान की मानवता सदैव ऋणी रहेगी। उन्होंने धर्म, मातृभूमि और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया। इसलिए उन्हें हिंद की चादर के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। श्री गुरु तेग बहादुर के 400 वें प्रकाश पर्व को मनाते हुए हमें उनके महान आदर्शों के प्रति समर्पित करने की जरूरत है, जो हमें धार्मिक स्वतंत्रता और मानव कल्याण के महत्व के बारे में सिखाते हैं।
उन्होंने हमें निडर होकर स्वतंत्र जीवन जीने की शिक्षा दी। मुगल सम्राट औरंगजेब के उन्हें और उनके परिवार को भारी यातनाएं देने पर भी गुरु तेग बहादुर जी ने आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि एक दिव्य शांति के साथ सहन किया। उनकी दिव्य शक्ति ऐसी थी कि जब उनके शिष्यों को उनके सामने क्रूरता से मारा जा रहा था, तो वे गहरे ध्यान में थे। गुरु तेग बहादुर जी ने कहा था कि धर्म एक कर्तव्य है, और एक आदर्श जीवन जीने का तरीका है। गुरु जी की शहादत मनुष्य को कर्तव्य परायणता, स्वतंत्रता व देश के प्रति प्रतिबद्धता का पाठ पढ़ाती है।
आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन, चरित्र और बलिदान से प्रेरणा पाकर मानवीय और नैतिक मूल्यों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है ताकि भारत फिर से विश्व गुरु बने। उन्होंने बेहद कठिनाइयों के बावजूद आदर्श और सिद्धांत का मार्ग चुना। कश्मीरी पंडितों का एक प्रतिनिधिमंडल चक नानकी स्थान पर उनसे मिलने पहुंचा था। वह पवित्र नगरी आज श्री आनंदपुर साहिब के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने धैर्यपूर्वक कश्मीरी पंडितों की बात सुनने के बाद कहा कि वे औरंगजेब या उनके आदमियों को यह बता दें कि वे अपना धर्म तभी बदल सकते हैं जब उनके गुरु ऐसा करेंगे।
सिख धर्म की नींव की स्थापना मानव इतिहास में एक सामान्य बात नहीं थी, बल्कि यह इस्लाम के खिलाफ हिंदू धर्म की ढाल बन गई। यह आज एक महान परंपरा व विरासत है, जिसे नौवें सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर ने अपने धर्म की रक्षा के लिए लोगों को शक्ति व मजबूती प्रदान की, बल्कि सिक्ख धर्म की महानता को शिखर तक पहुंचाया। उनकी शिक्षाओं और बलिदान से हमें सबक लेने की जरूरत है। उनका बलिदान, सत्य अहिंसा में विश्वास, और सबके प्रति एक परोपकारी दृष्टिकोण के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने अंधविश्वास, जाति आधारित भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ लड़ाई लड़ी ताकि हर इंसान अपनी पसंद का आदर्श जीवन जी सके। एक सच्चा धर्म हमें समाज और लोगों की सर्वोत्तम तरीके से सेवा करना सिखाता है। हमें सुख, दुख, सम्मान और अपमान में स्थिर और संतुलित जीवन व्यतीत करना चाहिए।