राम रहीम पर फैसले से पहले अलर्ट, सरकार का आग्रह, वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से फैसला सुनाए सीबीआई कोर्ट
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हरियाणा सरकार ने सीबीआई कोर्ट से आग्रह किया है कि सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में फैसला सुनाने के दौरान डेरामुखी गुरमीत राम रहीम की व्यक्तिगत पेशी की जगह वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए पेशी की अनुमति देने का आग्रह किया है। राज्य सरकार नहीं चाहती कि अगस्त 2017 जैसे हालात बनें जैसा कि साध्वियों से दुराचार मामले में डेरामुखी को सुनाई गई सजा के बाद पैदा हुए थे।
डेरामुखी की पंचकूला कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी को टालने को लेकर हरियाणा सरकार के आला अफसरों की बैठक शुक्रवार को हुई। बैठक में हर पहलू पर चर्चा की गई। इसके बाद प्रदेश सरकार ने सीबीआई कोर्ट में एक अर्जी लगाई। जिसमें सरकार ने सीबीआई कोर्ट से आग्रह किया है कि वह इस मामले की सुनवाई 11 जनवरी को भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से करें।
राज्य सरकार को चिंता है कि साध्वी दुराचार मामले में फैसला आने के बाद पंचकूला में जिस तरह हिंसा हुई थी वैसी कहीं इस बार भी न हो। राज्य सरकार इससे बचने के लिए हर तरह से सुरक्षात्मक रास्ता अपना रही है। उसने पंचकूला में कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया है। अब सीबीआई कोर्ट को फैसला लेना है कि वह सुनवाई को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से करेगी या फिर पहले की तरह रोहतक की सुनारिया जेल (जहां डेरामुखी दुष्कर्म मामले में सजा काट रहा है) में ही कोर्ट लगाकर अपना फैसला सुनाएगी।
उल्लेखनीय है कि पत्रकार रामचंद्र छात्रपति के मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अदालत ने दोनों पक्षों की ओर से सभी सुबूतों और गवाहों को सुन-देख लिया है और इस मामले में अब 11 जनवरी को फैसला सुनाना है। हरियाणा के गृह सचिव एसएस प्रसाद ने बताया कि सरकार ने सीबीआई कोर्ट में अर्जी लगाकर सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से करवाने का आग्रह किया है। दूसरी ओर, पंचकूला में पुलिस को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है।