Haryana News: हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट से झटका, सूचना और सेवा के अधिकार आयुक्तों को देनी पड़ेगी पेंशन
सूचना आयुक्तों और सेवा के अधिकार आयुक्तों की पेंशन पर हरियाणा सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। पेंशन समाप्त करने के आदेश को सिंगल बेंच ने रद्द कर दिया था। इसके बाद हरियाणा सरकार ने खंडपीठ में अपील की। मगर खंडपीठ से भी सरकार को राहत नहीं मिली। खंडपीड ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा और अपील को सिरे से खारिज कर दिया।
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सूचना आयुक्तों और सेवा के अधिकार आयोग के आयुक्तों की पेंशन को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को बड़ा झटका दिया और सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार की अपील खारिज होने के चलते अब रिटायर हुए सूचना आयुक्तों व सेवा का अधिकार आयुक्तों को पेंशन का भुगतान करना होगा।
सेवा का अधिकार आयोग के आयुक्त के पद से रिटायर हुए सुनील कत्याल व अन्य ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच को बताया था कि हरियाणा सरकार ने जून 2019 को एक पत्र जारी कर सूचना आयुक्तों व सेवा का अधिकार आयुक्तों को पेंशन के लिए अपात्र कर दिया है। उन्होंने कहा था कि इस प्रकार केवल एक पत्र के माध्यम से उन्हें पेंशन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कत्याल की मुख्य दलील यह थी कि सरकार जून 2014 में जारी की गई नियुक्ति की शर्तों के प्रति बाध्य है और 2019 के निर्देश के माध्यम से पेंशन के अधिकार से उन्हें को वंचित नहीं कर सकती है।
26 मई 2023 को हाईकोर्ट की एकल बेंच ने सेवा का अधिकार आयोग हरियाणा के पूर्व आयुक्त सुनील कत्याल द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार के 28 जून 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत उनकी पेंशन का लाभ वापस ले लिया गया था।
सिंगल बेंच ने कहा था कि राज्य सरकार 10 अप्रैल 2015 को जारी नियुक्ति पत्र के नियमों और शर्तों से बंधी है और यह वित्त विभाग की सहमति से जारी किए गए थे। आयुक्तों का अधिकार है कि उन्हें हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 की धारा 15(4) के तहत वेतन और भत्ते दिए जाएं क्योंकि अधिनियम में आज तक कोई संशोधन नहीं हुआ है।
इसी फैसले को हरियाणा सरकार ने खंडपीठ के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए चुनौती दी थी। याचिका में सिंगल बेंच के आदेश को रद्द करने की अपील की गई थी। खंडपीठ ने अब अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि आयुक्तों की नियुक्ति सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अनुसार सेवा शर्तों के तहत हुई है। इस प्रकार राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य शर्तों में उनकी नियुक्ति के बाद बदलाव नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि एकल जज द्वारा पारित फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता है। हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ ही हरियाणा सरकार की अपील को रद्द कर दिया है।