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Haryana Election: भाजपा ने खेला दांव... मजबूत दावेदारों का विकल्प मिला, बगावत का खतरा; इन सीटों पर बदला समीकरण
Tue, 03 Sep 2024 09:29 AM IST
शाहरुख खान
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 03 Sep 2024 09:29 AM IST
सार
भाजपा को मजबूत दावेदार के तौर विकल्प मिल गए हैं। भाजपा बबली को टोहाना से, सांगवान को दादरी और कबलाना को बादली से उतार सकती है।पिछली बार तीनों ही सीट से भाजपा हार गई थी। लेकिन इस बार समीकरण बदल सकते हैं।
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Haryana Election
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भाजपा ने पूर्व मंत्री, पूर्व जेल अधीक्षक समेत तीन लोगों को पार्टी में शामिल कर मजबूत दांव खेला है। तीनों के पार्टी में शामिल होने से भाजपा को अच्छी स्थिति वाले उम्मीदवारों के तौर पर एक विकल्प भी मिल गया है। भाजपा पूर्व मंत्री बबली को टोहाना से, पूर्व जेल अधीक्षक सुनील सांगवान को दादरी से और संजय कबलाना को बादली से उतार सकती है।
तीनों ही विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि इनके आने से पार्टी को बगावत का भी खतरा भी है। कुछ सीटों पर पहले से भाजपाई टिकट मांग रहे हैं। यहां तक उन्होंने अपना प्रचार अभियान भी शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों के साथ पार्टी सामंजस्य बैठाने में जुटी हुई है। हालांकि अभी तक पार्टी ने किसी के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।
पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली को शामिल करने के बाद भाजपा टोहाना में मजबूत हुई है। पार्टी उन्हें उम्मीदवार भी घोषित कर सकती है। बबली ने 2019 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को रिकॉर्ड 52 हजार मतों से हराया था। पिछले दो बार से भाजपा बराला को इस विधानसभा क्षेत्र से उतारती आ रही थी।
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बराला के राज्यसभा पहुंचने के बाद पार्टी के पास कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं था। ऐसे में बबली उनके लिए मजबूत विकल्प के तौर पर हो सकते हैं। वह हरियाणा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। धन-बल से वह मजबूत हैं और पिछले कई दिनों से इलाके में समाजसेवा के तौर पर सक्रिय हैं।
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तीनों ही विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि इनके आने से पार्टी को बगावत का भी खतरा भी है। कुछ सीटों पर पहले से भाजपाई टिकट मांग रहे हैं। यहां तक उन्होंने अपना प्रचार अभियान भी शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों के साथ पार्टी सामंजस्य बैठाने में जुटी हुई है। हालांकि अभी तक पार्टी ने किसी के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।
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पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली को शामिल करने के बाद भाजपा टोहाना में मजबूत हुई है। पार्टी उन्हें उम्मीदवार भी घोषित कर सकती है। बबली ने 2019 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को रिकॉर्ड 52 हजार मतों से हराया था। पिछले दो बार से भाजपा बराला को इस विधानसभा क्षेत्र से उतारती आ रही थी।
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बराला के राज्यसभा पहुंचने के बाद पार्टी के पास कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं था। ऐसे में बबली उनके लिए मजबूत विकल्प के तौर पर हो सकते हैं। वह हरियाणा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। धन-बल से वह मजबूत हैं और पिछले कई दिनों से इलाके में समाजसेवा के तौर पर सक्रिय हैं।
सांगवान हो सकते हैं दादरी से उम्मीदवार, बबीता भी तैयारी में
भोंडसी जेल के पूर्व अधीक्षक सुनील सांगवान के रूप में भाजपा को एक अच्छा विकल्प मिला है। उनके पिता सतपाल सांगवान पूर्व सीएम बंसीलाल के करीबी रहे हैं। कुछ समय पहले ही वह भाजपा में शामिल हो गए थे। वह भी पहले सरकारी अधिकारी थे और इस्तीफा देकर ही राजनीति में आए थे। अब उनके बेटे सुनील सांगवान रविवार को हरियाणा सरकार को इस्तीफा सौंप राजनीति में कूद गए हैं।
भोंडसी जेल के पूर्व अधीक्षक सुनील सांगवान के रूप में भाजपा को एक अच्छा विकल्प मिला है। उनके पिता सतपाल सांगवान पूर्व सीएम बंसीलाल के करीबी रहे हैं। कुछ समय पहले ही वह भाजपा में शामिल हो गए थे। वह भी पहले सरकारी अधिकारी थे और इस्तीफा देकर ही राजनीति में आए थे। अब उनके बेटे सुनील सांगवान रविवार को हरियाणा सरकार को इस्तीफा सौंप राजनीति में कूद गए हैं।
उनका लड़ना तय माना जा रहा है, मगर दंगल गर्ल बबीता फोगाट भी भाजपा से तैयारी कर रही हैं। उन्होंने जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है। पहलवालों के मुद्दे पर वह खुलकर भाजपा का समर्थन करती रही हैं। ऐसे में दादरी में योग्य उम्मीदवार को टिकट देना पार्टी के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
बादली से धनखड़ मांग रहे थे टिकट, कबला के आने से बदलेगा समीकरण
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ बादली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। वह टिकट भी मांग रहे थे, मगर संजय कबलाना के आने से समीकरण बदल जाएंगे।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ बादली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। वह टिकट भी मांग रहे थे, मगर संजय कबलाना के आने से समीकरण बदल जाएंगे।
काबला दो बार भाजपा व जजपा से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, मगर एक भी बार उन्हें जीत नहीं मिली है। हार के बावजूद वह इलाके में सक्रिय रहे हैं। अब देखना होगा कि पार्टी धनखड़ को उतारती है या फिर कबलाना को।