सतलोक के बाहर पुलिस कार्रवाई पर बोले डीजीपी...
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हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आपरेशन संत में जुटी हरियाणा पुलिस के पास अब रामपाल को हाईकोर्ट में पेश करने के अलावा कोई चारा नहीं है। राज्य पुलिस और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह दावा किया है कि रामपाल को हाईकोर्ट में पेश करके ही दम लेंगे।
पुलिस का दावा है कि संत रामपाल द्वारा महिलाओं और छोटे बच्चों का सहारा लेकर बनाई गई मानव श्रृंखला हटाने में पुलिस ने सतर्कतापूर्वक कार्रवाई की है। आश्रम के अंदर से फायरिंग होने के बाद भी बंधक लोगों को उनके आग्रह पर पुलिस ने धैर्य और सावधानी से बाहर निकाला है।
करीब दो हजार लोगों को आश्रम से बसों में सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। हरियाणा के होम सेक्रेट्री पीके महापात्रा, डीजीपी एसएन वशिष्ठ और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने पत्रकार वार्ता में यह दावा किया है।
जबरन बंधक बनाने का फोन आया था आश्रम से
डीजीपी ने कहा कि आश्रम के अंदर से पुलिस को फोन पर सूचित किया गया कि उन्हें जबरन बंधक बनाया गया है और उन्हें मदद की आवश्यकता है। इसके बाद उन्हें बाहर निकाला गया। अब तक 105 पुलिस कर्मियों को चोटें आई हैं। इनमें से 9 को गंभीर चोटें हैं जबकि एसएचओ समेत तीन पुलिसकर्मी को गोली लगी है।
इसके अलावा दो मीडिया कर्मी भी अग्रोहा मेडिकल कॉलेज व हिसार के अस्पताल में भर्ती हैं। आश्रम के 85 अनुयायियों को भी चोटें आई हैं। सरकार ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, लॉ एंड आर्डर, मोहम्मद अकील को मीडिया कर्मियों को हालचाल पूछने भेजा गया है। उन्होंने बताया कि आश्रम के अंदर की ओर से फैंके गए पैट्रोल बब से जेसीबी जला दी गई।
वशिष्ठ ने बताया कि जब तक पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप संत रामपाल को गिरफ्तार कर 21 नवंबर को न्यायालय में पेश नहीं कर देते। तब तक हरियाणा पुलिस द्वारा ऑपरेशन जारी रखा जाएगा। पुलिस आपरेशन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और छोटे बच्चों को आश्रम से सुरक्षित निकालना है।
मीडिया पर हमले की होगी कार्रवाई
संत रामपाल की गिरफ्तारी नहीं होने से बौखलाई हरियाणा पुलिस ने मीडियाकर्मियों पर अपना गुस्सा उतारते हुए जमकर लाठियां भांजीं। बाद में मरहम लगाने के लिए एडीजीपी मोहम्मद अकील की जिम्मेदारी लगाई। पुलिस की इस कार्यप्रणाली को लेकर चंडीगढ़ के मीडिया में रोष है। मंगलवार को इस मामले में डीजीपी मीडिया के सवालों से रूबरू होना पड़ा।
पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि मीडिया की ओर से शिकायत मिलने पर नुकसान की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि जब आश्रम के अंदर से गोलियां चल रही थीं तो मीडिया को भी सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें नहीं पता होता कि गोली कहां से चल जाए लेकिन हरियाणा पुलिस ऐसी घटना से मुकाबला करने लिए पूर्ण रूप से प्रशिक्षित होती है और पुलिस को खतरे का अनुमान होता है।
उन्होंने बताया कि पुलिस से मीडिया के प्रति कोई चूक हुई है तो ऑपरेशन खत्म होने के बाद इसकी जांच करवाई जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कौशल ने बताया कि जिन मीडिया कर्मियों के उपकरण नष्ट हुए हैं उन्हें उपकरण उपलब्ध करवाएं जाएंगे।