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हरियाणा सीएम बोले- तकनीक से कोरोना को हराया, तकनीक ही भविष्य में तरक्की की गवाह बनेगी
Thu, 14 May 2020 12:46 PM IST
खुशबू गोयल
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 14 May 2020 12:46 PM IST
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल
- फोटो : अमर उजाला
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पिछली सरकार और वर्तमान सरकार के छह माह के कार्यकाल में जो तकनीक हरियाणा ने तैयार की है, वहीं संकट के समय में कोरोना से निपटने में सबसे ज्यादा सहयोगी साबित हुई है। इसलिए अब आगे के लिए जीवन पद्धति बदलने का समय आ गया है, जिसमें तकनीक ही सहारा बनेगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि डिजिटल हरियाणा की तर्ज पर चल कर हमने कोरोना के खिलाफ जंग में अपना अहम स्थान बनाया है।
आज मंडियों में किसानों की फसल की खरीद डिजिटल माध्यम से हो रही है। मेरी फसल मेरा ब्योरा इस बात का उदाहरण है। सरकार के पास एक-एक व्यक्ति का डाटा था। जिससे यह पता करके कि किसे क्या आवश्यकता है। एक-एक व्यक्ति तक 16 लाख 20 हजार की सहायता राशि पहुंचाई गई। इसमें (घोस्ट बेनीफीशियरी) फर्जी आवेदक सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं ले पाए। सरकार ने पात्र व्यक्तियों के ऊपर ही करीब 619 करोड़ खर्च किए।
डिजिटलाइजेशन के माध्यम से हमने जन विरतण प्रणाली को आगे बढ़ाया। जिसका लाभ अभी देखने को मिलता है। कोरोना के समय में ई पास जारी किए गए यह सब डिजिटलाइजेशन के माध्यम से ही संभव हो रहा है। जिन उद्योगों को खोलने की अनुमति दी जा रही है। उसकी प्रक्रिया भी डिजिटलाइज कर दी गई है। सरकार की ओर से हजारों काल करके लोगों से पूछा गया है कि किसे क्या तकलीफ है और उसकी तकलीफ का समाधान किया गया है।
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आज मंडियों में किसानों की फसल की खरीद डिजिटल माध्यम से हो रही है। मेरी फसल मेरा ब्योरा इस बात का उदाहरण है। सरकार के पास एक-एक व्यक्ति का डाटा था। जिससे यह पता करके कि किसे क्या आवश्यकता है। एक-एक व्यक्ति तक 16 लाख 20 हजार की सहायता राशि पहुंचाई गई। इसमें (घोस्ट बेनीफीशियरी) फर्जी आवेदक सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं ले पाए। सरकार ने पात्र व्यक्तियों के ऊपर ही करीब 619 करोड़ खर्च किए।
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डिजिटलाइजेशन के माध्यम से हमने जन विरतण प्रणाली को आगे बढ़ाया। जिसका लाभ अभी देखने को मिलता है। कोरोना के समय में ई पास जारी किए गए यह सब डिजिटलाइजेशन के माध्यम से ही संभव हो रहा है। जिन उद्योगों को खोलने की अनुमति दी जा रही है। उसकी प्रक्रिया भी डिजिटलाइज कर दी गई है। सरकार की ओर से हजारों काल करके लोगों से पूछा गया है कि किसे क्या तकलीफ है और उसकी तकलीफ का समाधान किया गया है।
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एसवाईएल का पानी आने तक अपने संसाधनों से पानी लाने की तैयारी
हरियाणा और पंजाब के बीच राजनैतिक मुद्दा बन चुका एसवाईएल का पानी जब पहुंचेगा तब पहुंचेगा फिलहाल सरकार ने अपने संसाधनों से जल दोहन की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दो तीन साल में इसके परिणाम सामने आने शुरू हो जाएंगे। यह दावा यहां हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने किया है।
उन्होंने कहा है कि हरियाणा सरकार लखवार किशाऊ और रेणुका बांध के माध्यम से सूबे में पानी लाने की तैयारी कर रही है। अभी तक की सरकारों ने यह प्रयास नहीं किया है। हमारी सरकार का ही प्रयास है कि दक्षिण हरियाणा में हमने टेल तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि लखवार बांध के साथ हमारा एमओयू साइन हो गया है। इसका पानी भी शीघ्र मिलना शुरू हो जाएगा।
हरियाणा में तेजी से गिरते हुए जलस्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि कई क्षेत्र ऐसे हैं जो डार्क जोन में जा रहे हैं। सरकार ने मेरा पानी मेरी विरासत के नाम से योजना शुरू की है। जिससे हम अपनी आने वाले पीढ़ी के लिए जो जमीन छोड़ कर जाएं वह बंजर न हो। सरकार का प्रयास है कि एक किलो चावल की खेती में कई सौ लीटर पानी खर्च होता है। इसलिए हमने किसानों को जागरूक किया है कि जहां पर पानी की मात्रा कम है वहां पर किसान धान की फसल की जगह अन्य फसलें उगाएं।
उन्होंने कहा है कि हरियाणा सरकार लखवार किशाऊ और रेणुका बांध के माध्यम से सूबे में पानी लाने की तैयारी कर रही है। अभी तक की सरकारों ने यह प्रयास नहीं किया है। हमारी सरकार का ही प्रयास है कि दक्षिण हरियाणा में हमने टेल तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि लखवार बांध के साथ हमारा एमओयू साइन हो गया है। इसका पानी भी शीघ्र मिलना शुरू हो जाएगा।
हरियाणा में तेजी से गिरते हुए जलस्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि कई क्षेत्र ऐसे हैं जो डार्क जोन में जा रहे हैं। सरकार ने मेरा पानी मेरी विरासत के नाम से योजना शुरू की है। जिससे हम अपनी आने वाले पीढ़ी के लिए जो जमीन छोड़ कर जाएं वह बंजर न हो। सरकार का प्रयास है कि एक किलो चावल की खेती में कई सौ लीटर पानी खर्च होता है। इसलिए हमने किसानों को जागरूक किया है कि जहां पर पानी की मात्रा कम है वहां पर किसान धान की फसल की जगह अन्य फसलें उगाएं।