फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Assembly Elections, Ashok Tanwar, Haryana congress, BS Hooda And Selja Kumari

अशोक तंवर के हंगामे से नाराज कांग्रेस, पार्टी ने लिया बड़ा फैसला, इन पर रखेगी नजर

Fri, 04 Oct 2019 05:31 PM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 04 Oct 2019 05:31 PM IST
विज्ञापन
Haryana Assembly Elections, Ashok Tanwar, Haryana congress, BS Hooda And Selja Kumari
अशोक तंवर - फोटो : ani

हरियाणा कांग्रेस में फेरबदल के बाद गुटबाजी कम होने के बजाए और बढ़ गई है। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद से सीधा टकराव मोल ले लिया है। वह किसी की सुनने को तैयार नहीं। पांच साल आठ महीने तक कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहे तंवर को सबसे अधिक मलाल चुनाव से ठीक पहले पद से हटाने का है। जिसकी टीस उभर-उभर कर बाहर आ रही है।

विज्ञापन


लंबे समय से अध्यक्ष की कुर्सी संभाल रहे तंवर के साथ पूरे प्रदेश में कांग्रेस नेता व कार्यकर्ता उनके साथ टिकट की चाह में जुड़े हुए थे। चुनाव आचार संहिता के चंद दिन पहले नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति से तंवर के साथ ही टिकट के इच्छुक नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी झटका लगा। तंवर आम कार्यकर्ताओं व अपने समर्थकों को टिकट दिलाना चाह रहे थे, लेकिन सैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जुगलबंदी के आगे उनकी बिल्कुल न चली। 
विज्ञापन


उन्होंने पार्टी हाईकमान को 80 सीटों पर टिकटार्थियों के नाम दिए थे, जिनमें से इक्का-दुक्का को ही टिकट मिला है। टिकट आवंटन में दरकिनार किए जाने की भनक तंवर को लग चुकी थी, इसलिए ही बुधवार को सोनिया गांधी के आवास के बाहर दिल्ली में उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। सोनिया बदलाव के बाद तंवर को बुलाकर समझा चुकी थीं, मगर वह नहीं माने। 

विज्ञापन
विज्ञापन

बुधवार के हंगामे के बाद पार्टी तंवर से नाराज है। सूत्रों के अनुसार चुनाव के दौरान तंवर को उनके हाल पर छोड़ने का निर्णय लिया गया है। साथ ही प्रदेश में 90 सीटों पर अब यह नजर रखी जाएगी कि तंवर समर्थक किन-किन सीटों पर बगावत कर पार्टी उम्मीदवार को नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट भी पार्टी के पर्यवेक्षक तैयार करेंगे।

2015 से बढ़ी हुड्डा के साथ ज्यादा खटास
2014 में लोकसभा चुनाव के टिकट वितरण के दौरान हुड्डा व तंवर के बीच मतभेद गहरा गए थे। दोनों के रिश्तों में इसके बाद खटास बढ़ती गई। सितंबर 2015 में दिल्ली में हुई कांग्रेस की किसान रैली में तंवर के साथ मारपीट हुई। आरोप हुड्डा समर्थकों पर लगा। तंवर की गर्दन में भी चोट आई। इसकी शिकायत हाईकमान से हुई। 

पूरे मामले की जांच के लिए शिंदे कमेटी बनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिससे हुड्डा के खिलाफ तंवर का आक्रोश और बढ़ गया। दूसरी और हुड्डा समर्थक विधायकों ने तंवर को हटाने की मुहिम तेज कर दी। हालांकि, इसमें उन्हें लंबा समय लग गया और संगठन में बदलाव विधानसभा चुनाव से ऐन पहले हुआ। अध्यक्ष पद से हटने के बाद से ही तंवर अपनी राहें हुड्डा, सैलजा व पार्टी से जुदा किए हुए हैं। अब उन्होंने इस्तीफों का दांव चल दिया है। देखना है तंवर की लड़ाई कब तक जारी रहती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed