विस चुनावः हरियाणा में दुश्मन बनेंगे पंजाब के दोस्त
हरियाणा के रण में पंजाब के दो सहयोगी दलों के आमने-सामने होने की तैयारी हो चुकी है। चुनावी बिसात बिछते ही पंजाब के सहयोगी दलों शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा के प्रदेश नेताओं ने हरियाणा का रुख करने के लिए कमर कस ली है।
प्रदेश में आपसी तालमेल से सरकार चला रहे दोनों ही दलों के नेता आने वाले दिनों में हरियाणा में एक-दूसरे के खिलाफ आग उगलते दिखाई पड़ें तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं होगी। इसकी वजह रहेगी, हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की इनेलो से दूरी और शिअद का चौटाला की इस पार्टी से समझौता।
काफी लंबा साथ है शिअद-भाजपा का
जिस तरह से शिअद-भाजपा गठबंधन लंबे समय से चला आ रहा है, वैसे ही बादल-चौटाला परिवारों के रिश्ते भी जग-जाहिर हैं। पंजाब में तो बादल पिछले कई दशकों से (एक-दो मौकों को छोड़कर) भाजपा का दामन थामे हुए हैं,
जबकि हरियाणा के संबंध में देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री चौ. देवीलाल (इनेलो प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला के पिता) के परिवार की बात आते ही, शिअद का मोह अपने प्रादेशिक सहयोगी से कुछ भंग सा हो जाता है।
2009 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में यह साफ देखने को मिला। शिअद ने हरियाणा में इनेलो के साथ गठबंधन में ही यह दोनों चुनाव लड़े और सीटें जीतने में सफलता भी हासिल की।
इस चुनाव में शिअद-इनेलो गठबंधन
आगामी विधानसभा चुनाव में भी शिअद व इनेलो गठबंधन का यह सिलसिला दोहराने जा रहा है। शिअद-इनेलो गठबंधन उम्मीदवार मैदान में होंगे और उनकी मुख्य टक्कर कांग्रेस सहित भाजपा उम्मीदवारों से होगी।
चुनाव के बाद के हालात क्या होंगे, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन प्रचार के दौरान पंजाब के सहयोगियों के परस्पर विरोधी शाब्दिक बाण हरियाणा की धरती पर एक-दूसरे को छलनी करेंगे। यह सिलसिला चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के समय से ही शुरू हो जाएगा।
इस वक्त पंजाब में भी हैं रिश्ते तल्ख
इस वक्त पंजाब में भी दोनों दलों के नेताओं के रिश्ते तल्ख ही चल रहे हैं। पिछले समय में वैट, एडवांस टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स, रेत-बजरी, सीएलयू आदि मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच टकराव हो चुका है।
इन मसलों पर दोनों ही तरफ के नेताओं की परस्पर विरोधी बयानबाजी भी देखने को मिली। इस दौरान भाजपा की ओर से हमला होता था तो शिअद की तरफ से तथ्यों सहित जवाब दिया जाता था। एडवांस टैक्स वापस हुआ तो प्रॉपर्टी टैक्स कम करने की तैयारी है, लेकिन तल्खी अभी जारी है।
करना पड़ा समन्वय कमेटी का गठन
अकाली-भाजपा रिश्तों में समय-समय पर आती खटास और बढ़ती तल्खी के मद्देनजर कुछ दिन पहले दोनों दलों के तीन-तीन नेताओं पर आधारित छह सदस्यीय समन्वय कमेटी का गठन किया गया।
दोनों तरफ से परस्पर विरोधी बयानबाजी की वजह से गठबंधन के संबंध में नकारात्मक प्रभाव लोगों के बीच जा रहा था। इसे गंभीरता से लेते मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उक्त कमेटी का गठन किया। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद बनी भाजपा की समीक्षा कमेटी ने भी इस कमेटी के गठन की सिफारिश अपनी रिपोर्ट में की थी।