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हरियाणाः आरोही स्कूलों का स्टाफ लड़ रहा हक की लड़ाई, महीनों से फाइल शिक्षा विभाग में अटकी
Fri, 21 Aug 2020 02:48 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 21 Aug 2020 02:48 PM IST
सार
- उपनियमों के मुताबिक पांच साल बाद आरोही मॉडल स्कूलों के स्टाफ को रेगुलर करने का मामला
- सीएम के प्रधान सचिव ने इस संदर्भ में मांगे हैं कमेंट, मगर फाइल नहीं भेज रहा शिक्षा विभाग
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विस्तार
हरियाणा के शिक्षा पिछड़े खंडों में खोले गए 36 आरोही स्कूलों (अंग्रेजी माध्यम) का स्टाफ आज भी अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है। 2018 से उपनियमों के बावजूद पांच साल की सर्विस पूरी करने के बाद भी ये स्टाफ आज तक रेगुलर होने के लिए संघर्ष कर रहा है। मगर शिक्षा विभाग इनके मामले को लगातार लटकाए जा रहा है।
इस संदर्भ में करीब आठ महीने से फाइल हरियाणा शिक्षा विभाग के पास अटकी है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दो बार इस बाबत शिक्षा विभाग के आला अफसर को कमेंट के साथ फाइल भेजने को लिख चुके हैं। मगर उसके बावजूद फाइल आगे नहीं सरकी। अब फिर से प्रधान सचिव ने इस मामले में आरोही मॉडल स्टाफ एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के ज्ञापन पत्र को विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजते हुए उस पर लिखा है कि इस मामले पर आपके व्यक्तिगत ध्यान की जरूरत है, कृपया इसे देखें।
2018 में उप नियमों के तहत ही इन स्कूलों के नियमित करने के लिए योग्य स्टाफ के केस मांगे गए थे। जिन्हें जिला शिक्षा अधिकारियों के मार्फत हरियाणा शिक्षा निदेशालय को भेजवा दिया गया था। मगर उसके बावजूद आज तक ये मामला लटका हुआ है। अब सीएम के प्रधान सचिव ने शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को ये मामला खुद व्यक्तिगत तौर पर देखकर रिपोर्ट करने को कहा है।
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इस संदर्भ में करीब आठ महीने से फाइल हरियाणा शिक्षा विभाग के पास अटकी है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दो बार इस बाबत शिक्षा विभाग के आला अफसर को कमेंट के साथ फाइल भेजने को लिख चुके हैं। मगर उसके बावजूद फाइल आगे नहीं सरकी। अब फिर से प्रधान सचिव ने इस मामले में आरोही मॉडल स्टाफ एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के ज्ञापन पत्र को विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजते हुए उस पर लिखा है कि इस मामले पर आपके व्यक्तिगत ध्यान की जरूरत है, कृपया इसे देखें।
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2018 में उप नियमों के तहत ही इन स्कूलों के नियमित करने के लिए योग्य स्टाफ के केस मांगे गए थे। जिन्हें जिला शिक्षा अधिकारियों के मार्फत हरियाणा शिक्षा निदेशालय को भेजवा दिया गया था। मगर उसके बावजूद आज तक ये मामला लटका हुआ है। अब सीएम के प्रधान सचिव ने शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को ये मामला खुद व्यक्तिगत तौर पर देखकर रिपोर्ट करने को कहा है।
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स्टाफ को ट्रांसफर का भी हक नहीं
इन आरोही स्कूलों केंद्र सरकार की ग्रांट की मदद से 2011 को खोला गया था। मकसद था शैक्षणिक पिछड़े ब्लाक के छात्रों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की व्यवस्था उपलब्ध करवाना। इन स्कूलों के लिए विभिन्न कैटेगरी के करीब 2232 पदों को स्वीकृत किया गया। इनके लिए सर्विस बाइलाज 2011 तैयार किया गया।
इसी में ये उपनियम था कि जो स्टाफ अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा कर लेगा और उसका कामकाज संतोषजनक होगा, उसे नियमित कर दिया जाएगा। तब तक ये स्टाफ कांट्रेक्ट पर काम करेगा। मगर 2018 में इस संदर्भ में केस मांगने के बावजूद फाइल लटकी हुई है। इन्हें नियमित करना तो दूर स्टाफ को ट्रांसफर का भी हक नहीं है।
वर्तमान में जो अध्यापक कार्य कर रहे हैं उन्होंने पारिवारिक, शारीरिक और मेडिकल ग्राउंड से रिक्त पदों पर तबादला करने के लिए आवेदन किया हुआ है। जिसे संबंधित जिलों के डीसी, सिविल सर्जन व जिला शिक्षा अधिकारी ने अनुमोदित भी किया है। यह कहकर कि टीचर कांट्रेक्ट बेस पर लगे हुए हैं और उनका ट्रांसफर करने का कोई नियम नहीं है कहकर उन्हें ट्रांसफर सुविधा से भी वंचित रखा हुआ है।
इसी में ये उपनियम था कि जो स्टाफ अपने पांच साल का कार्यकाल पूरा कर लेगा और उसका कामकाज संतोषजनक होगा, उसे नियमित कर दिया जाएगा। तब तक ये स्टाफ कांट्रेक्ट पर काम करेगा। मगर 2018 में इस संदर्भ में केस मांगने के बावजूद फाइल लटकी हुई है। इन्हें नियमित करना तो दूर स्टाफ को ट्रांसफर का भी हक नहीं है।
वर्तमान में जो अध्यापक कार्य कर रहे हैं उन्होंने पारिवारिक, शारीरिक और मेडिकल ग्राउंड से रिक्त पदों पर तबादला करने के लिए आवेदन किया हुआ है। जिसे संबंधित जिलों के डीसी, सिविल सर्जन व जिला शिक्षा अधिकारी ने अनुमोदित भी किया है। यह कहकर कि टीचर कांट्रेक्ट बेस पर लगे हुए हैं और उनका ट्रांसफर करने का कोई नियम नहीं है कहकर उन्हें ट्रांसफर सुविधा से भी वंचित रखा हुआ है।
हताश हो इस्तीफा देकर दूसरी नौकरियों का विकल्प देख रहा है स्टाफ
चूंकि ये स्कूल अंग्रेजी माध्यम है, तो जाहिर है टीचिंग स्टाफ भी खासा योग्य है। मगर अब इस स्टाफ में जब नियमित न होने की आस टूटने लगी है, तो ये योग्य स्टाफ भी अपने पदों से इस्तीफा देकर दूसरी नौकरियों का विकल्प तलाश रहा है। स्टाफ ही नहीं एक प्राचार्य तक ने लगभग साढ़े सात साल की नौकरी के बाद जून 2020 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जबकि स्टाफ के दो लोगों का तो निधन भी हो गया है।
आरोही स्कूलों के स्टाफ को नियमित करने का मामला संज्ञान में है। इस पर एग्जामिन करवा रहे हैं। सरकार आरोही स्कूलों के स्टाफ के हितों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। इस स्टाफ के लिए जरूर व्यवस्था बनाकर इन्हें राहत दी जाएगी। अभी इस मामले में वर्तमान स्टेट्स क्या है, अफसरों से रिपोर्ट ली जाएगी।
- कंवरपाल गुर्जर, शिक्षामंत्री, हरियाणा
आरोही स्कूलों के स्टाफ को नियमित करने का मामला संज्ञान में है। इस पर एग्जामिन करवा रहे हैं। सरकार आरोही स्कूलों के स्टाफ के हितों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। इस स्टाफ के लिए जरूर व्यवस्था बनाकर इन्हें राहत दी जाएगी। अभी इस मामले में वर्तमान स्टेट्स क्या है, अफसरों से रिपोर्ट ली जाएगी।
- कंवरपाल गुर्जर, शिक्षामंत्री, हरियाणा