बेटी का जज्बाः पढ़ाई सड़क पर, हौंसला डाक्टर बनने का
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दिन में मां के साथ छलियां बेचती है। रात को सड़क किनारे बैठकर ही मोबाइल की रोशनी में पढ़ाई करती है। जानिए कौन है ये बहादुर बेटी। हम बात कर रहे हैं मोहाली के लालड़ू की रहने वाली 14 वर्षीय किरण की।
एक गरीब रेहड़ी चालक की बेटी भी शिक्षा के सहारे अपने और परिवार के सपने को साकार करने में जुटी है। दरअसल, रेहड़ी वाले की बेटी अपनी मां के साथ सड़क किनारे छल्लियां (मक्के के भुट्टे) बेचते हुए खाली समय में मोबाइल की रोशनी में पढ़ाई करती है।
दप्पर कॉलोनी के गरीब परिवार की इस बेटी का सपना डॉक्टर बन लोगों की सेवा करना है। सड़क के किनारे बैठकर इस प्रकार पढ़ाई करने के जज्बे को यहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति सराह रहा है। किरण अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी है जो सरकारी स्कूल दप्पर में 9वीं कक्षा की छात्रा है।
घर में नहीं है लाइट, डॉक्टर बनना चाहती है
किरण ने बताया कि उसके पिता राम राज अपनी खस्ताहाल रेहड़ी चलाकर जैसे तैसे परिवार का पालन पोषण करते हैं। लेकिन, घर की आर्थिक स्थित ठीक नहीं होने के कारण वह रोज शाम को मां के साथ दप्पर मार्केट में अंडर ब्रिज के पास छल्लियां बेचती है। रात को करीब आठ बजे के बाद जैसे ही ग्राहक कम होते हैं तो उसे स्कूल का होमवर्क करने का मौका मिल जाता है।
किरण ने बताया कि सड़क किनारे लाइट का कोई प्रबंध नहीं होने के कारण वह परिवार के मोबाइल की लाइट जलाकर होमवर्क करती है। किरण के घर में भी लाइट नहीं है।
किरण की स्कूल अध्यापिका रेखा ने बताया कि किरण इसी वर्ष उनके स्कूल में आठवीं पास करके 9वीं में आई है। वह डॉक्टर बनना चाहती है। वह एक अच्छे स्वभाव की लड़की है। हर बात को ध्यान से सुनती है और अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से समझती है।
स्कूल अध्यापिका ने बताया कि उसकी लगन व गरीबी को देखते हुए उसे हर प्रकार की सहायता की जाएगी। किरण की पिता रामराज ने बताया कि उसकी रेहड़ी कंडम हो चुकी है, उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है।