फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Gulzar's songs stirred a melody of memories; a musical evening steeped in soulful notes.

Chandigarh News: गुलजार के गीतों ने छेड़ी यादों की सरगम, सुरों में डूबी संगीतमय शाम

Mon, 27 Jul 2026 02:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2026 02:14 AM IST
विज्ञापन
Gulzar's songs stirred a melody of memories; a musical evening steeped in soulful notes.
चंडीगढ़। मुसाफिर हूं यारों, आने वाला पल, तेरे बिना जिया जाए ना, नाम गुम जाएगा, फिर वही शाम, यारा सीली सीली, ऐ जिंदगी गले लगा ले और चप्पा-चप्पा चरखा चले जैसे गुलज़ार के कालजयी गीतों ने रविवार शाम महाराष्ट्र भवन, सेक्टर-19 डी को सुरों और संवेदनाओं से सराबोर कर दिया। संस्कृति कलाकुंज सोसाइटी की ओर से आयोजित गुलजार की कलम से कार्यक्रम में ट्राईसिटी के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। गीतों के साथ गुनगुनाते दर्शकों की तालियों से सभागार बार-बार गूंजता रहा। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने खड़े होकर कलाकारों का अभिवादन किया।
विज्ञापन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्रिफिथ इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक रजत घई रहे। प्रसिद्ध कलाकार चित्रा सिंह सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। एकता नागपाल, श्याम जैतेली, सुनील शर्मा और एमबी साने सहित शहर की अनेक गणमान्य हस्तियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। अतिथियों ने संस्कृति कलाकुंज द्वारा साहित्य और संगीत को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।
विज्ञापन

कार्यक्रम का संयोजन पल्लवी पिंगे और संगीता बेलोकार ने किया। कुछ तो था तेरे मेरे दरमियान... जो खुदा हो गया... विषय पर आधारित इस संगीतमय शाम का प्रभावशाली संचालन सूत्रधार कल्पना साने ने किया। महेंद्र भूतियानी ने मुसाफिर हूं यारों, भूपिंदर सिंह ने आने वाला पल, दर्शना चंदवालकर ने तेरे बिना जिया जाए ना, मीनल भूतियानी ने दिल ढूंढता है और नाम गुम जाएगा, राजेंद्र बेलोकार ने फिर वही शाम, आभा शुक्ला ने यारा सीली सीली, धवल शुक्ला ने ऐ जिंदगी गले लगा ले, पल्लवी पिंगे ने फिलहाल, जसबीर सिंह ने हवाओं पे लिख दो, साक्षी पाठक ने तुम पुकार लो तथा अन्य कलाकारों ने भी गुलजार के लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

युगल गीतों में हुजूर इस कदर, इस मोड़ से जाते हैं, आपकी आंखों में कुछ, रोज-रोज आंखों तले और तुम आ गए हो को खूब सराहना मिली। कार्यक्रम का समापन समूह गीत चप्पा-चप्पा चरखा चले से हुआ। संस्कृति कलाकुंज की अध्यक्ष पल्लवी पिंगे ने कहा कि गुलजार की रचनाएं पीढ़ियों को जोड़ने का काम करती हैं। महासचिव संगीता बेलोकार ने दर्शकों के उत्साह को संस्था के लिए प्रेरणादायक बताया। संस्था के सलाहकार अमित पिंगे ने अतिथियों, कलाकारों और श्रोताओं का आभार प्रकट किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed