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कोरोनाः गुलदाउदी शो पर असमंजस बरकरार, जमीन से गमलों में आया पौधा, 250 से अधिक किस्में

Mon, 19 Oct 2020 09:53 AM IST
खुशबू गोयल नीरज कुमार, चंडीगढ़
नीरज कुमार, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 19 Oct 2020 09:53 AM IST
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Guldaudi Show May Cancel due to Corona Pandemic
गुलदाउदी के पौधे - फोटो : अमर उजाला
गुलदाऊदी शो सेक्टर-33 के टैरेस्ड गार्डन में तीन दिनों के लिए नबंवर के आखिरी या दिसंबर के पहले सप्ताह में होता है। इस बार कोविड 19 के कारण गुलदाऊदी शो होने की संभावनाएं कम हैं, लेकिन माली गुलदाऊदी को उगाने में तत्परता से लगे हैं। जमीन में जड़ें लगने के बाद अब गुलदाऊदी को गमलों में लाया जा रहा है।
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250 से अधिक किस्मों को उगाया जा रहा है। नवंबर के अंतिम सप्ताह में फूल पूरी तरह से खिल जाते हैं। फूलों के खिलने के बाद ही किस्मों का पता चलेगा। गुलदाऊदी के पौधों और फूलों पर कुछ दवाइयों का छिड़काव किया जाता है। छिड़काव करने से पौधे मजबूत होते हैं। सर्दी के सीजन में गुलदाऊदी में सबसे पहले फूल आते हैं। इस वजह से कीड़े हमला करते हैं। यह दवाइयां पौधों का बचाव करती हैं।
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गुलदाऊदी की किस्में
गुलदाऊदी शो में स्नो बॉल, सोनार बंगला, किकू ब्लोकी, महात्मा गांधी, कस्तूरबा गांधी, मिस इंडिया, चंद्रमा, सन, गोल्डन जुबली, सिल्वर जुबली, राजा, कवर गर्ल, रेड वाइन, डेकोरेटिव पिंग, सुपर ग्लो, कोका सूजन, कासा गरंडा, पिंब क्लाउड, सिल्क वरोकल, ड्रीम कैस्टल सहित 250 से अधिक किस्में उगाई जा रही हैं।
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ऐसे तैयार होता है गुलदाऊदी

पहले मदर प्लांट को क्यारियों में लगाया जाता है। मदर प्लांट को मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में लगाया जाता है। 20 से 25 दिनों में इसमें जड़ें आती हैं। जड़ें आने के बाद जून के अंतिम या जुलाई के पहले सप्ताह से इसे गमलों में लगाया जाता है। मदर प्लांट के बढ़ जाने के बाद कटिंग की जाती है। कटिंग किए गए 100 से 150 डंठलों को एक साथ बंडल बनाकर रेत में लगाया जाता है।

गमलों से पहले जमीन पर होता है ट्रांसप्लांट
इनमें 21 दिनों में जड़ें आनी शुरू हो जाती हैं। जड़ें आने के बाद जमीन में ट्रांसप्लांट किया जाता है। जमीन में ट्रांसप्लांट के 15 से 20 दिनों में जमीन में भी जड़ें आने लगती हैं। इसके बाद इन्हें मिट्टी और खाद का मिश्रण बनाकर गमलों में लगा दिया जाता है। इन्हें अगस्त के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर के मध्य तक लगा दिया जाता है। इनकी तीन बार कटिंग की जाती है। 

गमलों में गुलदाऊदी को लगाया गया है। इसकी सही से देखभाल की जा रही है। दवाइयों का छिड़काव भी हो रहा है। नौ हजार गमलों में करीब 250 किस्में लगाई गई हैं। 
- केपी सिंह, अधीक्षण अभियंता बागवानी विभाग नगर निगम चंडीगढ़
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