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गुड़िया मर्डर केस : सीबीआई कोर्ट में पांच आरोपियों ने दायर की जमानत याचिका
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चंडीगढ़। गुड़िया मर्डर केस के एक आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में पांच आरोपियों कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत ने चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। बचाव पक्ष के मुताबिक, आईजी जहूर एच जैदी समेत सभी आरोपियों ने मार्च महीने में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन यह याचिका एक महीना देरी से अदालत में पहुंची। आईजी जहूर एच जैदी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट दोनों में जगह जमानत याचिका दायर की थी। चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट से उनकी याचिका को खारिज कर दिया है जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई को चार मई तक के लिए स्थगित कर दिया है।
बता दें कि शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की छात्रा 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल में उसकी लाश मिली थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। इनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था, लेकिन कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी। इस केस में सीबीआई ने आईजी जहूर एच जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, ठयोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था, लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ, जिस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।
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बता दें कि शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की छात्रा 4 जुलाई 2017 को लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल में उसकी लाश मिली थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। इनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था, लेकिन कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी। इस केस में सीबीआई ने आईजी जहूर एच जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, ठयोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफीक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था, लेकिन वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ, जिस वजह से सुप्रीम कोर्ट ने केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।
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