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Gurdaspur: विनोद खन्ना और सनी देओल को संसद पहुंचा चुका गुरदासपुर... इस बार स्थानीय चेहरों पर भरोसा

Fri, 03 May 2024 12:20 PM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 03 May 2024 12:20 PM IST
सार

पंजाब की हाईप्रोफाइल सीट गुरदासपुर में भी इस बार कड़ा मुकाबला होने जा रहा है, क्योंकि 27 साल बाद शिअद अकेला चुनाव लड़ रहा है। 1997 में अकाली दल-भाजपा के बीच हुए समझौते के चलते गठबंधन में भाजपा इस सीट पर अपना प्रत्याशी उतारती रही है। गुरदासपुर में इस बार भाजपा ने भी सेलिब्रिटी चेहरे से भी दूरी बना ली है। सभी राजनीतिक दलों ने गुरदासपुर से स्थानीय नेताओं को ही चुनाव मैदान में उतारा है। 

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Ground Report of Gurdaspur Loksabha Seat of Punjab
शैरी कलसी, सुखजिंदर रंधावा, दलजीत चीमा और दिनेश बब्बू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए गतिविधियां तेज हो गई हैं। सात मई से प्रदेश की सभी 13 लोकसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ऐसे में राजनीतिक दलों ने भी प्रचार में तेजी लाने की शुरुआत कर दी है। 

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आम आदमी पार्टी ने सभी सीटों पर अपनी रैलियां शुरू कर दी हैं। वहीं कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल व भारतीय जनता पार्टी ने भी चुनाव प्रचार में कूदने की तैयारी कर ली है। 
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गुरदासपुर में भी चुनाव प्रचार तेज हो गया है। इस बार पार्टियों ने सेलिब्रिटी से दूरी बनाते हुए स्थानीय चेहरों पर भरोसा जताया है। पाकिस्तान से सटी इस सीट पर देश की निगाहें रहती हैं। यहां से सनी देओल व विनोद खन्ना जैसे दिग्गज अभिनेता सांसद रह चुके हैं। 
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भारतीय जनता पार्टी ने स्थानीय नेता दिनेश बब्बू को अपना प्रत्याशी बनाया है। बब्बू सुजानपुर से तीन बार विधायक और विधानसभा में उपाध्यक्ष रह चुके हैं। दिवंगत अभिनेता व पूर्व सांसद विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना भी इस सीट से अपनी दावेदारी पेश कर रही थीं, लेकिन पार्टी ने उनको टिकट नहीं दिया। इसका कारण है कि पहले ही मौजूदा सांसद सनी देओल के लोकसभा क्षेत्र में सक्रिय न रहने के चलते पार्टी को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। 

यही कारण है कि पार्टी कार्यकर्ता और लोगों की मांग पर इस बार स्थानीय नेता बब्बू को ही भाजपा ने उम्मीदवारी दी है। बब्बू के सामने इस सीट पर शिअद ने डॉ. दलचीत सिंह चीमा को उतारा है। चीमा 2012 से 2017 तक पंजाब के शिक्षा मंत्री रहे व मुख्यमंत्री के सलाहकार के पद भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। हिंदू बहुल क्षेत्र होने के बावजूद अकाली दल ने सिख चेहरे पर भरोसा जताया है। यही कारण है कि विवादों से दूर रहे डॉ. चीमा के लिए राह आसान नहीं है और लोकसभा क्षेत्र में पकड़ बनाने के लिए उनको कड़ी मेहनत करनी होगी। 

गुरदासपुर सीट का महत्व यहीं से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने भी इस सीट पर बड़े चेहरे सुखजिंदर सिंह रंधावा को चुनावी दंगल में उतारा है। सितंबर 2021 से मार्च 2022 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे रंधावा की इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। वह 2012, 2017 और 2022 में डेरा बाबा नानक से विधायक हैं। आप ने भी इस सीट पर बाहरी के बजाय स्थानीय नेता अमनशेर सिंह शैरी कलसी पर ही दांव खेला है। मीत हेयर के बाद सबसे युवा नेता शैरी कलसी बटाला विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं व पार्टी के यहां सक्रिय सदस्य हैं। वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव में बटाला से वह कांग्रेस उम्मीदवार अश्वनी सेखड़ी को 28,472 मतों से मात देकर विधायक बने थे। गुरदासपुर में वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा के सनी देयोल ने चुनाव जीता था। देयोल ने कांग्रेस उम्मीदवार सुनील जाखड़ को 82459 मतों से मात दी थी। 

गुरदासपुर में किसान आंदोलन 2.0 के चलते भी सियासत गर्माई हुई है। प्रत्याशियों को किसानों के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब व हरियाणा बॉर्डर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य समेत अन्य मांगों को लेकर डटे किसानों की तरफ से स्थानीय लोगों को सवालों की लिस्ट थमा रखी है। साथ ही आह्वान किया है कि जो भी प्रत्याशी उनके क्षेत्र में आए, उनका इन सवालों के साथ स्वागत करें और उनसे जवाब मांगें।  

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस रही आगे  
गुरदासपुर के नौ विधानसभा क्षेत्रों पर पिछली बार कांग्रेस आगे रही थी। कांग्रेस ने यहां सबसे अधिक छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। आप के खाते में दो और भाजपा के हाथ एक सीट आई थी। सुजानपुर से कांग्रेस उम्मीदवार नरेश पुरी ने भाजपा प्रत्याशी दिनेश बब्बू को 4636 मतों से मात दी थी। भोआ से आप प्रत्याशी लाल चंद ने कांग्रेस के जोगिंदर पाल को 1204 मतों से हराया था। पठानकोट में भाजपा प्रत्याशी अश्वनी कुमार शर्मा ने कांग्रेस के अमित विज को 7759 मतों के अंदर से हराया था। 

इसी तरह गुरदासपुर में कांग्रेस के बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने शिअद के गुरबचन सिंह को 7335 मतों से मात दी थी। इसी तरह दीनानगर से कांग्रेस की अरुणा चौधरी ने आप के शमशेर सिंह, कादियां में कांग्रेस के प्रताप बाजवा ने शिअद के गुरइकबाल सिंह और बटाला में आप के अमनशेर सिंह ने कांग्रेस के अश्वनी सेखड़ी को हराया था। फतेहगढ़ चूड़ियां से कांग्रेस प्रत्याशी तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और डेरा बाबा नानक से कांग्रेस के सुखजिंदर सिंह रंधावा ने जीत दर्ज की थी। 

1895 मतदान केंद्रों पर होगा उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला 
चुनाव आयोग की तरफ से 1 मार्च, 2024 तक जारी मतदाता सूची के अनुसार इस लोकसभा सीट पर 15,95,300 से मतदाता हैं। इसमें 8,44,299 पुरुष और 7,50,965 महिला मतदाता हैं। इसमें 85 वर्ष से ऊपर के 14,232, दिव्यांग 11,301 और एनआरआई 442 मतदाता हैं। 1895 मतदान केंद्रों पर सभी प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होगा। 

विनोद खन्ना ने ध्वस्त किया था कांग्रेस का किला
बॉर्डर से सटी पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट पर आजादी के बाद से ही कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। 1998 में भाजपा से चुनाव लड़ते हुए विनोद खन्ना ने इस सीट पर जीत दर्ज की। वह 1999, 2004 में भी यहां से सांसद चुने गए। 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी प्रताप बाजवा ने दोबारा इस सीट पर पार्टी को जीत दिलाई। 2014 में भाजपा से दोबारा विनोद खन्ना और 2017 उपचुनाव में कांग्रेस से चुनाव लड़ते हुए सुनील जाखड़ इस सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। 1980 से 1996 तक कांग्रेस प्रत्याशी सुखबंस कौर भिंडर लगातार पांच बार गुरदासपुर से सांसद रहीं। 


विकास की आस, वोट उसी को जो काम करेगा 
बॉर्डर के साथ लगते इस लोकसभा क्षेत्र पर लोग विकास की आस लगाए बैठे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो यहां विकास करवाएगा, उसी को हमारा वोट जाएगा। स्थानीय निवासी लखविंदर सिंह ने कहा कि गुरदासपुर में इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सकें। दूसरे जिलों के मुकाबले गुरदासपुर पिछड़ गया है, क्योंकि इस तरफ सरकारों की तरफ से ध्यान नहीं दिया गया है। इसी तरह स्थानीय दुकानदार सुभाष ने बताया कि जो हमारे काम करवाएगा, हम उसी के साथ जाएंगे। गुरदासपुर में केंद्र व राज्य सरकार को मिलकर परियोजनाओं पर काम करना चाहिए। चाहे वह रेल लिंक, सड़क मार्ग या फिर फ्लाईओवर का काम हो। इन परियोजनाओं के पूरा होने से विकास को रफ्तार मिलेगी और साथ ही व्यापार भी आगे बढ़ेगा।

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