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Chandigarh: ट्रिब्यून फ्लाईओवर के निर्माण को मिली हरी झंडी, हाईकोर्ट ने कहा-ये समय की जरूरत, देरी ठीक नहीं
Wed, 01 May 2024 05:45 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 01 May 2024 05:45 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यून चौक से जीरकपुर पहुंचने में कई बार तो एक घंटे से अधिक का समय लग जाता है। लोग ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह अब समय की जरूरत बन गया है। पांच साल से मामला विचाराधीन है और प्रोजेक्ट रुका हुआ है। अब और देरी जनहित में ठीक नहीं। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने फ्लाईओवर के निर्माण पर लगी रोक हटा दी।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ में हल्लोमाजरा चौक से जीएमसीएच चौक तक बनने वाले फ्लाईओवर को समय की जरूरत बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इसके निर्माण पर लगी रोक हटाते हुए इसे हरी झंडी दे दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है। पहले ही पांच साल की देरी हो चुकी है, अब और देरी नहीं होनी चाहिए। इस फ्लाईओवर के निर्माण के लिए 700 पेड़ काटे जाने हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निर्माण शुरू करने के समय ही इनकी कटाई की जाए और इनके स्थान पर पांच गुना पौधे लगाए जाएं।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर द रन क्लब ने अदालत को बताया था कि उन्हें एक समाचार पत्र की खबर से पता चला कि ट्रिब्यून चौक पर बनने वाले फ्लाईओवर के लिए दक्षिण और पूर्व मार्ग के किनारे लगे 700 पेड़ काटे जाने हैं। इन पेड़ों पर निशान भी लगा दिए गए हैं। क्लब के अनुसार, ये सभी 700 पेड़ शहर में दशकों से हरे-भरे खड़े हैं। ये पेड़े शहर और उसकी यादों का एक हिस्सा हैं। ऐसे में उन्हें नहीं काटा जाना चाहिए।
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याचिकाकर्ता ने कहा कि ये पेड़ शहर के पर्यावरण के लिए भी बेहद जरूरी हैं। जब हवा तेजी से दूषित हो रही है और उसकी गुणवत्ता लगातार गिर रही है तो ऐसे दौर में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटना सीधे तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना है। क्लब ने हाईकोर्ट को बताया कि जब चंडीगढ़ का मास्टर प्लान-2031 बनाया गया था तो इसमें ट्रिब्यून चौक में बन रहे फ्लाईओवर का न तो कोई जिक्र था और न ही कोई प्रावधान। याची ने कहा कि मास्टर प्लान में अंडर पास का प्रावधान है और वही बनाया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्ष 2019 में फ्लाईओवर के निर्माण पर रोक लगा दी थी और तब से यह मामला विचाराधीन था। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन की ओर से कहा गया कि जितने पेड़ काट जाने हैं, उससे कहीं ज्यादा पौधे प्रशासन अब तक लगा चुका है और आगे भी पांच गुना ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है। पहले ही पांच साल की देरी हो चुकी है, अब और देरी नहीं होनी चाहिए। इस फ्लाईओवर के निर्माण के लिए 700 पेड़ काटे जाने हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निर्माण शुरू करने के समय ही इनकी कटाई की जाए और इनके स्थान पर पांच गुना पौधे लगाए जाएं।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर द रन क्लब ने अदालत को बताया था कि उन्हें एक समाचार पत्र की खबर से पता चला कि ट्रिब्यून चौक पर बनने वाले फ्लाईओवर के लिए दक्षिण और पूर्व मार्ग के किनारे लगे 700 पेड़ काटे जाने हैं। इन पेड़ों पर निशान भी लगा दिए गए हैं। क्लब के अनुसार, ये सभी 700 पेड़ शहर में दशकों से हरे-भरे खड़े हैं। ये पेड़े शहर और उसकी यादों का एक हिस्सा हैं। ऐसे में उन्हें नहीं काटा जाना चाहिए।
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याचिकाकर्ता ने कहा कि ये पेड़ शहर के पर्यावरण के लिए भी बेहद जरूरी हैं। जब हवा तेजी से दूषित हो रही है और उसकी गुणवत्ता लगातार गिर रही है तो ऐसे दौर में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटना सीधे तौर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना है। क्लब ने हाईकोर्ट को बताया कि जब चंडीगढ़ का मास्टर प्लान-2031 बनाया गया था तो इसमें ट्रिब्यून चौक में बन रहे फ्लाईओवर का न तो कोई जिक्र था और न ही कोई प्रावधान। याची ने कहा कि मास्टर प्लान में अंडर पास का प्रावधान है और वही बनाया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्ष 2019 में फ्लाईओवर के निर्माण पर रोक लगा दी थी और तब से यह मामला विचाराधीन था। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन की ओर से कहा गया कि जितने पेड़ काट जाने हैं, उससे कहीं ज्यादा पौधे प्रशासन अब तक लगा चुका है और आगे भी पांच गुना ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे।